मुंबई, 29 अगस्त (भाषा) नेपाल-तिब्बत सीमा क्षेत्र में अचानक आई बाढ़ से मची तबाही के बाद डॉक्टर-पर्वतारोही मिलिंद चितले के नेतृत्व वाला 61 सदस्यीय कैलास मानसरोवर तीर्थयात्रियों का जत्था लापता है, जिससे मुंबई में उनके परिजनों की चिंता बढ़ गई है।
डॉ. चितले और उनकी पत्नी जान्हवी के नेतृत्व वाला यह जत्था 23 अगस्त को मुंबई से काठमांडू के लिए रवाना हुआ था। उनसे आखिरी बार 25 अगस्त की शाम संपर्क हुआ था, जिसके कुछ घंटे बाद 26 अगस्त की सुबह भीषण बाढ़ ने प्रमुख आव्रजन ढांचे को तबाह कर दिया।
डॉ. चितले के रिश्तेदार संदीप पाध्ये ने ‘पीटीआई-भाषा’ से बातचीत में कहा, ‘‘हम 25 अगस्त तक मेरी बहन के संपर्क में थे, लेकिन 26 अगस्त को भेजे गए संदेश अब तक पढ़े नहीं गए हैं।’’
पाध्ये ने कहा कि अभी यह स्पष्ट नहीं है कि बाढ़ आने से पहले या उसके दौरान यह जत्था चीन में प्रवेश कर पाया था या नहीं।
कार्यक्रम के अनुसार, यह जत्था 26 अगस्त की सुबह तिमुरे से चीन सीमा के लिए रवाना होने वाला था और शनिवार को मानसरोवर पहुंचना था।
पाध्ये ने कहा, ‘‘हमें अधिकारियों की ओर से कोई जानकारी नहीं मिली है। डॉ. चितले की ओर से स्थापित यात्रा कंपनी ‘हिल्स एंड ट्रेल्स’ के एक अधिकारी स्थिति का पता लगाने के लिए नेपाल गए हैं। तब तक हम उम्मीद लगाए बैठे हैं। हमें जो भी स्थिति होगी, उसे स्वीकार करना होगा।’’
यह जत्था दो सितंबर को कैलास परिक्रमा पूरी करने के बाद छह सितंबर को मुंबई लौटने वाला था।
हिल्स एंड ट्रेल्स की स्थापना करने वाले डॉ. चितले ने अपने क्लीनिक के बाहर एक पोस्टर लगाया था, जिसमें कहा गया था कि यह छह सितंबर तक बंद रहेगा।
डॉ. चितले करीब तीन दशक से हिमालय में ट्रेकिंग अभियानों का नेतृत्व कर रहे हैं।
लापता जत्थे में पीडी हिंदुजा अस्पताल के ट्रांसफ्यूजन मेडिसिन विभाग के सलाहकार डॉ. आनंद देशपांडे और उनकी पत्नी डॉ. गायत्री देशपांडे भी शामिल हैं, जो नानावटी मैक्स अस्पताल में प्रसूति एवं स्त्री रोग विभाग की प्रमुख हैं।
मुंबई निवासी सतीश पाटणकर भी यात्रा पर निकले थे। पाटणकर के रिश्तेदारों ने उनका पता लगाने में मदद के लिए राज्य सरकार के अधिकारियों से संपर्क किया है।
सतीश पाटणकर के भाई संजय ने पत्रकारों को बताया कि सतीश 23 अगस्त को काठमांडू पहुंचे थे और अगले दिन उन्होंने वहां के मौसम के अनुकूल खुद को ढालने और घूमने-फिरने में बिताया। इसके बाद वह 25 अगस्त को नेपाल-तिब्बत सीमा पर स्थित तिमुरे के लिए रवाना हुए।
संजय ने कहा, ‘‘सतीश ने 25 अगस्त की शाम मुझे संदेश भेजकर बताया था कि उनका जत्था तिमुरे पहुंच गया है और अगले दिन सीमा पार करने वाला है। इस जत्थे में करीब 27 लोग शामिल थे।’’
संजय ने बताया कि सतीश को 26 अगस्त को सीमा पर आव्रजन संबंधी औपचारिकताएं पूरी करनी थीं। उन्होंने कहा कि परिवार को आशंका है कि आपदा आने के समय यह जत्था संभवत: आव्रजन केंद्र पर ही मौजूद रहा होगा और बाढ़ में वह केंद्र पूरी तरह बह गया होगा।
संजय ने कहा कि परिवार इस तबाही के बीच जत्थे के सदस्यों की स्थिति और उनके ठिकाने का पता लगाने की कोशिश कर रहा है।
मुंबई के एक अन्य परिवार के लिए भी खबर का इंतजार बेहद पीड़ादायक साबित हो रहा है। गोरेगांव निवासी राहुल देसाई ने ‘पीटीआई-भाषा’ को बताया कि उनके 67 वर्षीय ससुर अवनीश मर्चेंट और उनके चार दोस्त भी लापता लोगों में शामिल हैं।
देसाई ने एक केंद्रीकृत सूचना व्यवस्था की जरूरत पर जोर देते हुए कहा कि परिवार किसी भी जानकारी के लिए सभी आधिकारिक माध्यमों पर नजर बनाए हुए है।
भाषा आशीष माधव
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