मोदी के ‘भटकती आत्मा तंज’ पर पवार ने कहा : मेरी आत्मा आम आदमी और किसानों के लिए बेचैन

मोदी के ‘भटकती आत्मा तंज’ पर पवार ने कहा : मेरी आत्मा आम आदमी और किसानों के लिए बेचैन

मोदी के ‘भटकती आत्मा तंज’ पर पवार ने कहा : मेरी आत्मा आम आदमी और किसानों के लिए बेचैन
Modified Date: April 30, 2024 / 08:27 pm IST
Published Date: April 30, 2024 8:27 pm IST

पुणे, 30 अप्रैल (भाषा) राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (एसपी) के प्रमुख शरद पवार ने मंगलवार को प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के ‘भटकती आत्मा’ वाले तंज पर पलटवार करते हुए कहा कि उनकी आत्मा किसानों और आम आदमी के कारण ‘अस्वस्थ’ है और इन लोगों की पीड़ा को उजागर करने के लिए वह ‘100 बार’ बेचैन होने के लिए तैयार है।

प्रधानमंत्री मोदी ने नाम लिये बगैर सोमवार को एक रैली में शरद पवार पर निशाना साधते हुए कहा था, ‘‘महाराष्ट्र में एक भटकती आत्मा है। यदि इसे सफलता नहीं मिलती तो यह दूसरों के अच्छे काम को खराब कर देती है। महाराष्ट्र इसका शिकार रहा है।’’

एक चुनावी सभा को मंगलवार को संबोधित करते हुए पवार ने प्रधानमंत्री मोदी के 2016 के उस बयान को याद किया जो उनकी (पवार की) उंगली पकड़कर राजनीति में आने के बारे में था।

पवार ने कहा, ‘‘कुछ साल पहले प्रधानमंत्री मोदी ने पुणे में एक भाषण दिया था जिसमें कहा गया था कि वह (मोदी) पवार साहब की उंगली पकड़कर राजनीति में आए थे। कल उन्होंने कहा कि महाराष्ट्र में एक ‘भटकती आत्मा’ 45 साल से बेचैनी पैदा कर रही है।’’

शिरूर लोकसभा सीट से राकांपा (एसपी) उम्मीदवार अमोल कोल्हे के पक्ष में जुन्नार तहसील में एक चुनावी सभा को संबोधित करते हुए पवार ने कहा, ‘‘मोदी ने यह भी कहा था कि यह आत्मा सरकार के लिए बाधाएं पैदा कर रही है। उन्होंने इस आत्मा से बचाव की जरूरत के बारे में भी कहा था।’’

पवार ने आगे कहा कि उन्होंने मोदी का भाषण और ‘भटकती आत्मा’ वाला बयान पढ़ा है।

पवार ने कहा, ‘‘यह सही है कि आत्मा ‘अस्वस्थ’ है, लेकिन अपने लिए नहीं बल्कि किसानों की कठिनाइयों को उजागर करने के लिए। मैं महंगाई से पीड़ित आम आदमी की दुर्दशा को सामने रखने के लिए बेचैन हूं। मैं लोगों की परेशानियों को उजागर करने के लिए 100 बार बेचैन होने के लिए तैयार हूं।’’

पवार ने कांग्रेस नेता राहुल गांधी को शहजादा कहने के लिए भी मोदी की आलोचना की। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी के परिवार की तीन पीढ़ियों ने देश की सेवा की और जीवन का बलिदान दिया।

भाषा संतोष अविनाश

अविनाश


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