Nashik TCS Case: ‘सब कुछ पहले से..’, नासिक TCS केस में नया मोड़! आरोपी के चाचा ने कर दिया बड़ा खुलासा, बताया कौन है असली जिम्मेदार
Nashik TCS Case: आरोपी रजा मेमन के चाचा रजाक काजी ने इन आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए इसे एक साजिश बताया है।
nashik tcs case/ image source: ani x handle
- TCS नासिक में बड़ा मामला
- 7 आरोपी अब तक गिरफ्तार
- महिला शोषण के गंभीर आरोप
Nashik TCS Case: नासिक: महाराष्ट्र के Nashik स्थित Tata Consultancy Services (TCS) के ऑफिस में गंभीर आरोपों का मामला सामने आया है, जहां BPO विभाग के छह टीम लीडरों को पुलिस ने हिरासत में लिया है। आरोप है कि ये आरोपी जूनियर महिला कर्मचारियों और लड़कियों का यौन शोषण कर रहे थे। इस घटना के सामने आने के बाद आईटी सेक्टर में भी हड़कंप मच गया है। पुलिस ने मामले को गंभीरता से लेते हुए जांच शुरू कर दी है और अब तक कुल सात लोगों की गिरफ्तारी की पुष्टि की गई है। फिलहाल इस पूरे मामले की जांच के लिए विशेष जांच दल (SIT) का गठन किया गया है।
#WATCH | Maharashtra | Nashik TCS alleged religious conversion and sexual harassment | Accused Raza Memon’s uncle Razak Kazi says, “All the families are troubled. Everything is happening as per a conspiracy… The Bajrang Dal are involved in this… The girl’s family called… pic.twitter.com/RcyI4ZPwHS
— ANI (@ANI) April 16, 2026
IT company harassment news: आरोपी रजा मेमन के चाचा का बयान आया सामने
इस मामले में एक अन्य संवेदनशील आरोप भी सामने आया है, जिसमें एक हिंदू युवक को जबरन नमाज पढ़ने, बीफ खिलाने और धर्म परिवर्तन के लिए मजबूर करने की बात कही गई है। इस आरोप के सामने आने के बाद मामला और अधिक गंभीर हो गया है। वहीं आरोपी रजा मेमन के चाचा रजाक काजी ने इन आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए इसे एक साजिश बताया है। उनका कहना है कि “पूरा परिवार परेशान है और जो कुछ हुआ, वह पहले से तय था।” उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि इस पूरे मामले में बजरंग दल की भूमिका रही है और लड़की के परिवार ने संगठन को बुलाया था।
Nashik BPO case update: पुलिस कर रही मामले की जांच
पुलिस का कहना है कि फिलहाल सभी आरोपों की निष्पक्ष जांच की जा रही है और किसी भी निष्कर्ष पर पहुंचने से पहले सभी पहलुओं को ध्यान में रखा जाएगा। SIT टीम सबूतों और गवाहों के आधार पर पूरे मामले की तह तक जाने की कोशिश कर रही है।
बता दें कि, नासिक टीसीएस केस में हर दिन नया मोड़ आ रहा है। बीते दिन यहां के एक कर्मचारी ने बड़ा खुलासा किया है। पीड़ित कर्मचारी ने आरोप लगाया है कि उसे बीते चार वर्षों से मानसिक, धार्मिक और व्यक्तिगत स्तर पर लगातार प्रताड़ित किया जा रहा था। इंडिया टुडे को दिए अपने बयान में पीड़ित ने बताया कि उसके टीम लीडर तौसीफ अत्तारी और सहयोगी दानिश शेख समेत अन्य लोगों ने उसे जबरन नमाज पढ़ने, कलमा बोलने और मजहबी टोपी पहनने के लिए मजबूर किया। आरोप है कि उसकी धार्मिक आस्था को निशाना बनाकर उसे मानसिक रूप से तोड़ने की कोशिश की गई।
TCS employee harassment case: धर्मिक भावनाओं को पहुंचाया ठेस
पीड़ित के अनुसार, यह प्रताड़ना साल 2022 में कंपनी जॉइन करने के साथ ही शुरू हो गई थी। वह एक साधारण हिंदू परिवार से आता है और Samarth Ramdas का भक्त है, साथ ही रुद्राक्ष की माला पहनता है। इसी पहचान के कारण उसे निशाना बनाया गया। आरोपी अक्सर काम के दौरान उसे घेरकर हिंदू देवी-देवताओं का मजाक उड़ाते, उनकी आस्थाओं पर सवाल उठाते और कहते कि “भगवान जैसा कुछ नहीं होता, सिर्फ अल्लाह ही सच है।” इतना ही नहीं, वे महाराष्ट्र के महापुरुषों के लिए भी अपमानजनक शब्दों का इस्तेमाल करते थे। धीरे-धीरे यह मजहबी बहस मानसिक उत्पीड़न में बदल गई, जिसका मकसद केवल उसे नीचा दिखाना और तोड़ना था।
workplace religious harassment India: पीड़ित की निजी जिंदगी को भी निशाना बनाया
घटना का सबसे संवेदनशील पहलू तब सामने आया जब आरोपियों ने पीड़ित की निजी जिंदगी को भी निशाना बनाया। पीड़ित और उसकी पत्नी को संतान नहीं होने की बात का मजाक उड़ाते हुए टीम लीडर ने कथित तौर पर कहा, “इतना इलाज कराने के बाद भी तुम्हारी पत्नी मां नहीं बन पाई, अगर बच्चा चाहिए तो अपनी पत्नी को मेरे पास भेज दो।” इस अमानवीय टिप्पणी के बाद पीड़ित का सब्र टूट गया और कंपनी परिसर में ही हंगामा हो गया। आरोप है कि इस दौरान तौसीफ ने गुस्से में टेबल फैन उठाकर पीड़ित पर फेंक दिया और उसे जान से मारने की धमकी भी दी। इसके अलावा, ईद के दिन उसे जबरन टोपी पहनाकर नमाज पढ़वाई गई और उसकी तस्वीर कंपनी के ग्रुप में डालकर उसे सार्वजनिक रूप से अपमानित किया गया।
TCS Nashik: जबरन नॉन-वेज खाने के लिए मजबूर किया जाता था
पीड़ित ने यह भी आरोप लगाया कि उसे जबरन नॉन-वेज खाने के लिए मजबूर किया जाता था, जबकि वह कट्टर शाकाहारी है। उसके पिता को पैरालिसिस अटैक आने पर भी आरोपियों ने संवेदनहीनता दिखाते हुए धर्म परिवर्तन करने का दबाव बनाया और कहा कि इससे उसके पिता ठीक हो जाएंगे। जब पीड़ित ने विरोध किया, तो उसके खिलाफ हेड ऑफिस में झूठी रिपोर्ट भेजकर नौकरी से निकलवाने की कोशिश की गई। साल 2022 से 23 मार्च 2026 तक चले इस उत्पीड़न से परेशान होकर आखिरकार पीड़ित ने कानूनी कार्रवाई का रास्ता चुना है।
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