वांगचुक, कॉजपा के खिलाफ कार्रवाई के विरोध में मुंबई विश्वविद्यालय के बाहर राकांपा (शप) का प्रदर्शन

वांगचुक, कॉजपा के खिलाफ कार्रवाई के विरोध में मुंबई विश्वविद्यालय के बाहर राकांपा (शप) का प्रदर्शन

वांगचुक, कॉजपा के खिलाफ कार्रवाई के विरोध में मुंबई विश्वविद्यालय के बाहर राकांपा (शप) का प्रदर्शन
Modified Date: July 20, 2026 / 08:02 pm IST
Published Date: July 20, 2026 8:02 pm IST

(तस्वीरों के साथ)

मुंबई, 20 जुलाई (भाषा) राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी-शरदचंद्र पवार (राकांपा-शप) ने संसद की ओर कॉकरोच जनता पार्टी (कॉजपा) के मार्च में शामिल लोगों के खिलाफ पुलिस की कथित कार्रवाई और अनशन पर बैठे जलवायु कार्यकर्ता सोनम वांगचुक को जंतर-मंतर से हटाए जाने के विरोध में सोमवार को मुंबई विश्वविद्यालय परिसर के बाहर प्रदर्शन किया।

राकांपा (शप) कार्यकर्ताओं ने शिक्षा क्षेत्र में कथित अनियमितताओं और प्रश्नपत्र लीक की घटनाओं को लेकर केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग भी की।

राकांपा (शप) की मुंबई इकाई के अध्यक्ष एवं पूर्व विधायक मिलिंद अन्ना कांबले, पार्टी की युवा इकाई के अध्यक्ष अमोल माटेले और वैभव गोधावे के नेतृत्व में आयोजित विरोध-प्रदर्शन में बड़ी संख्या में शामिल कार्यकर्ताओं और छात्रों ने केंद्र सरकार के खिलाफ नारेबाजी की।

कांबले ने कहा कि शांतिपूर्ण ढंग से विरोध-प्रदर्शन कर रहे लोगों के खिलाफ पुलिस की कार्रवाई लोकतंत्र पर हमला है। उन्होंने केंद्र सरकार पर असहमति की आवाज को दबाने का आरोप लगाते हुए कहा कि प्रधान को शिक्षा मंत्री के पद से इस्तीफा देना चाहिए।

कांबले ने कहा, “अगर सरकार कार्रवाई करने में नाकाम रहती है, तो देश का युवा लोकतांत्रिक तरीके से जवाब देगा और सरकार को जवाबदेह ठहराएगा।”

राकांपा (शप) ने वांगचुक को जंतर-मंतर से “जबरन” हटाए जाने की भी आलोचना की। वांगचुक शिक्षा क्षेत्र में जवाबदेही की कथित कमी और प्रश्नपत्र लीक की घटनाओं के विरोध में जंतर-मंतर पर कॉजपा के प्रदर्शन के समर्थन में 28 जून से अनशन पर हैं। दिल्ली पुलिस उन्हें शनिवार को प्रदर्शन स्थल से हटाकर सफदरजंग अस्पताल ले गई।

माटेले और गोधावे ने चेतावनी दी कि अगर सरकार “लोकतांत्रिक ढंग से किए जा रहे विरोध-प्रदर्शनों का दमन” नहीं रोकती है, तो आंदोलन और तेज किया जाएगा।

राकांपा (शप) के प्रदेश अध्यक्ष शशिकांत शिंदे नवी मुंबई में आयोजित विरोध-प्रदर्शन में शामिल हुए। उन्होंने कहा कि नीट प्रश्नपत्र “लीक” से लाखों छात्रों का भविष्य प्रभावित हुआ और वे निराशा के गहरे गर्त में धकेल दिए गए।

शिंदे ने आरोप लगाया कि इसके कारण 21 मेडिकल अभ्यर्थियों ने अपनी जान दे दी। उन्होंने कहा कि घटना की नैतिक जिम्मेदारी लेने के बजाय राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (राजग) सरकार और प्रशासन ने वांगचुक के साथ ऐसा व्यवहार किया, जिस पर एक तानाशाह भी शर्मिंदा हो जाए।

शिंदे ने कहा, “राकांपा (शप) ने राजग सरकार के बेरहम, गैर-जिम्मेदार और असंवेदनशील रवैये के खिलाफ प्रदर्शन शुरू किया है।”

उन्होंने आरोप लगाया, “यह सरकार छात्रों के भविष्य के साथ खिलवाड़ करती है, न्याय के लिए उनकी लड़ाई को दबाती है और जानबूझकर उनकी मांगों को नजरअंदाज करती है।”

पार्टी ने ठाणे में विधायक जितेंद्र आव्हाड और जिला इकाई के अध्यक्ष मनोज प्रधान के नेतृत्व में जिलाधिकारी कार्यालय के बाहर विरोध-प्रदर्शन किया।

प्रदर्शनकारियों ने जिलाधिकारी को केंद्र सरकार के नाम एक ज्ञापन सौंपा, जिसमें लेह-लद्दाख में पर्यावरण की सुरक्षा, शिक्षा मंत्री के पद से प्रधान के इस्तीफे और परीक्षा को लेकर अनिश्चितता के कारण कथित तौर पर आत्महत्या करने वाले 21 अभ्यर्थियों के परिजन को मुआवजा देने जैसी मुख्य मांगें शामिल थीं।

आव्हाड ने प्रदर्शनकारियों को संबोधित करते हुए 1973 में बिहार और गुजरात में छात्रों के नेतृत्व में हुए ऐतिहासिक आंदोलनों का जिक्र किया तथा सरकार को छात्रों की आवाज दबाने के खिलाफ चेताया।

आव्हाड ने कहा, “इसे तियानमेन चौक जैसी स्थिति में न बदलने दें। एक बार जब छात्रों के बीच विरोध की आग फैल जाती है, तो कोई उसे रोक नहीं सकता। इस आंदोलन को किसी राजनीतिक दल का समर्थन नहीं है; छात्र देश को बचाने के लिए खुद-ब-खुद सड़कों पर उतर रहे हैं।”

भाषा पारुल दिलीप

दिलीप


लेखक के बारे में