सामाजिक कार्यकर्ता, गांधीवादी विचारक कुमार सप्तर्षि का पुणे में अंतिम संस्कार किया गया
सामाजिक कार्यकर्ता, गांधीवादी विचारक कुमार सप्तर्षि का पुणे में अंतिम संस्कार किया गया
पुणे, 20 जुलाई (भाषा) जाने-माने समाजवादी-गांधीवादी कार्यकर्ता, लेखक और युवा आंदोलन ‘युवक क्रांति दल’ (युक्रांद) के संस्थापक डॉ. कुमार सप्तर्षि का सोमवार को यहां अंतिम संस्कार किया गया।
सप्तर्षि (84) का लंबी बीमारी के बाद शनिवार को शहर के एक निजी अस्पताल में निधन हो गया था।
उनके पार्थिव शरीर को सोमवार सुबह 9.30 बजे से दोपहर 12.15 बजे तक लोगों के अंतिम दर्शन के लिए कोथरूड स्थित गांधी भवन में रखा गया था।
बड़ी संख्या में आम लोगों, सामाजिक कार्यकर्ताओं, नेताओं और विभिन्न क्षेत्रों के लोगों ने मशहूर गांधीवादी नेता को श्रद्धांजलि दी।
उनके पार्थिव शरीर को फूलों से सजे रथ पर वैकुंठ श्मशान घाट ले जाया गया और वहां उनका अंतिम संस्कार किया गया।
सप्तर्षि ने 1967 में अपने द्वारा स्थापित युक्रांद संगठन के माध्यम से सामाजिक बदलाव, लोकतांत्रिक मूल्यों और प्रगतिशील विचारों के लिए काम किया।
वह आपातकाल के दौरान तीन महीने तक भूमिगत रहकर काम करते रहे और बाद में 2 अक्टूबर 1975 से 26 जनवरी 1977 तक ‘मीसा’ कानून के तहत हिरासत में रहे।
सप्तर्षि 1977 में जनता पार्टी में शामिल होने के बाद चुनावी राजनीति में आए और 1978 में महाराष्ट्र के अहमदनगर शहर से विधायक चुने गए।
सप्तर्षि ने कई पुस्तकें लिखीं, जिनमें ‘‘संकल्प’’, ‘‘यात्री’’ और ‘‘डेज ऐट यरवदा यूनिवर्सिटी’’ शामिल हैं। 1992 से उन्होंने मराठी मासिक ‘‘सत्याग्रही विचारधारा’’ का संपादन और प्रकाशन किया।
गांधी भवन के ट्रस्टी तुषार गांधी ने कहा कि सप्तर्षि ने कई लोगों के जीवन पर प्रभाव डाला और वह अपने आखिरी दिनों तक सामाजिक कार्यों के प्रति समर्पित रहे।
कांग्रेस की महाराष्ट्र इकाई के अध्यक्ष हर्षवर्धन सपकाल ने सप्तर्षि योगदान की तारीफ करते हुए कहा कि उन्होंने जीवन भर गांधीवादी सिद्धांतों को बनाए रखने और समाज में प्रगतिशील मूल्यों का प्रसार करने के लिए काम किया।
भाषा वैभव सुभाष
सुभाष

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