पालघर में नाबालिग के अपहरण और यौन उत्पीड़न के दोषी नेपाली नागरिक को 10 साल की सजा

पालघर में नाबालिग के अपहरण और यौन उत्पीड़न के दोषी नेपाली नागरिक को 10 साल की सजा

पालघर में नाबालिग के अपहरण और यौन उत्पीड़न के दोषी नेपाली नागरिक को 10 साल की सजा
Modified Date: July 29, 2026 / 03:33 pm IST
Published Date: July 29, 2026 3:33 pm IST

पालघर, 29 जुलाई (भाषा) महाराष्ट्र के पालघर जिले की एक अदालत ने नेपाल के 34 वर्षीय एक व्यक्ति को नाबालिग लड़की का अपहरण कर नेपाल ले जाने और वहां उसका यौन उत्पीड़न करने का दोषी ठहराते हुए उसे 10 साल के कठोर कारावास की सजा सुनाई है।

अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश एआर रहाणे ने नरेंद्रबहादुर गोरखबहादुर पांडे को भारतीय दंड संहिता (आईपीसी) की धारा 363 (अपहरण) और यौन अपराधों से बाल संरक्षण (पॉक्सो) अधिनियम के तहत दोषी पाया।

अदालत ने बचाव पक्ष के वकील की इस दलील को खारिज कर दिया कि आरोपी और पीड़िता के बीच सहमति से प्रेम संबंध था। अदालत ने कहा कि चूंकि लड़की नाबालिग थी, इसलिए उसकी सहमति की कोई कानूनी वैधता नहीं है।

अदालत ने पांडे को 10 साल के कठोर कारावास की सजा सुनाई और 5,000 रुपये का जुर्माना लगाया।

विशेष लोक अभियोजक संजय मोरे ने कहा कि आरोपी के खिलाफ आरोप साबित करने के लिए पीड़िता सहित अभियोजन पक्ष के सात गवाहों से जिरह की गई।

अभियोजन पक्ष ने बताया कि पालघर जिले के बोइसर की रहने वाली पीड़िता, जो उस समय 13 साल की थी, आरोपी से परिचित थी क्योंकि वे पहले मुंबई के बोरीवली इलाके में पड़ोस में ही रहते थे।

बीस जून, 2018 को पांडे ने पीड़िता को बोइसर रेलवे स्टेशन पर बुलाया और उसे नेपाल में अपने पैतृक गांव ले गया, जहां उसने उसे एक महीने तक रखा। यह जानते हुए भी कि वह नाबालिग है, उसने वहां बार-बार उसका यौन उत्पीड़न किया।

भाषा शफीक नरेश

नरेश


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