शिवसेना (उबाठा) सांसदों के शिंदे गुट में विलय पर राउत ने कहा, यह लोकतंत्र का ‘बलात्कार और हत्या’
शिवसेना (उबाठा) सांसदों के शिंदे गुट में विलय पर राउत ने कहा, यह लोकतंत्र का ‘बलात्कार और हत्या’
(फाइल फोटो सहित)
मुंबई, 19 जुलाई (भाषा) शिवसेना (उबाठा) के छह सांसदों के एकनाथ शिंदे नीत शिवसेना में विलय को लोकसभा अध्यक्ष की मंजूरी मिलने के बाद, उद्धव ठाकरे के नेतृत्व वाले गुट के नेता संजय राउत ने रविवार को कहा कि यह कदम लोकतंत्र का ‘‘बलात्कार और हत्या’’ करने जैसा है।
शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे) नेता राउत ने बिना किसी का नाम लिए कहा, ‘‘शिवसेना (उबाठा) के ‘जलती हुई मशाल’ चुनाव चिह्न पर चुने गए सांसदों को खरीद लिया गया। यह लोकतंत्र का बलात्कार और हत्या है और यह एक गंभीर अपराध है। ये लोग सीरियल किलर और बलात्कारी हैं।’’
राउत ने सवाल किया कि जब संविधान की दसवीं अनुसूची के तहत किसी गुट के अलग होने या विलय की इजाजत नहीं है, तो लोकसभा अध्यक्ष ने इसकी अनुमति कैसे दी।
पत्रकारों से बातचीत में राउत ने शनिवार को कार्यकर्ता सोनम वांगचुक को अस्पताल ले जाने के लिए भी केंद्र सरकार की आलोचना की।
वांगचुक को भूख हड़ताल के 21वें दिन दिल्ली पुलिस जबरन सफदरजंग अस्पताल ले गई। वह मेडिकल की प्रवेश परीक्षा नीट में कथित अनियमितताओं और इस विवाद से जुड़े छात्रों की कथित मौतों के विरोध में कॉकरोच जनता पार्टी (कॉजपा) के नेतृत्व वाले प्रदर्शन के समर्थन में 28 जून से अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल कर रहे हैं।
राउत ने कहा कि लोकतंत्र में हर तरह के विरोध प्रदर्शन की अनुमति होती है।
उन्होंने कहा, ‘‘महात्मा गांधी ने अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल का रास्ता अपनाया था और अंग्रेजों को बातचीत शुरू करने के लिए मजबूर किया था। लेकिन वांगचुक अनशन करते हैं तो सरकार कोई बातचीत नहीं करती, बल्कि उन्हें प्रदर्शन स्थल से जबरन उठा ले जाती है। उन्हें अस्पताल ले जाने के लिए स्ट्रेचर तक उपलब्ध नहीं कराया गया। उन पर अनशन खत्म करने का दबाव बनाया गया, जिसकी निंदा की जानी चाहिए।’’
भाषा आशीष रंजन
रंजन

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