मराठी सीखने के लिए एक साल की छूट से आजीविका का खतरा टला: ऑटो और टैक्सी यूनियन
मराठी सीखने के लिए एक साल की छूट से आजीविका का खतरा टला: ऑटो और टैक्सी यूनियन
मुंबई, 28 अगस्त (भाषा) ऑटो-रिक्शा और टैक्सी यूनियनों ने मराठी का कामकाज लायक ज्ञान हासिल करने के लिए एक साल का समय देने के फैसला का स्वागत करते हुए शुक्रवार को कहा कि इस विस्तार से उनकी आजीविका पर मंडरा रहा तात्कालिक खतरा टल गया है।
मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने बृहस्पतिवार को ‘सह्याद्री’ अतिथि गृह में एक प्रतिनिधिमंडल से मुलाकात के बाद समय सीमा बढ़ाने की घोषणा की। इससे गैर-मराठी चालकों के खिलाफ तत्काल होने वाली कार्रवाई रुक गई है और उन्हें भाषा सीखने के लिए अधिक समय मिल गया है।
गौरतलब है कि यह घोषणा उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे द्वारा मुंबई में भाषा पाठ्यक्रम पूरा करने वाले लगभग 20,000 ऑटो-रिक्शा और टैक्सी चालकों को प्रमाण पत्र सौंपे जाने के एक दिन बाद की गई है।
भाजपा के नेतृत्व वाली राज्य सरकार ने अप्रैल में घोषणा की थी कि गैर-मराठी चालकों के लिए कामकाज लायक मराठी सीखना अनिवार्य होगा और उनके लिए मराठी कक्षाओं का आयोजन करते हुए 15 अगस्त की समय सीमा तय की थी।
‘मुंबई टैक्सीमेन एसोसिएशन’ के नेता प्रेम सिंह ने कहा कि एक साल का विस्तार टैक्सी चालकों को मराठी का कमकाज लायक ज्ञान हासिल करने के लिए पर्याप्त समय देगा।
उन्होंने कहा कि कई टैक्सी चालकों की उम्र 60 वर्ष से अधिक है और उन्हें कम समय में भाषा सीखने में कठिनाई हो रही थी, हालांकि उनमें से कई पहले से ही मराठी अच्छी तरह समझते हैं।
सिंह ने कहा, ‘‘अब जब वे जानते हैं कि यह अनिवार्य है, तो वे एक वर्ष के भीतर आवश्यक कौशल हासिल कर लेंगे। एक यूनियन के रूप में, हम चालकों को भाषा सीखने में मदद करने के लिए व्यवस्था भी करेंगे।’’
बढ़ी समयसीमा का स्वागत करते हुए ‘सेवा सारथी टैक्सी रिक्शा ट्रांसपोर्ट यूनियन’ के नेता डी.एम. गोसावी ने कहा कि चालक खुश हैं कि फिलहाल उनकी आजीविका नहीं छिनेगी।
उन्होंने कहा, ‘‘हमारे सदस्य इस फैसले से काफी खुश और संतुष्ट हैं। हमने मराठी सिखाने के लिए पहले ही कक्षाएं शुरू कर दी हैं और अतिरिक्त समय से अधिक चालकों को भाषा सीखने में मदद मिलेगी।’’
परिवहन विभाग के एक सेवानिवृत्त अधिकारी ने कहा कि ऐसा लगता है कि यह मुद्दा जमीनी वास्तविकताओं पर पर्याप्त विचार किए बिना मुख्य रूप से राजनीतिक कारणों से उठाया गया था।
उन्होंने कहा, ‘‘सबसे बड़ा मुद्दा यह है कि इस महीने की शुरुआत में नियमों में संशोधन करते समय महाराष्ट्र सरकार ने यह स्पष्ट नहीं किया कि मराठी के कार्यसाधक ज्ञान का क्या अर्थ है। इससे चालकों के आर्थिक शोषण की गुंजाइश बनी रहती है।’’
आरटीओ के एक वरिष्ठ अधिकारी ने नाम न उजागर करने की शर्त पर कहा कि हाल के दिनों में शुरू किए गए एक महीने के अभियान में उड़न दस्ते पूरी तरह से लगे हुए थे तथा समयसीमा के बाद उनका कार्यभार और बढ़ गया, क्योंकि सैकड़ों चालकों को नोटिस पहले ही जारी किए जा चुके थे।
उन्होंने कहा, ‘‘मराठी अनिवार्य करने के फैसले को एक साल के लिए स्थगित करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा है कि किसी भी रिक्शा-टैक्सी चालक के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं की जाएगी। अन्यथा, हमारे अधिकारी अगले चार-पांच महीने केवल इन्हीं मामलों को निपटाने में बिता देते।’’
भाषा खारी शफीक
शफीक

Facebook


