पुणे, सात जनवरी (भाषा) ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी प्रेस (ओयूपी), इंडिया ने छत्रपति शिवाजी महाराज पर 2003 में प्रकाशित एक किताब में कुछ ‘‘अपुष्ट कथन’’ के लिए माफी मांगी है।
शिवाजी के वंशज उदयनराजे भोसले द्वारा महाराष्ट्र के सातारा जिले की एक अदालत में शिकायत दर्ज कराने के 20 साल से अधिक समय बाद खेद जताया गया है।
एक अंग्रेजी समाचार पत्र में मंगलवार को प्रकाशित सार्वजनिक नोटिस में ओयूपी इंडिया ने स्वीकार किया कि अमेरिकी लेखक जेम्स लेन द्वारा लिखित पुस्तक ‘‘शिवाजी: हिंदू किंग इन इस्लामिक इंडिया’’ के पृष्ठ 31, 33, 34 और 93 पर प्रकाशित कुछ कथन अप्रमाणित थे।
प्रकाशक ने इसके लिए खेद व्यक्त किया और भोसले तथा आम जनता से ‘‘किसी भी प्रकार की पीड़ा और दुख’’ के लिए माफी मांगी।
यह सार्वजनिक सूचना ओयूपी के पूर्व प्रबंध निदेशक सईद मंजर खान द्वारा बंबई उच्च न्यायालय की कोल्हापुर पीठ को दिए गए लिखित आश्वासन के बाद जारी की गई। खान ने सातारा से भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के सांसद उदयनराजे भोसले से माफी मांगने और प्रमुख अंग्रेजी तथा मराठी समाचार पत्रों में माफीनामा प्रकाशित करने की इच्छा व्यक्त की थी।
इस किताब पर जनवरी 2004 में बड़ा विवाद शुरू हो गया था। संभाजी ब्रिगेड के 150 से अधिक कार्यकर्ताओं ने पुणे के प्रसिद्ध भंडारकर ओरिएंटल रिसर्च इंस्टीट्यूट (बीओआरआई) में तोड़फोड़ की थी। समूह ने आरोप लगाया था कि संस्थान ने लेखक की सहायता की थी, जिस पर पुस्तक में शिवाजी महाराज के बारे में आपत्तिजनक टिप्पणी करने का आरोप था।
किताब के कुछ कथन पर आपत्ति जताते हुए, उदयनराजे भोसले ने 2005 में सातारा अदालत में खान, तिलक महाराष्ट्र विद्यापीठ के प्रोफेसर डॉ. श्रीकांत बाहुलिकर और सुचेता परांजपे तथा बीओआरआई के लाइब्रेरियन वीएल मंजुल के खिलाफ एक निजी शिकायत दर्ज कराई।
भोसले ने एक बयान में बताया कि 17 दिसंबर, 2025 को खान और अन्य ने उच्च न्यायालय की कोल्हापुर पीठ के समक्ष एक अर्जी दायर कर सार्वजनिक नोटिस के माध्यम से माफी मांगने की इच्छा व्यक्त की।
भाषा आशीष सुरेश
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