पालघर अस्पताल हमला : उच्च न्यायालय ने ‘लचर’ जांच को लेकर पुलिस को फटकार लगाई

पालघर अस्पताल हमला : उच्च न्यायालय ने 'लचर' जांच को लेकर पुलिस को फटकार लगाई

पालघर अस्पताल हमला : उच्च न्यायालय ने ‘लचर’ जांच को लेकर पुलिस को फटकार लगाई
Modified Date: September 11, 2026 / 10:36 pm IST
Published Date: September 11, 2026 10:36 pm IST

मुंबई, 11 सितंबर (भाषा) मुंबई उच्च न्यायालय ने शिवसेना कार्यकर्ताओं के खिलाफ एक मामले की जांच में ‘‘लचर’’ रवैया बरतने को लेकर शुक्रवार को पालघर पुलिस को फिर से फटकार लगाई और इसे ‘‘हास्यास्यापद और गंभीर रूप से त्रुटिपूर्ण’’ करार दिया।

शिवसेना कार्यकर्ताओं ने एक निजी अस्पताल में तोड़-फोड़ की थी।

न्यायमूर्ति ए.एस. गडकरी और कमल खाटा की पीठ ने कोंकण प्रभाग के अतिरिक्त पुलिस महानिरीक्षक को निर्देश दिया कि वह जांच की समीक्षा करें और 17 सितंबर को अदालत में रिपोर्ट सौंपें, जिसमें यह बताया जाए कि क्या पालघर पुलिस द्वारा की गई कार्रवाई कानूनी रूप से सही थी।

उच्च न्यायालय ने कहा कि पालघर पुलिस की कार्रवाई ‘‘सिर्फ दिखावे की’’ लग रही और ऐसा लगता है कि यह इस तरह से की गई कि अंत में आरोपियों को ही फायदा हो।

पीठ ने अब तक हुई जांच के तरीके पर सवाल उठाए – पंचनामा (घटनास्थल के निरीक्षण की रिपोर्ट) तैयार करने से लेकर थाने की ‘केस डायरी’ में प्रविष्टि करने तक।

पांच और छह सितंबर की रात, पालघर के रिलीफ हॉस्पिटल में शिवसेना के कई कार्यकर्ता कथित तौर पर घुस गए, जहां 5 सितंबर को दही-हांडी समारोह में हिस्सा लेने वाले कुछ घायल ‘गोविंदा’ भर्ती थे।

अस्पताल पर अधिक शुल्क वसूलने का आरोप लगाते हुए, पार्टी कार्यकर्ताओं ने तोड़-फोड़ की, चिकित्सकों को धमकाया, अस्पताल कर्मियों के साथ मारपीट की और आईसीयू में भर्ती घायल लोगों को जबरदस्ती अपने साथ ले गए।

पीठ जुलाई में ठाणे के एक सरकारी अस्पताल में हुई मारपीट की घटना पर स्वतः संज्ञान लेते हुए एक याचिका पर सुनवाई कर रही थी – जिसमें शिवसेना पार्षद रमेश म्हात्रे आरोपी हैं। तभी वरिष्ठ वकील अशोक मुंडार्गी ने उन्हें इस हफ्ते की शुरुआत में हुई पालघर की घटना के बारे में जानकारी दी।

पालघर घटना के सिलसिले में पुलिस ने 22 लोगों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की है, जिनमें शिवसेना के जिला प्रमुख कुंदन संखे, शहर प्रमुख राहुल घरात, विधायक राजेंद्र गावित के बेटे और डिप्टी तालुका प्रमुख रोहित गावित शामिल हैं।

इस मामले में सिर्फ घरात को गिरफ्तार किया गया है, जबकि नौ अन्य लोग फरार हैं।

सरकारी वकील शिशिर हिरे ने शुक्रवार को अदालत को बताया कि प्राथमिकी में शुरू में अज्ञात बताए गए 12 लोगों को गिरफ्तार कर लिया गया है।

उन्होंने कहा कि फरार नौ आरोपियों में से तीन ने अग्रिम जमानत की अर्जी दी थी, जिसे खारिज कर दिया गया।

भाषा सुभाष दिलीप

दिलीप


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