कोल्हापुर लौट रही हथिनी माधुरी के लिए जैन मठ में फव्वारे और अलग रसोई की व्यवस्था की गई

कोल्हापुर लौट रही हथिनी माधुरी के लिए जैन मठ में फव्वारे और अलग रसोई की व्यवस्था की गई

कोल्हापुर लौट रही हथिनी माधुरी के लिए जैन मठ में फव्वारे और अलग रसोई की व्यवस्था की गई
Modified Date: September 11, 2026 / 09:14 pm IST
Published Date: September 11, 2026 9:14 pm IST

कोल्हापुर, 11 सितंबर (भाषा) महाराष्ट्र के कोल्हापुर में एक जैन मठ में माधुरी नामक हथिनी की देखभाल और रखरखाव के लिए पानी के फव्वारे और एक अलग रसोई समेत कई विशेष इंतजाम किए गए हैं। माधुरी को एक साल से अधिक समय बाद शुक्रवार को गुजरात के वंतारा पशु कल्याण केंद्र से वापस यहां लाया जा रहा है।

कोल्हापुर और उत्तर कर्नाटक के स्थानीय निवासी माधुरी को देवी के समान दर्जा देते हैं। मठ के एक पदाधिकारी ने बताया कि एक उच्चस्तरीय समिति द्वारा हाल ही में अनुमति दिए जाने के बाद माधुरी को वंतारा से यहां जैन धार्मिक संस्थान में वापस लाया जा रहा है।

कोल्हापुर में महादेवी के नाम से जानी जाने वाली माधुरी को उच्चस्तरीय समिति के निर्देशों के अनुसार 30 जुलाई 2025 को गुजरात के जामनगर स्थित वंतारा भेजा गया था। इन निर्देशों को मुंबई उच्च न्यायालय और उच्चतम न्यायालय ने भी बरकरार रखा था।

पशु कल्याण संगठनों ने मठ में दशकों तक रहने और मंदिर की धार्मिक रस्मों में हिस्सा लेने के कारण माधुरी को गंभीर गठिया, लंबे समय से पैरों में सड़न और मानसिक परेशानी होने को लेकर चिंता जताई थी, जिसके बाद उसे वहां भेजा गया था।

हालांकि, नौ सितंबर 2026 को समिति ने संबंधित पक्षों की दलीलें सुनने और रिपोर्ट मंगाने के बाद माधुरी को कोल्हापुर वापस लाने की अनुमति दे दी।

श्री जिनसेन भट्टारक पट्टाचार्य महास्वामी जैन मठ के ट्रस्टी सागर शंभुशेते ने कहा, “माधुरी के शुक्रवार रात कोल्हापुर के नंदानी गांव स्थित जैन मठ पहुंचने की उम्मीद है। वह लगभग एक साल तक इस क्षेत्र से दूर रहने के बाद वापस लाई जा रही है।”

वंतारा से माधुरी के साथ कोल्हापुर आ रहे शंभुशेते ने फोन पर ‘पीटीआई-भाषा’ से कहा, “हम नंदानी गांव के रास्ते में हैं और रात में 9.30 बजे तक वहां पहुंचने की उम्मीद है।”

उनके अनुसार, नंदानी मठ ने माधुरी के विश्राम, स्वास्थ्य और लंबे समय तक देखभाल को ध्यान में रखते हुए बड़े स्तर पर इंतजाम किए हैं।

उन्होंने बताया कि पर्याप्त ऊंचाई और हवा की व्यवस्था वाला एक विशेष आश्रय बनाया गया है।

उन्होंने कहा कि उसके पैरों को आराम देने के लिए रबर की चटाइयां बिछाई गई हैं, गर्मी और मक्खियों से बचाने के लिए बड़े पंखे और फॉगिंग सिस्टम लगाए गए हैं।

शंभुशेते ने कहा, “पानी के फव्वारे भी लगाए गए हैं। आश्रय के पास एक पानी का तालाब बनाया गया है, ताकि वह जब चाहे पानी पी सके।”

उन्होंने बताया कि माधुरी के आहार के अनुसार पका अनाज, दाल, फल और अन्य खाद्य पदार्थ तैयार करने के लिए एक अलग रसोई भी बनाई गई है।

मठ ने माधुरी की प्राथमिक स्वास्थ्य जरूरतों के लिए भी एक अलग केंद्र बनाया है। उसके ‘महावत’ यानी प्रशिक्षक और देखभाल करने वाले व्यक्ति के लिए स्थायी रूप से वहां रहने की व्यवस्था की गई है। शंभुशेते ने बताया कि ‘हाइड्रोथेरेपी’ के लिए एक ‘स्विमिंग टैंक’ भी बनाया गया है।

उन्होंने कहा कि ये सभी सुविधाएं वंतारा की ओर से दिए गए मानकों और सलाह के अनुसार उपलब्ध कराई गई हैं।

शंभुशेते ने कहा कि माधुरी की वापसी से कोल्हापुर और महाराष्ट्र तथा उत्तर कर्नाटक के आसपास के इलाकों के लोगों में काफी भावनाएं देखने को मिल रही हैं।

उन्होंने कहा, “महाराष्ट्र और उत्तर कर्नाटक के लोगों के लिए, खासकर कोल्हापुर में, माधुरी सिर्फ एक हथिनी या जानवर नहीं है। वह परिवार की सदस्य है।”

उनके अनुसार, क्षेत्र में लगभग साढ़े तीन साल रहने के दौरान माधुरी का लोगों के साथ गहरा भावनात्मक जुड़ाव हो गया था।

उन्होंने कहा, “सभी समुदायों के लोग माधुरी से प्यार करते थे। उसे लगभग देवी का दर्जा दिया गया था और लोग नया घर बनाते समय उसके पैरों के नीचे की मिट्टी तक ले जाते थे।”

भाषा जोहेब पवनेश

पवनेश


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