मुंबई, सात अगस्त (भाषा) बंबई उच्च न्यायालय ने शुक्रवार को कहा कि महाराष्ट्र खाद्य एवं औषधि प्रशासन (एफडीए) ‘‘मच्छर को तलवार से मारने’’ की कोशिश कर रहा है। अदालत ने अमेजन रिटेल इंडिया के एक गोदाम के खिलाफ एजेंसी की सख्त कार्रवाई पर उसे फटकार लगाई।
कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश रवींद्र घुगे और न्यायमूर्ति गौतम अंखाड की पीठ ने नियमों के उल्लंघन के खिलाफ एफडीए की कार्रवाई की तारीफ तो की, लेकिन पूछा कि क्या सभी वाणिज्यिक प्रतिष्ठानों को बंद कराना ही इस स्थिति से निपटने का एक तरीका है।
अदालत ने एजेंसी को व्यवस्थित तरीके से काम करने की सलाह दी। मई में भारतीय प्रशासनिक सेवा (आईएएस) के अधिकारी तुकाराम मुंढे के महाराष्ट्र एफडीए का आयुक्त बनने के बाद से ही यह एजेंसी कई मशहूर भोजनालयों सहित खाने-पीने की जगहों पर लगातार छापेमारी को लेकर चर्चा में है।
पीठ ने कहा, ‘‘हमें आपको यह बताना होगा कि अपनी नीतियों को जोर-शोर से लागू करने के चक्कर में आप मच्छर को तलवार से मारने की कोशिश करते हैं।’’
एफडीए ने अमेजन रिटेल इंडिया के भिवंडी स्थित गोदाम के खिलाफ कार्रवाई की थी, क्योंकि आरोप था कि उसने उपयोग की समयसीमा को पार कर चुके भोज्य पदार्थों को नष्ट करने के बजाय खुदरा बाजार में खपा दिया था। इसके बाद अमेजन रिटेल इंडिया ने उच्च न्यायालय का दरवाजा खटखटाया।
अदालत इस मामले में अगली सुनवाई 10 तारीख को करेगी।
अमेजन के वकील वेंकटेश धोंड ने कहा कि एफडीए के अधिकारियों ने 24 जून को गोदाम का दौरा किया था और अगले ही दिन बिना कोई ‘सुधार नोटिस’ जारी किए उसका लाइसेंस निलंबित कर दिया था।
पीठ ने कहा, ‘‘जब अपील लंबित है तो लाइसेंस रद्द करने का आदेश कैसे जारी किया जा सकता है? यह स्थापित कानून है कि अपील की अवधि के दौरान इस तरह की कार्रवाई नहीं की जा सकती।’’
उच्च न्यायालय ने कहा, ‘‘इसलिए हमें आपको यह बताना होगा कि अपनी नीतियों को सख्ती से लागू करने के प्रयास में आप मच्छर मारने के लिए तलवार का इस्तेमाल कर रहे हैं। प्रक्रिया का पालन किया जाना चाहिए।’’
सरकारी वकील नेहा भिड़े ने एफडीए की ओर से हलफनामा दाखिल करने के लिए समय मांगा।
भाषा संतोष नेत्रपाल
नेत्रपाल