समुद्र भविष्य में समृद्धि का वाहक बनेगा, उसे सुरक्षित रखना जरूरी : नौसेना प्रमुख एडमिरल कुमार

समुद्र भविष्य में समृद्धि का वाहक बनेगा, उसे सुरक्षित रखना जरूरी : नौसेना प्रमुख एडमिरल कुमार

समुद्र भविष्य में समृद्धि का वाहक बनेगा, उसे सुरक्षित रखना जरूरी : नौसेना प्रमुख एडमिरल कुमार
Modified Date: February 26, 2024 / 08:38 pm IST
Published Date: February 26, 2024 8:38 pm IST

पुणे, 26 फरवरी (भाषा) नौसेना प्रमुख एडमिरल आर. हरि कुमार ने सोमवार को कहा कि समुद्र भविष्य में संवृद्धि व समृद्धि का वाहक बनेगा और इसलिए यह सुनिश्चित करना बहुत जरूरी है कि समंदर सुरक्षित बना रहे।

उन्होंने यह भी कहा कि ‘ब्रह्मोस’ एक बहुत ही तेज गति वाली मिसाइल है तथा इसकी दूरी, क्षमता, घातकता को और बढ़ाया जा रहा है।

रक्षा मामलों पर मंत्रिमंडल की समिति ने भारतीय नौसेना के लिए करीब 19,000 करोड़ रुपये की लागत से 200 से अधिक ब्रह्मोस सुपरसोनिक मिसाइल और संबद्ध उपकरणों की खरीद को मंजूरी दी है।

यहां आयोजित महाराष्ट्र ‘एमएसएमई डिफेंस एक्सपो’ में नौसेना प्रमुख ने कहा कि वर्तमान और भविष्य के सुरक्षा प्रतिमानों में, सामूहिक विनाश के हथियार, मिसाइल और ड्रोन जैसी संवेदनशील प्रौद्योगिकियों के प्रसार के बारे में चिंताएं बढ़ गई हैं क्योंकि सरकार के नियंत्रण से बाहर के तत्व और शत्रु देश अपने लाभ के लिए उनका इस्तेमाल कर रहे हैं।

उन्होंने कहा कि देश का 88 प्रतिशत तेल आयात समुद्री मार्गों से होता है और लगभग 20 लाख वर्ग किलोमीटर क्षेत्रफल के विशेष आर्थिक क्षेत्र (एसईजेड) में काफी मात्रा में समुद्री संसाधन एवं संपदा है।

उन्होंने कहा कि इसलिए उनके चारों ओर के समुद्र अर्थव्यवस्था के लिए काफी मायने रखते हैं।

नौसेना प्रमुख ने कहा, ‘‘जैसा कि हमारा राष्ट्र विश्व के देशों के बीच अपना एक उपयुक्त स्थान बनाने की कोशिश कर रहा है, ऐस में समुद्र भविष्य में विकास और समृद्धि को बढ़ावा देगा।’’

उन्होंने कहा, ‘‘हम तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बनने की ओर बढ़ रहे हैं, ऐसे में सबसे ज्यादा व्यापार समुद्री मार्गों से होगा और इसलिए यह सुनिश्चित करना बहुत जरूरी है कि समुद्र सुरक्षित, स्थिर और संरक्षित रहे। इस तरह, यह भारतीय नौसेना और तटरक्षक जैसी समुद्री सुरक्षा एजेंसियों की जिम्मेदारी है।’’

एडमिरल कुमार ने कहा कि वह इस बात से सहमत हैं कि देश अभी एक प्रतिस्पर्धी वर्तमान से अनिश्चित भविष्य की ओर बढ़ रहा है और सभी क्षेत्र में तीव्र प्रतिस्पर्धा होगी।

उन्होंने कहा, ‘‘सरकार के नियंत्रण से बाहर के तत्वों, सरकार-प्रायोजित तत्वों, कारोबार और हित समूहों द्वारा विघटनकारी प्रौद्योगिकियों का इस्तेमाल करने के कारण भी इसमें वृद्धि हुई है।’’

एडमिरल कुमार ने कहा कि इसलिए भारतीय नौसेना महत्वपूर्ण वैश्विक व्यापार मार्गों और भारत के समुद्री हितों की रक्षा करने में सबसे आगे बनी हुई है। उन्होंने कहा कि यह ड्रोन रोधी और समुद्री लूट रोधी अभियान चला रही है, उत्तर और पश्चिम अरब सागर में मिसाइल हमलों और समुद्री डाकुओं से व्यापारिक जहाजों की रक्षा कर रही है।

उन्होंने कहा कि भारतीय नौसेना हिंद महासागर क्षेत्र की सुरक्षा और स्थिरता सुनिश्चित करने के लिए अपने सैन्य साजो-सामान की एक पूरी श्रृंखला तैनात करने में नहीं हिचकेगी।

उन्होंने कहा कि भारतीय नौसेना में वर्तमान में 130 से अधिक जहाज और 250 विमान हैं। उन्होंने 2035 तक इसकी संख्या बढ़कर 175 जहाज और 400 विमान तक पहुंचने का अनुमान व्यक्त किया।

भाषा सुभाष नरेश

नरेश


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