मुंबई, 19 जनवरी (भाषा) महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे ने सहयोगी भाजपा के साथ कथित रस्साकशी के बीच, सोमवार को कहा कि शिवसैनिकों के एक वर्ग का मानना है कि मुंबई में शिवसेना का महापौर होना बाल ठाकरे की जन्म शताब्दी के अवसर पर उनके प्रति सम्मान का प्रतीक होगा।
शिंदे ने बृहन्मुंबई महानगरपालिका (बीएमसी) चुनाव परिणाम आने के बाद नये राजनीतिक समीकरण की खबरों को खारिज करते हुए कहा कि मुंबई में महायुति का महापौर होगा।
उन्होंने संवाददाताओं को बताया कि जिन नगर निकायों में शिवसेना और भाजपा ने साथ मिलकर चुनाव लड़ा था, उनमें महायुति गठबंधन के महापौर होंगे।
उन्होंने कहा, ‘‘बालासाहेब ठाकरे की जन्म शताब्दी 23 जनवरी से शुरू होती है। कुछ शिवसैनिकों (पार्टी कार्यकर्ताओं) का मानना है कि बीएमसी में शिवसेना का मेयर होना चाहिए।’’
उनकी इन टिप्पणियों को शिंदे द्वारा मुंबई के महापौर पद पर अप्रत्यक्ष रूप से दावा जताने के रूप में देखा जा रहा है।
उपमुख्यमंत्री ने इस बात पर जोर दिया कि शिवसेना जनादेश के खिलाफ कोई भी निर्णय नहीं लेगी, और इस बात पर बल दिया कि उनकी पार्टी और भाजपा ने बीएमसी चुनाव गठबंधन के तहत लड़ा था।
शिंदे का यह बयान बीएमसी में भाजपा-शिवसेना गठबंधन द्वारा मामूली बहुमत हासिल करने के बाद, शिवसेना के 29 पार्षदों को मुंबई के एक होटल में स्थानांतरित किए जाने को लेकर जारी बहस के बीच आया है। चुनाव परिणाम पिछले सप्ताह शुक्रवार को घोषित किये गए थे।
ऐसी अटकलें लगाई जा रही हैं कि शिंदे शिवसेना के लिए बीएमसी महापौर का पद कम से कम पहले ढाई साल के लिए सुनिश्चित करना चाहते हैं, क्योंकि यह पार्टी के संस्थापक दिवंगत बाल ठाकरे की जन्म शताब्दी वर्ष है।
शिंदे ने संवाददाताओं से कहा, ‘‘शिवसेना और भाजपा ने बीएमसी चुनाव गठबंधन के तहत लड़ा था, इसलिए महायुति के उम्मीदवार महापौर बनेंगे। ठाणे, कल्याण-डोम्बिवली, उल्हासनगर और अन्य नगर निकायों में भी ऐसा ही किया जाएगा, जहां गठबंधन ने संयुक्त रूप से चुनाव लड़ा था।’’
आधिकारिक तौर पर, शिवसेना का कहना है कि नव निर्वाचित सदस्यों को देश के सबसे धनी नगर निकाय (बीएमसी) के कामकाज से अवगत कराने के लिए एक प्रशिक्षण कार्यशाला के लिए होटल में स्थानांतरित किया गया।
यह कदम बीएमसी चुनाव परिणामों की घोषणा के बाद उठाया गया, जिसमें उद्धव ठाकरे के नेतृत्व वाली शिवसेना 65 सीटें जीतकर भाजपा के बाद दूसरी सबसे बड़ी पार्टी के रूप में उभरी।
शिवसेना (उबाठा) प्रमुख उद्धव ठाकरे ने कहा था कि शिवसेना अपने पार्षदों को एक होटल में ले गई है क्योंकि वह भाजपा से भयभीत है।
भाजपा ने 89 पर जीत हासिल की और उसकी सहयोगी शिवसेना ने 29 सीटें जीतकर महायुति को 227 सदस्यीय बीएमसी में मामूली बहुमत दिला दी।
शिंदे ने कहा कि मुंबईवासियों ने शिवसेना-भाजपा गठबंधन को विश्वास के साथ वोट दिया है और उस विश्वास का सम्मान किया जाएगा।
उन्होंने यह भी कहा कि बीएमसी या महाराष्ट्र के अन्य नगर निकायों में नये राजनीतिक समीकरण बनने की खबरों में कोई सच्चाई नहीं है, और जहां भी गठबंधन के तहत साथ मिलकर चुनाव लड़ा गया है, वहां महापौर का पद महायुति को ही मिलेगा।
शिवसेना नेता संजय निरुपम ने भी कहा कि मुंबई के अगले महापौर सत्तारूढ़ महायुति से ही होंगे और उन्होंने शिवसेना (उबाठा) उम्मीदवार को यह पद मिलने की संभावना को खारिज कर दिया। यह बयान ठाकरे द्वारा अपनी पार्टी को महापौर पद मिलने की ‘‘ईश्वरीय इच्छा’’ संबंधी टिप्पणी किये जाने के कुछ दिनों बाद आया है।
निरुपम ने कहा कि मुंबई के मतदाताओं ने शिवसेना (उबाठा) के ‘‘27 साल के भ्रष्टाचार’’ को खारिज कर दिया है और पार्टी को विपक्ष में बैठने का जनादेश दिया है।
उन्होंने कहा, ‘‘मुंबई के मेयर महायुति से होंगे। मुंबई की जनता ने इसके लिए हमें स्पष्ट बहुमत दिया है।’’ निरुपम ने कहा राज्य में सत्तारूढ़ गठबंधन को मेयर चुनाव में शिवसेना (उबाठा) के पार्षदों के वोट की आवश्यकता नहीं है।
इस बीच, उद्धव ठाकरे के नेतृत्व वाली पार्टी के प्रवक्ता हर्षल प्रधान ने कहा कि भाजपा और शिंदे सत्ता के भूखे हैं।
भाषा सुभाष माधव
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