ठाणे, दो फरवरी (भाषा) महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे ने सोमवार को कहा कि शिवसेना ने ठाणे, कल्याण-डोंबिवली और उल्हासनगर नगर निगमों में महापौर पद के लिए आरक्षण नहीं होने के बावजूद महिलाओं को नामित करने का निर्णय लिया है, जो पार्टी द्वारा महिला नेतृत्व को दी जा रही अहमियत को दर्शाता है।
शिंदे ने एक विज्ञप्ति में कहा कि शर्मिला पिंपोलकर-गायकवाड़ को ठाणे महानगरपालिका में, हर्षाली थाविल चौधरी को कल्याण-डोंबिवली महानगरपालिका में और अश्विनी निकम को उल्हासनगर महानगरपालिका में महापौर के रूप में मनोनीत किया जाएगा।
इसमें कहा गया, ‘‘इन महानगरपालिकाओं के इतिहास में यह पहली बार है कि महिलाएं आरक्षण के लाभ के बिना महापौर का पद संभालेंगी। यह निर्णय अनिवार्य कोटा से परे महिला सशक्तिकरण को बढ़ावा देने के लिए सोच-समझकर लिया गया है। महिलाओं को आरक्षण की प्रतीक्षा किए बिना, उनकी क्षमता और नेतृत्व के आधार पर अवसर मिलने चाहिए।’’
विज्ञप्ति में कहा गया है कि महापौर पद के लिए महिलाओं के वास्ते कोई आरक्षण नहीं होने के बावजूद, शिवसेना ने बहनों पर विश्वास दिखाया है और उन्हें महत्वपूर्ण नगर निकायों के नेतृत्व की जिम्मेदारी सौंपी है।
इसमें उन अटकलों का भी जिक्र किया गया है कि इन पदों के लिये किसी भी प्रकार के आरक्षण के अभाव में पुरुष महापौर को चुना जाएगा।
कल्याण से शिवसेना सांसद डॉ. श्रीकांत शिंदे द्वारा नगर निकायों के शीर्ष पद के लिए सक्षम महिला पार्षदों के नाम पर विचार किए जाने की पुरजोर वकालत के बाद शिंदे ने महिला नेताओं को प्राथमिकता देने के प्रस्ताव को मंजूरी दी।
बृहन्मुंबई महानगरपालिका (बीएमसी) में शिवसेना के 29 पार्षदों में से 19 महिलाएं हैं। बीएमसी चुनावों में मैदान में उतारे गए 90 उम्मीदवारों में से 63 महिलाएं थीं।
राज्य की 29 महानगरपालिकाओं के लिए मतदान 15 जनवरी को हुआ था, जबकि परिणाम एक दिन बाद घोषित किए गए।
भाषा आशीष दिलीप
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