मुंबई, 24 मार्च (भाषा) विपक्षी शिवसेना (उबाठा) और कांग्रेस ने मंगलवार को महाराष्ट्र विधान परिषद की उपसभापति नीलम गोर्हे के खिलाफ सभापति को नोटिस सौंप करके उन्हें पद से हटाने की मांग की। राज्य सरकार को भारतीय पुलिस सेवा (आईपीएस) के अधिकारी को निलंबित करने का निर्देश देने को लेकर पार्टियों ने उन पर अपनी शक्ति का दुरुपयोग करने का आरोप लगाया।
दोनों विपक्षी दलों ने यह नोटिस विधान परिषद के सभापति को उसी दिन सौंपा, जिस दिन गोर्हे को विदाई दी जा रही थी क्योंकि उनका कार्यकाल इस साल मई में समाप्त हो रहा है।
यह दूसरी बार है जब शिवसेना (उबाठा) ने गोर्हे को हटाने की मांग करते हुए नोटिस दिया है। गोर्हे जून 2022 में शिवसेना के विभाजन के बाद उद्धव ठाकरे के नेतृत्व वाली पार्टी से जुड़ी थीं, लेकिन बाद में पाला बदलकर महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाली शिवसेना में शामिल हो गईं।
सोमवार को शिवसेना (उबाठा) के विधान परिषद सदस्य अनिल परब ने गोर्हे पर आरोप लगाया कि उन्होंने पिछले सप्ताह जिला परिषद अध्यक्ष के चुनाव के दौरान हुए हंगामे को लेकर आईपीएस अधिकारी और सतारा के पुलिस अधीक्षक तुषार दोशी को निलंबित करने का आदेश देकर अपनी शक्ति का दुरुपयोग किया।
सोमवार को सदन में हुई चर्चा के दौरान शिवसेना के मंत्री शंभूराज देसाई और राकांपा के मंत्री मकरंद पाटिल के साथ-साथ दोनों दलों के अन्य सदस्यों ने दोशी को निलंबित करने की मांग की। दोनों मंत्रियों ने आरोप लगाया कि शुक्रवार को हुए जिला परिषद अध्यक्ष के चुनाव के दौरान स्थानीय पुलिस ने उनके साथ बदसलूकी की।
इसके बाद गोर्हे ने कहा, ‘‘मैं सरकार को निर्देश देती हूं कि सतारा के एसपी और अन्य लोग जिन्होंने (मतदाताओं और मंत्रियों के साथ) बदसलूकी की, उन्हें निलंबित किया जाए।’’ उन्होंने कहा कि सरकार को इस मामले की जांच शुरू करनी चाहिए थी, लेकिन कुछ कारणों से ऐसा नहीं हुआ।
गोर्हे के खिलाफ नोटिस पर शिवसेना (उबाठा) के सदस्यों अनिल परब, सुनील शिंदे और सचिन अहीर के साथ-साथ कांग्रेस के भाई जगताप, धीरज लिंगाडे और विधान परिषद के निर्दलीय सदस्य सुधाकर अडबाले ने हस्ताक्षर किए।
हालांकि, राकांपा (शप) के शशिकांत शिंदे ने नोटिस पर हस्ताक्षर नहीं किए। उन्होंने सतारा के एसपी को निलंबित करने के गोर्हे के कदम का समर्थन किया।
भाषा संतोष रंजन
रंजन