शिवसेना (उबाठा) सांसद अरविंद सावंत ने लोस अध्यक्ष से अलग गुट को मान्यता नहीं देने का आग्रह किया
शिवसेना (उबाठा) सांसद अरविंद सावंत ने लोस अध्यक्ष से अलग गुट को मान्यता नहीं देने का आग्रह किया
मुंबई, 17 जून (भाषा) उद्धव ठाकरे के नेतृत्व वाली शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे) में बगावत की अटकलों के बीच पार्टी सांसद अरविंद सावंत ने लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला से अनुरोध किया है कि पार्टी का प्रतिनिधित्व करने का दावा करने वाले किसी भी ‘‘बागी’’ गुट को मान्यता नहीं दी जाए।
यह घटनाक्रम ऐसे समय सामने आया है, जब शिवसेना (उबाठा) के नौ में से कम से कम छह सांसदों के लोकसभा में अलग गुट बनाने की अटकलें तेज हो गई हैं।
सावंत ने कहा कि सदन में नेतृत्व तय करने, सचेतक नियुक्त करने और विधायी आचरण से जुड़े निर्देश जारी करने का अधिकार राजनीतिक दल से ही मिलता है।
उन्होंने मंगलवार रात लोकसभा अध्यक्ष को लिखे पत्र में कहा, ‘‘विधायी दल के पास राजनीतिक दल से स्वतंत्र कोई अधिकार नहीं होता।’’
पांच सांसदों ने शिवसेना (उबाठा) प्रमुख उद्धव ठाकरे द्वारा रविवार को बुलाई गई बैठक में व्यक्तिगत रूप से हिस्सा नहीं लिया और डिजिटल तरीके से शामिल हुए।
जहां सांसद अरविंद सावंत, अनिल देसाई, राजाभाऊ वाजे और संजय पाटिल बैठक में मौजूद रहे, वहीं ओमप्रकाश राजेनिंबालकर, भाऊसाहेब वाकचोरे, नागेश बापूराव पाटिल आष्टीकर और संजय देशमुख ऑनलाइन जुड़े।
शिवसेना (उबाठा) नेता संजय राउत के अनुसार, एक अन्य सांसद संजय जाधव ने फोन पर ठाकरे से बातचीत की।
सावंत ने पत्र में लिखा कि मीडिया में ऐसी खबरें आ रही हैं कि शिवसेना (उबाठा) के चुनाव चिह्न पर चुने गए कुछ सांसद अलग गुट की मान्यता या किसी अन्य दल में विलय के लिए लोकसभा अध्यक्ष के कार्यालय से संपर्क कर चुके हैं या ऐसा करने की योजना बना रहे हैं।
उन्होंने कहा कि ये मामले सीधे राजनीतिक और विधायी दलों से जुड़ी संवैधानिक व्यवस्था से संबंधित हैं और अनुरोध किया कि उनके पत्र को आधिकारिक रिकॉर्ड का हिस्सा बनाया जाए।
सावंत ने कहा, ‘‘शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे) को अब भी सदन में उसके विधिवत अधिकृत नेता और मुख्य सचेतक (व्हिप) के माध्यम से प्रतिनिधित्व करने वाले एक ही राजनीतिक दल के रूप में मान्यता प्राप्त है और पार्टी का प्रतिनिधित्व करने का दावा करने वाले किसी भी कथित गुट या अलग हुए समूह को कोई पृथक मान्यता, दर्जा, विशेषाधिकार या सुविधा नहीं दी जानी चाहिए।’’
उन्होंने यह भी अनुरोध किया कि यदि इस तरह का कोई प्रस्ताव आता है तो शिवसेना (उबाठा) को अपना पक्ष रखने का अवसर दिए बिना कोई निर्णय नहीं लिया जाए।
सावंत ने कहा कि शिवसेना (उबाठा) दल-बदल रोधी कानून से संबंधित संविधान की दसवीं अनुसूची के प्रावधानों को लागू कराने समेत कानूनी रूप से उपलब्ध सभी अधिकार सुरक्षित रखती है।
दसवीं अनुसूची का हवाला देते हुए उन्होंने कहा कि किसी भी विलय के लिए मूल राजनीतिक दल का विलय होना और विधायी दल के कम से कम दो-तिहाई सदस्यों की सहमति होना, दोनों शर्तें आवश्यक हैं।
सावंत ने कहा, ‘‘केवल संख्या बल पर्याप्त नहीं है। यह संविधान और उच्चतम न्यायालय की व्याख्या के विपरीत है।’’
लोकसभा सदस्य ने कहा कि संसदीय दल का अस्तित्व पूरी तरह राजनीतिक दल पर निर्भर करता है और संवैधानिक ढांचे में सदन में एक ही पार्टी का दावा करने वाले कई प्रतिस्पर्धी गुटों के लिए कोई स्थान नहीं है।
उन्होंने कहा, ‘‘इसलिए संसद में केवल एक अधिकृत पार्टी नेतृत्व, एक मान्यता प्राप्त पार्टी व्हिप और एक मान्यता प्राप्त पार्टी ढांचा ही हो सकता है।’’
सावंत ने 2023 में शिवसेना (उबाठा) के विधायकों की अयोग्यता से जुड़े उच्चतम न्यायालय के फैसले का हवाला देते हुए कहा कि ‘‘विभाजन’’ को अब संवैधानिक मान्यता प्राप्त नहीं है।
उन्होंने कहा कि संविधान (91 संशोधन) अधिनियम, 2003 के तहत दसवीं अनुसूची के पैरा-3 को हटाए जाने के बाद सदस्य दल-विभाजन का दावा करके अयोग्यता की कार्यवाही से नहीं बच सकते। उन्होंने कहा कि इस प्रकार संवैधानिक व्यवस्था किसी राजनीतिक दल के भीतर उभरने वाले विभाजित या टूटकर बने गुटों को विधायिका में अलग पहचान अथवा पृथक अस्तित्व के वैध आधार के रूप में मान्यता नहीं देती।
शिवसेना (उबाठा) के राज्यसभा सदस्य संजय राउत ने मंगलवार देर रात दावा किया कि ‘‘महाराष्ट्र के सांसदों को खरीदने के लिए 15 करोड़ रुपये की अग्रिम राशि दी जा रही है।’’
इसके बाद अटकलों को और बल मिला कि पार्टी के कुछ लोकसभा सदस्य पाला बदल सकते हैं।
इससे पहले मंगलवार को शिवसेना (उबाठा) सांसदों की बगावत की अटकलें और तेज हो गई थीं, जब सत्तारूढ़ एकनाथ शिंदे नीत शिवसेना के नेता प्रताप सरनाईक ने संकेत दिया कि यदि बागी सांसद पाला बदलते हैं तो उनका स्वागत किया जाएगा और उन्हें प्राथमिकता भी दी जाएगी।
भाषा
खारी अमित
अमित

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