मुंबई, 17 जनवरी (भाषा) मुंबई में 1993 के दंगों के दौरान सुलेमान बेकरी में पुलिस गोलीबारी की घटना के एक मुख्य गवाह ने बुधवार को यहां की अदालत को बताया कि पुलिसकर्मी उनके मदरसे के कमरे में घुसे तथा छात्रों और शिक्षक के साथ मारपीट की।
गवाह ने बताया कि पुलिस ने उसके सिर के पिछले हिस्से पर राइफल के कुंदे से वार किया, जिससे वह अचेत हो गया और कुछ महीनों तक कोमा जैसी स्थिति में रहा।
दक्षिण मुंबई के सुलेमान बेकरी के अंदर अंधाधुंध गोलीबारी करने और नौ लोगों की जान लेने के आरोप में कम से कम छह पुलिसकर्मियों पर मामला दर्ज किया गया था।
हालांकि, यह घटना 1993 में हुई थी, लेकिन प्राथमिकी 2001 में उस वक्त दर्ज की गई जब गवाहों – जिनमें बेकरी के कुछ कर्मचारी, शिक्षक और पास के मदरसे के छात्र शामिल थे – ने न्यायमूर्ति बी.एन. श्रीकृष्ण आयोग के समक्ष बयान दर्ज कराया। आयोग ने मुंबई दंगों को जांच की थी।
मदरसे के छात्र रहे और अब 50 वर्ष की आयु के हो चुके गवाह ने घटना को याद करते हुए बताया कि पुलिस ने उसके सिर पर राइफल के कुंदे से वार किया था।
गवाह ने बताया, ‘‘उन्होंने हमारे शिक्षक पर भी हमला किया। विकलांग होने के कारण वह बचने के लिए भाग नहीं सकते थे।’’
शुरुआत में, इस मामले में तत्कालीन संयुक्त पुलिस आयुक्त आर.डी. त्यागी समेत 17 पुलिसकर्मियों के नाम शामिल थे। लेकिन सबूतों के अभाव के कारण त्यागी और नौ अन्य लोगों को आरोप मुक्त कर दिया गया।
पुलिसकर्मियों के बचाव में यह दलील दी गई कि उन्होंने जवाबी कार्रवाई में गोली चलाई थी, जब बेकरी में छापेमारी करने गई पुलिस टीम पर अंदर से गोलीबारी की गई।
दिसंबर 1992 में अयोध्या में बाबरी मस्जिद विध्वंस के बाद मुंबई में हुए दंगों में करीब 900 लोगों की मौत हो गई थी।
भाषा सुभाष माधव
माधव