पुणे में बारिश के बीच छात्रों और नागरिकों का मार्च, प्रधान से इस्तीफे की मांग

पुणे में बारिश के बीच छात्रों और नागरिकों का मार्च, प्रधान से इस्तीफे की मांग

पुणे में बारिश के बीच छात्रों और नागरिकों का मार्च, प्रधान से इस्तीफे की मांग
Modified Date: July 24, 2026 / 09:27 pm IST
Published Date: July 24, 2026 9:27 pm IST

(फोटो के साथ)

पुणे, 24 जुलाई (भाषा) महाराष्ट्र के पुणे में शुक्रवार को तेज बारिश के बावजूद विद्यार्थियों सहित हजारों प्रदर्शनकारियों ने मार्च निकाला और राष्ट्रीय पात्रता सह प्रवेश परीक्षा (नीट) के कथित प्रश्नपत्र लीक मामले को लेकर केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग की।

प्रदर्शनकारियों ने दिल्ली में पुलिस द्वारा विद्यार्थियों पर किए गए लाठीचार्ज की निंदा भी की।

कॉकरेच जनता पार्टी (कॉजपा) ने 18वीं सदी के प्रसिद्ध किले शनिवारवाड़ा से शहर के मध्य स्थित जिला कलेक्टर कार्यालय तक चार किलोमीटर लंबे इस मार्च का आयोजन किया।

इस मार्च में विद्यार्थियों, कामकाजी पेशेवरों, वकीलों और विभिन्न सामाजिक संगठनों के सदस्यों ने भाग लिया।

प्रदर्शनकारियों में शामिल शाइस्ता खान ने कहा, “मैं यहां इसलिए हूं, क्योंकि मेरी दोस्त का ‘नीट’ प्रश्नपत्र लीक हो गया था। मैं समझ सकती हूं कि मई में पेपर लीक होने के बाद उसे कितनी तकलीफ हुई होगी और उसे 21 जून को दोबारा (मेडिकल प्रवेश) परीक्षा देनी पड़ी।”

शाइस्ता खान ने 20 जुलाई को संसद की ओर मार्च निकालने से रोकने के लिए प्रदर्शनकारियों पर दिल्ली पुलिस की कार्रवाई की कड़ी निंदा की।

उन्होंने जोर देकर कहा, “सरकार को केवल जवाबदेही की मांग कर रहे युवाओं के साथ इस तरह की ज्यादती नहीं करनी चाहिए थी।”

एक अन्य प्रदर्शनकारी ने धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग करते हुए कहा कि बार-बार हो रहे प्रश्नपत्र लीक के लिए सरकार को जवाबदेह ठहराया जाना चाहिए।

उन्होंने कहा, “इतने सारे पेपर लीक होने के बाद सरकार की ओर से किसी न किसी स्तर पर जवाबदेही तय होनी चाहिए।”

वकील सादिया खान ने कहा कि वह आंदोलन कर रहे विद्यार्थियों के प्रति समर्थन जताने के लिए इस मार्च में शामिल हुईं।

उन्होंने कहा, “मैं नयी दिल्ली में विद्यार्थियों के साथ हुई ‘गुंडागर्दी’ की निंदा करती हूं। मैं यहां उनका समर्थन करने आई हूं और जरूरत पड़ी तो मैं उनके मामलों को लड़ूंगी।”

एक अन्य मार्च में शामिल अश्विनी के. ने आरोप लगाया कि पेपर लीक रोकने में सरकार की विफलता ने विद्यार्थियों को निराशा की स्थिति में पहुंचा दिया है।

उन्होंने कहा, “विद्यार्थियों की आत्महत्याओं के लिए यह सरकार जिम्मेदार है। धर्मेंद्र प्रधान को इस्तीफा देना चाहिए और यहां मौजूद विद्यार्थियों की भी यही मूल मांग है।”

एक प्रतिभागी ने प्रश्नपत्र लीक मामलों पर सरकार की प्रतिक्रिया पर सवाल उठाया।

उन्होंने पूछा, “मुख्य मुद्दा जवाबदेही का है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने भरोसा दिलाया था कि प्रश्नपत्र लीक के मामलों को त्वरित अदालतों के माध्यम से जल्द निपटाया जाएगा। हमारे पास कई वर्षों से त्वरित अदालतें हैं। उन मामलों का क्या हुआ?”

भाषा जितेंद्र सुरेश

सुरेश


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