सैयदना फैसले को लेकर धमकियां: पूर्व न्यायाधीश को मिली सुरक्षा, अदालत ने मामले में रिपोर्ट मांगी

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सैयदना फैसले को लेकर धमकियां: पूर्व न्यायाधीश को मिली सुरक्षा, अदालत ने मामले में रिपोर्ट मांगी

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  • Publish Date - June 15, 2026 / 08:10 PM IST,
    Updated On - June 15, 2026 / 08:10 PM IST

मुंबई, 15 जून (भाषा) महाराष्ट्र सरकार ने सोमवार को बंबई उच्च न्यायालय को सूचित किया कि उसने दाऊदी बोहरा समुदाय में उत्तराधिकार के विवाद को लेकर साल 2024 में सुनाए गए फैसले को लेकर धमकियों का सामना कर रहे पूर्व न्यायाधीश गौतम पटेल और उनके परिवार के सदस्यों को पुलिस सुरक्षा मुहैया कराई है।

सरकार की ओर से पेश लोक अभियोजक शिशिर हीरे ने कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश रवींद्र घुगे और न्यायमूर्ति गौतम अनखड़ की पीठ को बताया कि मुंबई में न्यायमूर्ति पटेल और उनकी पत्नी के साथ हर समय दो पुलिस अधिकारी मौजूद रहेंगे।

हीरे ने बताया कि न्यायमूर्ति पटेल ने धमकियों को लेकर गामदेवी पुलिस थाने में मामला भी दर्ज कराया है, जिसकी जांच जारी है।

पीठ ने कहा कि यह एक गंभीर मामला है और वह चाहती है कि मुंबई के पुलिस आयुक्त खुद इसकी निगरानी करें और दो जुलाई को वस्तुस्थिति रिपोर्ट सौंपें।

उच्च न्यायालय ने कहा, “एक न्यायाधीश, जिन्होंने अपना कर्तव्य निभाया और पद से सेवानिवृत्त हो चुके हैं, उन्हें धमकियों का सामना करना पड़ रहा है। केंद्र और राज्य सरकारों को तुरंत कदम उठाने की जरूरत है। उनकी (न्यायमूर्ति पटेल की) सुरक्षा सबसे अहम है। आपको यह साबित करना होगा कि आप कितने प्रतिबद्ध हैं।”

पीठ ने कहा कि न्यायमूर्ति पटेल, उनकी पत्नी और बेटी (जो अभी मुंबई में हैं) को पर्याप्त सुरक्षा मुहैया कराई जानी चाहिए।

अदालत ने केंद्र सरकार को निर्देश दिया कि वह अप्रैल में लंदन में न्यायमूर्ति पटेल की बेटी पर हमले की घटना के सिलसिले में उठाए गए कदमों के बारे में जानकारी दे।

पीठ ने कहा कि केंद्र सरकार लंदन पुलिस की ओर से इस मामले की जांच के दौरान उठाए गए कदमों के बारे में भी जानकारी उपलब्ध कराएगी।

अदालत ने कहा, “मुंबई में दर्ज मामले के सिलसिले में हम पुलिस आयुक्त से अनुरोध करते हैं कि वह खुद जांच की निगरानी करें और दो जुलाई को वस्तुस्थिति रिपोर्ट सौंपें।”

पीठ तीन अधिवक्ता संगठनों की ओर से दायर उस जनहित याचिका पर सुनवाई कर रही थी, जिसमें इस मामले में न्यायिक हस्तक्षेप का अनुरोध किया गया था।

याचिकाकर्ताओं की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता नितिन ठक्कर ने कहा कि एक कड़ा संदेश दिया जाना चाहिए कि न्यायपालिका ऐसी धमकियों को बर्दाश्त नहीं करेगी।

याचिका में उच्च न्यायालय से अधिकारियों को न्यायमूर्ति पटेल और उनके परिजन को मिली धमकियों के मद्देनजर उन्हें सुरक्षा मुहैया कराने का आग्रह किया गया है।

इसमें अदालत से अनुरोध किया गया है कि वह मामले की जांच के लिए शीर्ष अदालत या उच्च न्यायालय के सेवानिवृत्ति न्यायाधीश की अध्यक्षता में एक विशेष जांच दल (एसआईटी) का गठन करे या केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) या महाराष्ट्र सरकार को धमकियों और हमले की गहन पड़ताल करने का निर्देश दे।

न्यायमूर्ति पटेल और उनके परिवार के सदस्यों को सैयदना (दाऊदी बोहरा समुदाय के आध्यात्मिक प्रमुख की उपाधि) विवाद से संबंधित मामले में साल 2024 में सुनाए गए फैसले को लेकर पिछले 10 महीने में कई गुमनाम धमकी भरे पत्र मिले हैं।

पांच जून को न्यायमूर्ति पटेल की बेटी के लंदन स्थित आवास पर हत्या की धमकी वाला एक पत्र भेजा गया था, जिस पर जर्मनी के डाक विभाग की मोहर लगी हुई थी। पत्र में दावा किया था कि न्यायमूर्ति पटेल और उनके परिवार की हत्या की “सुपारी” दे दी गई है।

पत्र के साथ एक डिजिटल स्टोरेज उपकरण भी भेजा गया था, जिसे लंदन पुलिस को सौंप दिया गया है।

धमकी भरे पत्र भेजने वालों ने मांग की है कि पूर्व न्यायाधीश यूट्यूब पर एक वीडियो जारी कर सैयदना मामले में पारित आदेश के लिए मांफी मांगें और कहें कि उन्होंने यह फैसला “दबाव और मजबूरी” में सुनाया था।

अप्रैल 2024 में न्यायमूर्ति पटेल की एकल पीठ ने सैयदना मुफद्दल सैफुद्दीन को दाऊदी बोहरा समुदाय के 53वें दाई-अल-मुतलक (धार्मिक प्रमुख) के रूप में मान्यता देते हुए उनके पक्ष में फैसला सुनाया था। अदालत ने कहा था कि उनकी ‘नस्स’ (उत्तराधिकार की नियुक्ति) वैध थी।

भाषा पारुल धीरज

धीरज