मुंबई, 15 जून (भाषा) महाराष्ट्र सरकार ने सोमवार को बंबई उच्च न्यायालय को सूचित किया कि उसने दाऊदी बोहरा समुदाय में उत्तराधिकार के विवाद में साल 2024 में सुनाए गए फैसले को लेकर धमकियों का सामना कर रहे पूर्व न्यायाधीश गौतम पटेल और उनके परिवार के सदस्यों को पुलिस सुरक्षा मुहैया कराई है।
सरकार की ओर से पेश विशेष लोक अभियोजक शिशिर हिरे ने कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश रवींद्र घुगे और न्यायमूर्ति गौतम अनखड़ की पीठ को बताया कि मुंबई में न्यायमूर्ति पटेल और उनकी पत्नी के साथ हर समय दो पुलिस अधिकारी मौजूद रहेंगे।
उन्होंने बताया कि न्यायमूर्ति पटेल ने धमकियों को लेकर गामदेवी पुलिस थाने में मामला भी दर्ज कराया है, जिसकी जांच जारी है।
पीठ ने कहा कि यह एक गंभीर मामला है और वह चाहती है कि मुंबई के पुलिस आयुक्त खुद इसकी निगरानी करें और दो जुलाई को वस्तुस्थिति रिपोर्ट सौंपें।
उच्च न्यायालय ने कहा, “एक न्यायाधीश, जिन्होंने अपना कर्तव्य निभाया और पद से सेवानिवृत्त हुए, उन्हें धमकियों का सामना करना पड़ रहा है। केंद्र और राज्य सरकारों को तुरंत कदम उठाने की जरूरत है। उनकी (न्यायमूर्ति पटेल की) सुरक्षा सबसे अहम है। आपको यह साबित करना होगा कि आप कितने प्रतिबद्ध हैं।”
पीठ ने कहा कि न्यायमूर्ति पटेल, उनकी पत्नी और बेटी (जो अभी मुंबई में हैं) को पर्याप्त सुरक्षा मुहैया कराई जानी चाहिए।
अदालत ने केंद्र सरकार को निर्देश दिया कि वह अप्रैल में लंदन में न्यायमूर्ति पटेल की बेटी पर हमले की घटना के सिलसिले में उठाए गए कदमों के बारे में जानकारी दे।
पीठ ने कहा कि केंद्र सरकार लंदन पुलिस की ओर से इस मामले की जांच के दौरान उठाए गए कदमों के बारे में भी जानकारी उपलब्ध कराएगी।
अदालत ने कहा, “मुंबई में दर्ज मामले के सिलसिले में हम पुलिस आयुक्त से अनुरोध करते हैं कि वह खुद जांच की निगरानी करें और दो जुलाई को वस्तुस्थिति रिपोर्ट सौंपें।”
पीठ तीन अधिवक्ता संगठनों की ओर से दायर उस जनहित याचिका पर सुनवाई कर रही थी, जिसमें इस मामले में न्यायिक हस्तक्षेप का अनुरोध किया गया था।
न्यायमूर्ति पटेल और उनके परिवार के सदस्यों को सैयदना (दाऊदी बोहरा समुदाय के आध्यात्मिक प्रमुख की उपाधि) विवाद से संबंधित मामले में साल 2024 में सुनाए गए फैसले को लेकर कई धमकी भरे पत्र मिले हैं।
भाषा पारुल रंजन
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