ठाणे, छह मई (भाषा) ठाणे की एक अदालत ने 2014 के हत्या और दंगे के एक मामले में यह देखते हुए 10 आरोपियों को बरी कर दिया कि प्रमुख गवाह अभियोजन पक्ष का समर्थन करने में विफल रहे।
अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश ए. एस. भागवत ने मंगलवार को अपने आदेश में कहा कि अभियोजन पक्ष आरोपों को संदेह से परे साबित नहीं कर सका।
यह मामला महाराष्ट्र के ठाणे शहर के कालवा इलाके में 16 दिसंबर 2014 को हुई एक कथित हिंसक झड़प से जुड़ा है। इस हिंसा में भास्कर उर्फ शंकर अनंत कदम की मौत हो गई और कई अन्य लोग घायल हो गए थे।
अभियोजन पक्ष के अनुसार, आरोपियों ने चाकू और धारदार हथियारों से कदम और अन्य लोगों पर कथित तौर पर हमला कर दिया।
मुकदमे की सुनवाई के दौरान, अभियोजन पक्ष ने मृतक की पत्नी सहित 14 गवाहों से पूछताछ की। मृतक की पत्नी इस मामले में शिकायतकर्ता हैं।
हालांकि, अदालत ने पाया कि उसने (मृतक की पत्नी ने) अपनी शुरुआती शिकायत में उल्लिखित इस बात से इनकार किया कि आरोपी ने मृतक को बार-बार पीटा था।
शिकायतकर्ता ने अपनी जिरह में यह भी कहा कि उसे उस दस्तावेज़ की सामग्री की जानकारी नहीं थी जिस पर उसने हस्ताक्षर किए थे और वह अपने बयानों में विसंगतियों के कारणों को नहीं बता सकती।
प्रत्यक्षदर्शियों ने भी हमलावरों की पहचान नहीं की और न ही इस बात की पुष्टि की कि उनके पास हथियार थे।
न्यायाधीश ने 10 आरोपियों को बरी करने का आदेश देते हुए कहा कि अभियोजन पक्ष भारतीय दंड संहिता (आईपीसी) और भारतीय शस्त्र अधिनियम की विभिन्न धाराओं के तहत गैरकानूनी रूप से एकत्र होने, दंगा और हत्या सहित आरोपों को साबित करने में विफल रहा।
मुकदमे की सुनवाई के दौरान एक अन्य आरोपी की मौत हो चुकी थी, जिसके खिलाफ कार्यवाही अगस्त 2024 में समाप्त कर दी गई थी।
भाषा यासिर वैभव
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