ठाणे(महाराष्ट्र), 27 जुलाई (भाषा) ठाणे की एक अदालत ने कथित पीड़िता के अपने बयान से मुकरने के बाद 22 वर्षीय युवक को दुष्कर्म और ब्लैकमेल करने के आरोपों से बरी कर दिया।
महिला ने इससे पहले अदालत से बाहर मामले में सुलह करने की बात स्वीकार की थी।
विशेष अदालत की न्यायाधीश डॉ. अनीता एस. नेवासे ने 21 जुलाई को पारित फैसले में कहा कि अभियोजन पक्ष आरोपी का दोष संदेह से परे साबित करने में नाकाम रहा।
अभियोजन पक्ष का आरोप था कि महाराष्ट्र के ठाणे शहर के मीरा रोड इलाके में रहने वाले आरोपी ने पीड़िता को उसके घर पर नशीला पेय पिलाकर बेहोश कर दिया, और अगस्त 2015 से जनवरी 2016 के बीच उसके साथ जबरन शारीरिक संबंध बनाए।
अभियोजन पक्ष के अनुसार, आरोपी ने इस कृत्य का वीडियो बनाया और पीड़िता को ब्लैकमेल करते हुए धमकी दी कि अगर उसने पुलिस में शिकायत की, तो वह वीडियो को सार्वजनिक कर देगा।
पीड़िता से छह मार्च 2016 को मिली तहरीर के आधार पर पुलिस ने आरोपी के खिलाफ भारतीय दंड संहिता की धारा 376 (बलात्कार), 328 (ज़हर या नशीले पदार्थ से नुकसान पहुंचाना) और 506 (आपराधिक धमकी) के तहत प्राथमिकी दर्ज की।
मुकदमे की सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष ने दो गवाहों – पीड़ित और जांच अधिकारी – से जिरह की।
हालांकि, पीड़िता अपने शुरुआती बयानों से मुकर गई। लेकिन उसने बयान दिया कि घटना को 11 साल बीत चुके हैं और उसे घटना की खास बातें याद नहीं हैं।
अदालत ने व्यवस्था दी कि हालांकि कानून पीड़िता की गवाही के आधार पर ही दोषी करार देने की अनुमति देता है, बशर्ते कि वह विश्वसनीय हो। लेकिन इस मामले में किसी ठोस सबूत के अभाव में दोषी करार देने का कोई आधार नहीं है।
भाषा धीरज सुभाष
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