चीन के नए ‘जातीय एकता कानून’ के विरोध में मुंबई में तिब्बती समुदाय का प्रदर्शन

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चीन के नए ‘जातीय एकता कानून’ के विरोध में मुंबई में तिब्बती समुदाय का प्रदर्शन

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  • Publish Date - August 3, 2026 / 10:34 PM IST,
    Updated On - August 3, 2026 / 10:34 PM IST

मुंबई, तीन अगस्त (भाषा) तिब्बती समुदाय के सदस्यों ने चीन के नए ‘जातीय एकता एवं प्रगति कानून’ के विरोध में सोमवार को यहां प्रदर्शन किया और इस विवादास्पद कानून को दमनकारी तथा स्थानीय भाषाओं को समाप्त करने की बीजिंग की रणनीति का हिस्सा करार दिया।

चीन के ‘एथनिक यूनिटी एंड प्रोग्रेस प्रमोशन लॉ’ (जातीय एकता एवं प्रगति संवर्धन कानून) को वहां की संसद ने 12 मार्च को पारित किया था। यह कानून एक जुलाई से लागू हो गया है।

तिब्बती संगठन ‘फ्रेंड्स ऑफ तिब्बत’ के समन्वयक तेनजिन त्सुंड्यू ने बताया कि दक्षिण मुंबई के आजाद मैदान में आयोजित इस प्रदर्शन में कर्नाटक के मुंडगोड और महाराष्ट्र के भंडारा स्थित तिब्बती बस्तियों से आए शरणार्थियों ने भाग लिया।

मुंबई में तिब्बती शहीदों के स्मारक पर एक पूजा का भी आयोजन किया गया और दो जुलाई को न्यूयॉर्क में संयुक्त राष्ट्र मुख्यालय के सामने चीन के इस नए कानून के विरोध में आत्मदाह करने वाले तिब्बती कार्यकर्ता पावो लोबगा रांगजेन (52) को श्रद्धांजलि दी गई।

त्सुंड्यू ने कहा कि देश की आर्थिक राजधानी में हुआ यह प्रदर्शन चीन के नए कानून के खिलाफ दुनिया भर में तिब्बतियों द्वारा चलाए जा रहे आंदोलन का हिस्सा है।

उन्होंने कहा, ‘‘हम चीन से तिब्बत को उपनिवेशवादी नियंत्रण से मुक्त करने की मांग करते हैं। हम तिब्बत की स्वतंत्रता चाहते हैं। चीन का यह दमनकारी नया कानून सभी संस्थानों में स्थानीय भाषाओं के स्थान पर चीनी भाषा लागू करने का प्रावधान करता है, जिससे तिब्बत में तिब्बती भाषा की शिक्षा प्रभावी रूप से प्रतिबंधित हो जाएगी। यह स्थानीय भाषाओं को मिटाने की उसकी रणनीति का हिस्सा है।’’

इससे पहले रविवार को मध्य मुंबई स्थित चैत्यभूमि में भी इसी मुद्दे पर विरोध प्रदर्शन किया गया था।

चीनी सरकार का कहना है कि इस कानून का उद्देश्य देश के विभिन्न जातीय समूहों के बीच ‘‘साझा’’ राष्ट्रीय पहचान विकसित करना है।

भाषा रवि कांत रवि कांत देवेंद्र

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