महाराष्ट्र में रेस्तरां का निलंबन आदेश वापस नहीं लेने पर उच्च न्यायालय ने एफडीए को फटकारा

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महाराष्ट्र में रेस्तरां का निलंबन आदेश वापस नहीं लेने पर उच्च न्यायालय ने एफडीए को फटकारा

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  • Publish Date - August 3, 2026 / 07:49 PM IST,
    Updated On - August 3, 2026 / 07:49 PM IST

मुंबई, तीन अगस्त (भाषा) बंबई उच्च न्यायालय ने नवी मुंबई स्थित एक बार एवं रेस्तरां के पुनः निरीक्षण में 100 प्रतिशत नियमों का अनुपालन पाए जाने के बावजूद उसका लाइसेंस निलंबन आदेश वापस नहीं लेने पर महाराष्ट्र के खाद्य एवं औषधि प्रशासन (एफडीए) विभाग को सोमवार को एक बार फिर फटकार लगाई।

कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश रवींद्र घुगे और न्यायमूर्ति गौतम अनखड़ की पीठ ने कहा कि वह रेस्तरां मालिक को हुए नुकसान के लिए विभाग पर जुर्माना लगाने पर विचार करेगी। पीठ ने रेस्तरां का लाइसेंस निलंबन आदेश भी रद्द कर दिया।

उच्च न्यायालय ने कुछ दिन पहले भी एफडीए को भोजनालयों के खिलाफ चुनिंदा कार्रवाई करने और राज्य सचिवालय ‘मंत्रालय’ की कैंटीनों के विरुद्ध कार्रवाई नहीं करने को लेकर फटकार लगाई थी।

पीठ नवी मुंबई के बेलापुर स्थित ‘होटल पवन बार एंड रेस्तरां’ की याचिका पर सुनवाई कर रही थी, जिसमें एफडीए की कार्रवाई को चुनौती दी गई है।

याचिकाकर्ता की ओर से अधिवक्ता मयूर खांडेफालकर ने अदालत को बताया कि एफडीए ने 29 जून को बार एवं रेस्तरां का निरीक्षण किया था और उसे नियमों का 63 प्रतिशत अनुपालन करने वाला पाया था। इसके बाद 30 जून को उसका लाइसेंस निलंबित कर दिया गया।

अधिवक्ता सागर शेट्टी के माध्यम से दायर याचिका के अनुसार, रेस्तरां संचालक ने इस आदेश के खिलाफ अपील की, जिसके बाद 14 जुलाई को दोबारा निरीक्षण किया गया। पुनः निरीक्षण में प्रतिष्ठान को 100 प्रतिशत अनुपालन प्रमाणपत्र जारी किया गया, लेकिन इसके बावजूद निलंबन आदेश वापस नहीं लिया गया।

इस पर अदालत ने एफडीए से पूछा कि जब याचिकाकर्ता को 100 प्रतिशत नियमों का अनुपालन करने वाला पाया गया, तब भी उसका लाइसेंस निलंबित क्यों रखा गया।

पीठ ने कहा, ‘‘याचिकाकर्ता को प्रतिदिन हुए नुकसान की भरपाई कौन करेगा? समस्या यह है कि यह विभाग (एफडीए) अब तक सोया हुआ था और अब जागा है। आपके पास एक प्रशंसनीय आयुक्त (तुकाराम मुंढे) हैं, लेकिन जब याचिकाकर्ता को 100 प्रतिशत अनुपालन का प्रमाणपत्र मिल चुका है, तो उसका लाइसेंस निलंबित क्यों रहना चाहिए?’’

पीठ ने कहा कि वह एफडीए पर खर्च लगाने के सवाल पर विचार करेगी।

अदालत ने कहा, ‘‘यदि हम इस पर चुप रहें, तो यह अपने कर्तव्य का निर्वहन नहीं करने जैसा होगा।’’

मुंबई उच्च न्यायालय ने लाइसेंस निलंबन आदेश रद्द करते हुए मामले की अगली सुनवाई बुधवार को निर्धारित की, जिसमें एफडीए पर लगाए जाने वाले जुर्माने पर विचार किया जाएगा।

पीठ ने याचिकाकर्ता को निर्देश दिया कि वह 14 जुलाई से प्रतिष्ठान बंद रहने के कारण हुए वित्तीय नुकसान का विवरण शपथपत्र के माध्यम से अदालत में पेश करे।

पिछले सप्ताह भी एफडीए को उच्च न्यायालय की नाराजगी का सामना करना पड़ा था, जब उसने एक रिपोर्ट में दावा किया था कि मंत्रालय परिसर की कैंटीन 93 प्रतिशत नियमों का पालन कर रही हैं, इसलिए उनके खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं की गई।

भाषा रवि कांत रवि कांत दिलीप

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