सिकल सेल एनीमिया से निपटने के लिए जागरूकता, जांच पर जोर

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सिकल सेल एनीमिया से निपटने के लिए जागरूकता, जांच पर जोर

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  • Publish Date - August 3, 2026 / 07:02 PM IST,
    Updated On - August 3, 2026 / 07:02 PM IST

नागपुर, तीन अगस्त (भाषा) वरिष्ठ आईपीएस अधिकारी संदीप तामगाडगे और महाराष्ट्र खाद्य एवं औषधि प्रशासन (एफडीए) आयुक्त तुकाराम मुंढे ने सिकल सेल एनीमिया जैसे गंभीर वंशानुगत रक्त विकार से निपटने के लिए व्यापक जागरूकता, समय पर जांच और सामूहिक सामाजिक जिम्मेदारी पर जोर दिया है।

वे रविवार को यहां ‘स्मृतिशेष मधुकरराव तामगाडगे धर्मार्थ न्यास’ द्वारा शैक्षिक छात्रवृत्ति वितरण, सिकल सेल एनीमिया के बारे में जागरूकता और करियर मार्गदर्शन पर केंद्रित एक कार्यक्रम में शामिल हुए थे।

छात्रवृत्ति वितरण कार्यक्रम सिकल सेल एनीमिया को लेकर जनजागरूकता बढ़ाने का एक व्यापक मंच बन गया, जहां वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारियों, स्वास्थ्य विशेषज्ञों और शिक्षाविदों ने इस वंशानुगत रक्त विकार से निपटने के लिए अधिक जागरूकता, समय पर जांच और सामूहिक सामाजिक जिम्मेदारी की जरूरत पर जोर दिया।

इस कार्यक्रम की अध्यक्षता नगालैंड के अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक संदीप तामगाडगे ने की, जो न्यास की शैक्षिक और सिकल सेल पहलों के मुख्य आयोजक हैं। कार्यक्रम में मुंढे और वरिष्ठ आईआरएस अधिकारी उन्मेष वाघ भी शामिल हुए।

न्यास की वेबसाइट पर प्रकाशित ‘सामाजिक प्रभाव रिपोर्ट 2021-2025’ के अनुसार, संस्था ने सिकल सेल बीमारी के लिए 38,000 से ज्यादा लोगों की जांच की है। न्यास सिकल सेल की जांच और दवा वितरण शिविर, रक्तदान अभियान और स्वास्थ्य जागरूकता कार्यक्रम भी आयोजित करता है।

सिकल सेल बीमारी के बारे में चुप्पी तोड़ने पर जोर देते हुए तामगाडगे ने कहा कि यह सिर्फ एक स्वास्थ्य समस्या नहीं, बल्कि एक सामाजिक जिम्मेदारी है। उन्होंने यह भी बताया कि वह खुद सिकल सेल वाहक हैं।

उन्होंने कहा, “वाहक स्थिति को न तो शर्म का कारण माना जाना चाहिए और न ही इसे छिपाने की जरूरत है। जब तक हम सिकल सेल बीमारी के बारे में खुलकर बात नहीं करेंगे, तब तक लोग इसकी गंभीरता को नहीं समझ पाएंगे। मैं स्वयं सिकल सेल का वाहक हूं। मैं एक वरिष्ठ अधिकारी हूं और सामान्य जीवन जी रहा हूं, लेकिन मुझे अपनी वाहक स्थिति के बारे में बात करने में कोई झिझक या शर्म महसूस नहीं होती।”

भाषा प्रशांत दिलीप

दिलीप