मुंबई, दो मई (भाषा) राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के प्रमुख मोहन भगवत ने शनिवार को कहा कि विदेशी आक्रमणों और कठिनाइयों के बावजूद आदिवासी समुदायों तथा अनुसूचित जातियों ने देश की पहचान और आत्मा को सहेजकर रखा।
वह यहां कर्मयोगी पुरस्कार समारोह में बोल रहे थे, जहां केंद्रीय सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी भी उपस्थित थे।
भागवत ने कहा, ‘‘मानव जीवन दुनिया को कुछ वापस देना होता है, क्योंकि हम सभी एक महान परिवार का हिस्सा हैं। एक व्यक्ति समाज की बेहतरी के लिए काम करता है, उपकार के तौर पर नहीं, बल्कि कर्तव्य के रूप में। दूसरों की सेवा करके हम अपना विकास करते हैं। दूसरों को आगे बढ़ने में मदद करके हम स्वयं को उन्नत करते हैं और एक बेहतर इंसान बनते हैं। यह सिद्धांत इस भारतीय भूमि का मूल मूल्य है, जिसे आमतौर पर हिंदू समाज के रूप में जाना जाता है।”
उन्होंने कहा, ‘‘यह समाज का वह चिरस्थायी लोकाचार है, जो हजारों वर्षों से कायम है। विभिन्न कारणों से, आंशिक रूप से हमारी उदासीनता के कारण और आंशिक रूप से विदेशी आक्रमण के कारण, इस लोकाचार को संरक्षित करने वालों को भारी कीमत चुकानी पड़ी।’’
आरएसएस प्रमुख भागवत ने कहा कि विदेशी आक्रमणकारियों ने देखा कि यही लोकाचार, समाज का यही मूल्य इसकी आत्मा है और इसे बनाए रखने की कुंजी है, इसलिए विदेशी आक्रमणकारियों ने इस आत्मा को संरक्षित करने वालों को जड़ से उखाड़ फेंकने का प्रयास किया और इस कारण उन लोगों को घोर कठिनाइयों का सामना करना पड़ा।
उन्होंने कहा कि हालांकि विदेशी आक्रमणों और कठिनाइयों के बावजूद आदिवासी समुदायों और अनुसूचित जातियों ने देश की पहचान और उसकी आत्मा को संरक्षित रखा।
भागवत ने कहा, “इतनी विपरीत परिस्थितियों के बावजूद, आदिवासी समुदायों और अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति समूहों के बीच देश की मूल पहचान बरकरार रही।”
उन्होंने इन समुदायों को मुख्यधारा की विकास प्रक्रिया में एकीकृत करने की आवश्यकता पर बल दिया, साथ ही यह सुनिश्चित करने की बात कही कि उन्हें सेवाओं और सुविधाओं तक समान पहुंच प्राप्त हो।
वैश्विक घटनाक्रमों का उल्लेख करते हुए भागवत ने कहा कि ‘‘जिस तरह से दुनिया इस समय डांवाडोल हो रही है, वैश्विक उथल-पुथल मची है, ऐसे में सुदृढ़ और संबल भारत ही विश्व का आधार बन सकता है।’’
भागवत ने कहा कि देश को न केवल अपने हितों की रक्षा करनी चाहिए बल्कि विश्व को भी समर्थन देना चाहिए। उन्होंने कहा, “विश्व को यह दिखना चाहिए कि देश न केवल अपनी समस्याओं का समाधान कर रहा है, बल्कि विश्व को भी इसी तरह की समस्याओं से निपटने में मदद कर रहा है।’’
आरएसएस प्रमुख ने कहा कि समाज सेवा कोई उपकार नहीं बल्कि एक कर्तव्य है जो स्वयं के विकास में योगदान देता है। उन्होंने कहा कि दूसरों के विकास में मदद करने से व्यक्ति का उत्थान होता है और समाज का ताना-बाना मजबूत होता है।
भागवत ने कहा कि तथाकथित शिक्षित और विकसित वर्ग समय के साथ इन समुदायों से दूर हो गए। उन्होंने इस खाई को पाटने की आवश्यकता पर बल दिया।
उन्होंने कहा कि इन समुदायों द्वारा संरक्षित पहचान भारतीय समाज की सच्ची पहचान का प्रतिनिधित्व करती है और इस बात पर जोर दिया कि पहचान के बिना अस्तित्व ही खतरे में होता है।
भाषा अमित नेत्रपाल
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