1923 के कांग्रेस प्रस्ताव और जनदबाव से हुई थी वीडी सावरकर की रिहाई, दया याचिकाओं से नहीं: प्रपौत्र

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1923 के कांग्रेस प्रस्ताव और जनदबाव से हुई थी वीडी सावरकर की रिहाई, दया याचिकाओं से नहीं: प्रपौत्र

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  • Publish Date - July 2, 2026 / 12:35 AM IST,
    Updated On - July 2, 2026 / 12:35 AM IST

पुणे, एक जुलाई (भाषा) ‘‘हिंदुत्व विचारक वीडी सावरकर को ब्रिटिश सरकार ने उनकी दया याचिकाओं के कारण नहीं, बल्कि बढ़ते जनदबाव के चलते रिहा किया था।’’ सावरकर के भाई के प्रपौत्र सात्यकि सावरकर ने बुधवार को पुणे की एक अदालत में कहा कि 1923 में कांग्रेस के काकीनाडा अधिवेशन में पारित वह प्रस्ताव भी इसका एक प्रमुख कारण था, जिसमें सावरकर की रिहाई की मांग की गई थी।

उन्होंने कहा, “यदि कांग्रेस ने भगत सिंह, राजगुरु और सुखदेव की फांसी से पहले भी ऐसा ही प्रस्ताव पारित किया होता, तो उनकी फांसी टल सकती थी।”

वीडी सावरकर पर की गई टिप्पणियों को लेकर नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी के खिलाफ दायर आपराधिक मानहानि मामले में राहुल गांधी की ओर से पेश अधिवक्ता मिलिंद पवार ने सात्यकि सावरकर से जिरह की।

एमपी/एमएलए विशेष अदालत के न्यायाधीश अमोल शिंदे के समक्ष जिरह के दौरान ब्रिटिश सरकार को कथित तौर पर सावरकर द्वारा दी गई दया याचिकाओं के कुछ अंश शिकायतकर्ता के सामने रखे गए।

सात्यकि ने कहा, “मुझे नहीं पता कि उपरोक्त याचिका की सामग्री सावरकर ने लिखी थी या नहीं। मैं यह नहीं कह सकता कि सावरकर ने अपनी दया याचिका में किसी शर्त पर रिहाई की मांग की थी। मैं यह भी नहीं कह सकता कि सावरकर ने ब्रिटिश सरकार से इस शर्त पर रिहाई मांगी थी कि वह किसी राजनीतिक या क्रांतिकारी आंदोलन में हिस्सा नहीं लेंगे।”

हालांकि, उन्होंने स्वेच्छा से यह जोड़ा कि सावरकर की रिहाई दया याचिकाओं का परिणाम नहीं थी।

भाषा तान्या सुरेश

सुरेश