गोडसे के गोली चलाने के बाद महात्मा गांधी को तत्काल अस्पताल नहीं ले जाया गया: सावरकर के पोते

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गोडसे के गोली चलाने के बाद महात्मा गांधी को तत्काल अस्पताल नहीं ले जाया गया: सावरकर के पोते

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  • Publish Date - August 17, 2026 / 10:48 PM IST,
    Updated On - August 17, 2026 / 10:48 PM IST

पुणे, 17 अगस्त (भाषा) कांग्रेस नेता राहुल गांधी के खिलाफ आपराधिक मानहानि के मामले में अदालत में पेश होते हुए विनायक दामोदर (वी डी) सावरकार के पोते ने दावा किया कि नाथूराम गोडसे द्वारा गोली मारे जाने के बाद महात्मा गांधी 20 मिनट तक उसी जगह पर पड़े रहे और उन्हें कोई अस्पताल नहीं ले गया, जिससे उनके प्रति तत्कालीन सरकार की उदासीनता का पता चलता है।

राहुल गांधी की ओर से पेश वकील मिलिंद पवार ने सोमवार को पुणे की सांसद/विधायक अदालत के विशेष न्यायाधीश अमोल शिंदे के सामने विनायक दामोदर सावरकर के पोते सत्यकी सावरकर से जिरह की।

इस बीच, सत्यकी के वकील संग्राम कोल्हटकर ने अदालत में एक अर्ज़ी दाखिल कर राहुल गांधी के पुणे दौरे (जो 22 अगस्त को तय है) के दौरान उनके आवाज़ के नमूने लेने का अनुरोध किया।

इसके जवाब में, गांधी के वकील ने अदालत को बताया कि वह एक सितंबर को अपना पक्ष रखेंगे।

लोकसभा में विपक्ष के नेता ‘छात्रों की गूंज’ पहल के तहत छात्रों से बातचीत करने के लिए 22 अगस्त को पुणे का दौरा करेंगे।

जिरह के दौरान, सत्यकी ने कहा कि यह सच है कि जब महात्मा गांधी 30 जनवरी, 1948 को बिड़ला हाउस में प्रार्थना सभा के लिए जा रहे थे, तब ‘मेरे चचेरे भाई के दादा नाथूराम गोडसे ने उन्हें गोली मारकर उनकी हत्या कर दी थी।’

इसके बाद उन्होंने अपनी तरफ से एक और बात कही कि गोली लगने के बाद गांधीजी लगभग 20 मिनट तक उसी जगह पर रहे और उन्हें किसी ने पास के अस्पताल नहीं पहुंचाया। उन्होंने कहा, ‘‘यह गांधीजी के प्रति उस समय की सरकार की उदासीनता थी।’’

राहुल गांधी के खिलाफ आपराधिक मानहानि का मामला सत्यकी ने दायर किया था। सत्यकी का आरोप था कि कांग्रेस नेता ने झूठा दावा किया था कि वी.डी. सावरकर ने अपनी एक किताब में लिखा है कि कैसे उन्होंने और उनके दोस्तों ने एक मुस्लिम युवक पर हमला किया था और इस काम से उन्हें मज़ा आया था।

शिकायतकर्ता का कहना है कि सावरकर की रचनाओं में ऐसी किसी घटना का जिक्र नहीं है।

भाषा राजकुमार वैभव

वैभव