नवी मुंबई में आर्द्रभूमि के विषाक्त होने से राजहंसों की संख्या में गिरावट का खतरा

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नवी मुंबई में आर्द्रभूमि के विषाक्त होने से राजहंसों की संख्या में गिरावट का खतरा

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  • Publish Date - March 22, 2026 / 03:55 PM IST,
    Updated On - March 22, 2026 / 03:55 PM IST

मुंबई, 22 मार्च (भाषा) जलवायु कार्यकर्ताओं ने नवी मुंबई में राजहंसों के तीन प्रमुख आवास स्थलों के विषाक्त होने और पानी के नमूनों के परीक्षण से चिंताजनक परिणाम सामने आने के बाद ‘आर्द्रभूमि आपातकाल’ की चेतावनी दी है।

कार्यकर्ताओं ने नेरुल स्थित डीपीएस, एनआरआई और टी एस चाणक्य झीलों की बिगड़ती स्थिति पर चिंता जताई है, जो मान्यता प्राप्त आर्द्रभूमि हैं और यहां राजहंस (फ्लेमिंगो) कुछ महीनों के लिए आते हैं।

नवी मुंबई में राजहंसों का प्रवास नवंबर से मई तक होता है और जनवरी से मार्च तक का समय इन सुंदर पक्षियों को देखने का सबसे अच्छा समय माना जाता है।

पक्षी प्रेमी इस दौरान गुलाबी रंग के राजहंसों की झलक पाने के लिए आर्द्रभूमि स्थलों पर एकत्र होते हैं।

‘नेटकनेक्ट फाउंडेशन’ द्वारा कराए गए जल नमूना परीक्षणों में सामने आया कि जल प्रणाली गंभीर तनाव में है।

कार्यकर्ताओं ने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस को भेजे संदेशों में यह बात कही है।

‘नेटकनेक्ट फाउंडेशन’ के निदेशक बीएन कुमार ने कहा कि इस मौसम में राजहंसों का न आना इस चेतावनी को और भी पुष्ट करता है।

नियमित सफाई के बजाय आर्द्रभूमि स्थिर और प्रदूषित जलकुंडों में तब्दील होती जा रही हैं।

कार्यकर्ता इसके लिए सीधे तौर पर प्रशासन की विफलता को जिम्मेदार ठहराते हैं।

जलवायु कार्यकर्ता नंदकुमार पवार ने कहा कि नगर एवं औद्योगिक विकास निगम (सीआईडीसीओ) ‘‘इस स्थिति के लिए काफी हद तक जिम्मेदार है’’।

उन्होंने कहा कि महाराष्ट्र तटीय क्षेत्र प्रबंधन प्राधिकरण और वन विभाग जैसे नियामक ‘‘पूरी तरह से अनदेखी कर रहे हैं’’।

पवार ने चेतावनी दी कि आर्द्रभूमि एक सार्वजनिक संपत्ति है, जिसे सबके सामने नष्ट किया जा रहा है।

भाषा जितेंद्र नेत्रपाल

नेत्रपाल