पुणे, 18 सितंबर (भाषा) उपराष्ट्रपति सी पी राधाकृष्णन ने शुक्रवार को कहा कि प्रौद्योगिकी संचालित जीवनशैली और आधुनिक जीवन की तेज़ रफ़्तार से होने वाले तनाव के बीच योग संतुलन, जागरूकता और एकाग्रता प्रदान करता है।
राधाकृष्णन ने यहां कैवल्यधाम में ‘गोर्धनदास सेकसरिया कॉलेज ऑफ़ योग एंड कल्चरल सिंथेसिस’ की 75वीं वर्षगांठ के समारोह को संबोधित करते हुए कहा कि योग मन, शरीर और आत्मा के बीच संतुलन बनाने में मदद करता है तथा लोगों को स्वस्थ जीवन जीने में सक्षम बनाता है।
उन्होंने कहा, ‘‘आज की तनावपूर्ण जीवनशैली में, योग व्यक्ति को रुकने, सोचने, अपनी सांस पर ध्यान केंद्रित करने और खुद से फिर से जुड़ने का मौका देता है।’’
उन्होंने कहा कि योग एकाग्रता बढ़ाने और मन एवं शरीर के बीच संतुलन बनाए रखने में मदद करता है।
उपराष्ट्रपति ने कहा कि योग के जरिए अलग-अलग देशों और संस्कृतियों के लोग एक साथ आ रहे हैं।
उन्होंने कहा कि भारत की युवा आबादी देश की एक बड़ी ताकत है तथा अनुशासन एवं जागरूकता के साथ युवाओं की ऊर्जा, कौशल और आकांक्षाओं को और बेहतर ढंग से विकसित किया जा सकता है।
उन्होंने यह भी कहा कि इस प्रक्रिया में योग अहम भूमिका निभा सकता है।
योग शिक्षा, अनुसंधान और संस्कृति में कैवल्यधाम के योगदान का ज़िक्र करते हुए राधाकृष्णन ने कहा कि स्वामी कुवलयानंद ने 1924 में योग के वैज्ञानिक अध्ययन के लिए इस संस्थान की स्थापना की थी, जिससे इसके व्यवस्थित और वैज्ञानिक अन्वेषण की नींव पड़ी।
महाराष्ट्र के राज्यपाल जिष्णु देव वर्मा ने कहा कि जैसे-जैसे दुनिया भर में योग की लोकप्रियता बढ़ रही है, भारत को इसके बुनियादी ज्ञान, वैज्ञानिक आधार और मूल दर्शन के साथ इसके जुड़ाव को बनाए रखना चाहिए।
उन्होंने कहा कि योग शारीरिक फिटनेस, मानसिक संतुलन और समग्र स्वास्थ्य को बढ़ावा दे सकता है।
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राजकुमार दिलीप
दिलीप