‘आपको कष्ट सहना पड़ेगा’, उच्च न्यायालय ने नहीं दी ‘एनालॉग पनीर’ परोसने वाले होटल को राहत
'आपको कष्ट सहना पड़ेगा', उच्च न्यायालय ने नहीं दी 'एनालॉग पनीर' परोसने वाले होटल को राहत
मुंबई, 21 अगस्त (भाषा) मुंबई उच्च न्यायालय ने शुक्रवार को ग्राहकों को प्रतिबंधित ‘एनालॉग पनीर’ परोसने के मामले में महाराष्ट्र खाद्य एवं औषधि प्रशासन (एफडीए) की कार्रवाई का सामना कर रहे ठाणे के एक रेस्तरां को कोई भी अंतरिम राहत देने से इनकार कर दिया। अदालत ने कड़ी टिप्पणी करते हुए कहा कि ग्राहकों को ‘सड़ा हुआ खाना’ खिलाकर परेशान करने वाले रेस्तरां को भी कुछ समय के लिए कष्ट सहना पड़ेगा।
एनालॉग पनीर एक गैर-डेयरी विकल्प है, जिसे दूध के वसा के बजाय वनस्पति तेल, स्टार्च, इमल्सीफायर और अन्य एडिटिव्स का उपयोग करके बनाया जाता है। यह असली पनीर की तुलना में बनाने में काफी सस्ता होता है और इसमें प्रोटीन की मात्रा भी बहुत कम होती है।
कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश रवींद्र घुगे और न्यायमूर्ति गौतम अंखाड की खंडपीठ ने ‘काव्यात्मक न्याय’ (पोएटिक जस्टिस) का उल्लेख करते हुए सख्त टिप्पणी की। पीठ ने ‘जैसी करनी वैसी भरनी’ की तर्ज पर कहा कि ‘उडुपी स्वाद’ रेस्तरां को भी अपने किए का परिणाम भुगतना ही होगा।
सार्वजनिक स्वास्थ्य चिंताओं और खाद्य सुरक्षा नियमों के व्यापक उल्लंघन को देखते हुए महाराष्ट्र सरकार ने इस महीने की शुरुआत में ‘एनालॉग’ या नकली गैर-डेयरी पनीर के निर्माण और बिक्री पर एक साल के लिए प्रतिबंध लगा दिया था।
सरकारी आदेश के अनुसार, यदि असुरक्षित भोजन के सेवन से किसी व्यक्ति की मृत्यु होती है, तो दोषियों को उम्रकैद और कम से कम 10 लाख रुपये के जुर्माने की सजा हो सकती है।
रेस्तरां ने एफडीए के 11 अगस्त के उस आदेश के खिलाफ उच्च न्यायालय में याचिका दायर की थी, जिसके तहत प्रतिबंधित ‘एनालॉग’ पनीर परोसने के कारण उसका लाइसेंस निलंबित कर दिया गया था। याचिका में रेस्तरां ने तर्क दिया कि एफडीए को निलंबन से पहले उन्हें सुधार नोटिस जारी करना चाहिए था।
अदालत, जो अक्सर होटलों के खिलाफ एफडीए की अत्यधिक सख्त कार्रवाई पर सवाल उठाती रही है, उसने शुक्रवार को सख्त रुख अपनाया।
पीठ ने कहा, ‘आपको पहले कष्ट सहना होगा क्योंकि आपने लोगों को यह (एनालॉग पनीर) खिलाकर कष्ट पहुंचाया है। यह काव्यात्मक न्याय है। हम इस बार एक अलग और सख्त रुख अपनाएंगे।’
अदालत ने एफडीए को अपना हलफनामा दाखिल करने का निर्देश दिया और मामले की अगली सुनवाई सात सितंबर तय की।
भाषा सुमित सुरेश
सुरेश

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