युवा हमारी जनसांख्यिकीय शक्ति, सही दिशा मिले तो लाभ होगा: भागवत

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युवा हमारी जनसांख्यिकीय शक्ति, सही दिशा मिले तो लाभ होगा: भागवत

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  • Publish Date - August 15, 2026 / 05:30 PM IST,
    Updated On - August 15, 2026 / 05:30 PM IST

नागपुर, 15 अगस्त (भाषा) राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के प्रमुख मोहन भागवत ने शनिवार को कहा कि युवा देश की जनसांख्यिकीय शक्ति हैं और यदि उनकी क्षमता का सही उपयोग किया जाए तो देश ‘विश्वगुरु’ बनेगा, वरना वे भविष्य में समाज पर बोझ बन सकते हैं।

उन्होंने यह भी जोर दिया कि जब जनहित के मुद्दे उठाए जाते हैं तो विपक्ष और आंदोलन लोकतंत्र का अभिन्न हिस्सा होते हैं। उन्होंने कहा, ‘‘संविधान या देश के कानूनों को नुकसान पहुंचाए बिना संवाद और बहस जारी रहनी चाहिए।’

भागवत ने लोकमत मीडिया समूह की ओर से कस्तूरचंद पार्क में आयोजित एक कार्यक्रम में युवाओं को संबोधित करते हुए कहा कि 30 साल बाद वे भी उम्रदराज हो जाएंगे। उन्होंने युवाओं से कहा कि वे केवल अपने बारे में न सोचें, बल्कि आने वाली पीढ़ियों की जरूरतों के प्रति भी संवेदनशील रहें।

भागवत ने युवाओं से साहसी बनने और आत्मविश्वास के साथ भविष्य का सामना करने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि युवाओं को अपना भविष्य और देश की दिशा तय करने के लिए काम करना चाहिए।

भागवत ने कस्तूरचंद पार्क में लोकमत मीडिया समूह और नगर निगम के सहयोग से स्थापित 200 फुट ऊंचे राष्ट्रीय ध्वज को फहराया।

उन्होंने कहा, ‘‘युवा हमारी जनसांख्यिकीय शक्ति हैं। यदि उनका सही ढंग से मार्गदर्शन किया जाए हमें इससे बहुत लाभ मिलेगा। अगर हम उनका उचित इस्तेमाल करते हैं तो देश ‘विश्वगुरु’ बनेगा। लेकिन अगर हम ऐसा करने में विफल रहे तो बाद में यह एक बड़ा बोझ बन जाएगा, क्योंकि यही युवा पीढ़ी 30 साल बाद बुजुर्ग पीढ़ी बन जाएगी।’’

उन्होंने कहा, ‘‘युवा ही कमाने वाले होंगे। रोजगार का मतलब केवल नौकरी नहीं है, बल्कि मेहनत-मजदूरी करने वाले लोग भी इसमें शामिल हैं तथा उनकी मेहनत का सम्मान किया जाना चाहिए।’’

भागवत ने कहा कि भारत अपनी आजादी के 80वें वर्ष में प्रवेश कर रहा है, जो देश को स्वतंत्र कराने के लिए संघर्ष करने वालों के बलिदान से संभव हुआ। उन्होंने कहा कि अब युवा पीढ़ी को देश के भविष्य के बारे में सोचना चाहिए।

भागवत ने कहा कि भारत एक विशाल देश है, जहां भाषा, क्षेत्र, जाति और विचारों की विविधता देखने को मिलती है।

राष्ट्रीय ध्वज पर बने धर्म चक्र का उल्लेख करते हुए भागवत ने युवाओं से इसके अर्थ पर विचार करने को कहा। उन्होंने कहा कि इसकी तीलियां अलग-अलग दिशाओं में होती हैं और यदि उन्हें खुला छोड़ दिया जाए तो वे नुकसान पहुंचा सकती हैं। फिर भी, सभी तीलियां एक ही केंद्र से निकलती हैं।

उन्होंने कहा, ‘‘अलग-अलग ताक़त के साथ अलग-अलग दिशाओं में जाने वाली तीलियां एक ही केंद्र से निकलती हैं, और ऐसा करते समय उनसे कोई नुकसान नहीं होना चाहिए।’’

धर्म चक्र का उदाहरण देते हुए भागवत ने कहा, ‘‘देश के कानूनों और संविधान को नुकसान नहीं पहुंचना चाहिए। हमारी प्राचीन और पवित्र संस्कृति को नुकसान नहीं पहुंचना चाहिए। हमारे अच्छे संस्कारों और परंपराओं को नुकसान नहीं पहुंचना चाहिए। हमारी नैतिक शक्ति को भी नुकसान नहीं पहुंचना चाहिए।’’

उन्होंने कहा कि तीलियों को घेरने वाला वृत्त संयम का प्रतीक है और यह सुनिश्चित करता है कि मतभेद एक निश्चित सीमा के भीतर रहें।

आरएसएस प्रमुख ने कहा, ‘‘इसीलिए इसे धर्म चक्र कहा जाता है। धर्म का अर्थ केवल पूजा-पाठ और अनुष्ठान नहीं है। धर्म का अर्थ उन नियमों से है जो समाज के आचरण को दिशा देते हैं और हमें उन्हीं नियमों के दायरे में रहकर सभी कार्य करने चाहिए।’’

भागवत ने कहा कि अलग-अलग विचार और उन्हें व्यक्त करने के अलग-अलग तरीके हमेशा मौजूद रहेंगे। उन्होंने कहा, ‘‘यह लोकतंत्र है, इसलिए इसमें संवाद होता है, बहस होती है और समर्थन तथा विरोध करने वाले पक्ष भी होते हैं। इसमें एक-दूसरे के विपरीत विचार भी होंगे।’’

उन्होंने जोर दिया कि जब जनहित के मुद्दे उठाए जाते हैं तो विपक्ष और आंदोलन लोकतंत्र का अभिन्न हिस्सा होते हैं।

भागवत ने कहा, ‘‘विरोध होना चाहिए। जब जनहित से जुड़े मुद्दे उठाए जाते हैं तो उन्हें मजबूती से उठाया जाना चाहिए। उन पर काम होना चाहिए और इसके लिए प्रयास किए जाने चाहिए। आंदोलन होते हैं, ये सब लोकतंत्र का हिस्सा है।’’

हालांकि, उन्होंने कहा कि ऐसे मतभेद संविधान या देश की एकता को कमजोर नहीं करने चाहिए। संविधान पर डॉ. बी. आर. आंबेडकर के भाषणों का उल्लेख करते हुए भागवत ने कहा कि संविधान निर्माताओं द्वारा तय किए गए सिद्धांतों को देश का मार्गदर्शन करते रहना चाहिए।

उन्होंने लोगों से मतभेदों के बावजूद मिलकर राष्ट्र निर्माण के लिए काम करने का आह्वान किया। आरएसएस प्रमुख ने कहा, ‘‘हमें मिलकर आगे बढ़ना चाहिए। हमें कभी विभाजित नहीं होना चाहिए। हमारे बीच कोई आंतरिक विवाद नहीं होना चाहिए।’’

राष्ट्रीय ध्वज के रंगों का उल्लेख करते हुए भागवत ने कहा कि भगवा, सफेद और हरा रंग ऐसे महत्वपूर्ण मूल्यों का प्रतिनिधित्व करते हैं, जिन्हें नागरिकों को अपने जीवन में अपनाना चाहिए। उन्होंने कहा कि धर्म चक्र का संदेश यह है कि भारत की विविधता के बावजूद लोगों को मिलकर आगे बढ़ते रहना चाहिए।

उन्होंने कहा, ‘‘अगर हम साथ मिलकर आगे बढ़ेंगे तो हमारे विशाल देश की महान गरिमा ऊंची हवाओं में स्वतंत्र रूप से लहरा सकेगी और पूरी दुनिया में अपना प्रकाश फैला सकेगी। हमें यही करना है। उसी भविष्य में मेरा और मेरे परिवार का भविष्य भी निहित है। उस भविष्य के लिए मैं काम करूंगा, ताकि देश और मेरा परिवार दोनों सुरक्षित और समृद्ध रहें।’’

कार्यक्रम में विशाल तिरंगा फहराने के लिए किए गए प्रयासों का उदाहरण देते हुए भागवत ने कहा कि लोगों को इस बात पर विचार करना चाहिए कि राष्ट्रीय ध्वज क्या दर्शाता है। उन्होंने युवाओं से भारत की तुलना अन्य देशों से नहीं करने की भी अपील की।

उन्होंने कहा, ‘‘हम अमेरिका, चीन, ऑस्ट्रेलिया या न्यूजीलैंड नहीं हैं। हम भारत हैं।’’ उन्होंने कहा कि देश का विकास मॉडल भारत की अपनी जरूरतों, गरिमा और ताकत के अनुरूप तैयार किया जाना चाहिए।

भागवत ने कहा कि दुनिया का बाकी हिस्सा अक्सर मुख्य रूप से भौतिक प्रगति पर ध्यान केंद्रित करता है, जबकि भारत ने परंपरागत रूप से विकास को व्यापक दृष्टिकोण से देखा है।

भागवत ने कहा, ‘‘दुनिया अपने अधूरे नजरिये के कारण लड़खड़ा रही है। भारत का हिस्सा होने के नाते हमारा दायित्व है कि हम अपने नजरिये से दुनिया को भविष्य का रास्ता दिखाएं और उसमें संतुलन लाएं। हमें इसके लिए खुद को तैयार करना होगा।’’

उन्होंने उद्यमिता को बढ़ावा देने की जरूरत पर भी जोर देते हुए कहा कि युवाओं को साहस के साथ चुनौतियों का सामना करना होगा तथा सफलता हासिल करने के लिए प्रयास करने होंगे।

भागवत ने कहा कि भारत की बड़ी आबादी और तुलनात्मक रूप से कम भौगोलिक क्षेत्रफल के कारण वह कनाडा, अमेरिका और चीन जैसे देशों द्वारा अपनाए गए रास्ते को सीधे नहीं अपना सकता।

उन्होंने कहा, ‘‘जिन देशों की आबादी कम है, जिनका भौगोलिक क्षेत्र बहुत बड़ा है या जिनके पास प्रचुर संसाधन हैं, उनके लिए केवल रोजगार के बारे में सोचना पर्याप्त हो सकता है। लेकिन भारत जैसे देश की आबादी बहुत बड़ी है और उसका भौगोलिक क्षेत्र कनाडा, अमेरिका तथा चीन की तुलना में छोटा है।’’

आरएसएस प्रमुख ने कहा, ‘‘इसलिए हमें अपनी समस्याओं के लिए पूरी तरह अलग सोच विकसित करने की जरूरत है। इसके लिए हमें इन विषयों का गहराई से अध्ययन करना होगा।’’

भागवत ने युवाओं से अपने साहस को बनाए रखने और व्यक्तिगत या पारिवारिक भविष्य की चिंताओं को उसे कमजोर नहीं करने देने की अपील की।

उन्होंने कहा कि जिस साहस को कुछ लोग लापरवाही समझ सकते हैं, वही युवाओं के काम, पारिवारिक जिम्मेदारियों और देश सेवा में उनकी मदद कर सकता है।

भागवत ने कहा, ‘‘हमें इसी साहस के साथ अपने सामने आने वाले भविष्य का सामना करना चाहिए। हमें उसका डटकर मुकाबला करना चाहिए। हम अपना भाग्य खुद बनाएंगे और अपने देश का भविष्य भी तय करेंगे।’’

उन्होंने कहा कि किसी व्यक्ति या परिवार का भाग्य समाज और राष्ट्र के भाग्य से अलग नहीं हो सकता। उन्होंने कहा, ‘‘किसी एक परिवार का भविष्य भी इससे अलग नहीं है। अगर हम दुनिया में सुरक्षा और सम्मान चाहते हैं तो यह तब तक नहीं मिलेगा, जब तक हमारा देश और समाज सुरक्षित और सम्मानित नहीं होगा।’’

भागवत ने कहा कि दुनिया का अधिकांश हिस्सा भौतिकवादी दृष्टिकोण से सोचता है, जबकि भारत का नजरिया केवल धन कमाने तक सीमित नहीं है।

उन्होंने कहा, ‘‘भारत में हम केवल पैसा कमाने के बारे में नहीं सोचते। लोग कहते हैं कि पैसा तो मुर्गी भी नहीं खाएगी। हमारा नजरिया ऐसा ही है।’’

इस अवसर पर लोकमत मीडिया समूह के संपादकीय बोर्ड के अध्यक्ष और पूर्व राज्यसभा सदस्य विजय दर्डा ने भागवत की सराहना करते हुए कहा कि उन्होंने संतुलित विचार रखने वाले लोगों को अपने साथ जोड़ने का प्रयास किया है।

भाषा आशीष माधव

माधव