नागपुर, 16 अगस्त (भाषा) महाराष्ट्र में कांग्रेस नेता विजय वडेट्टीवार ने रविवार को दावा किया कि यदि केंद्र सरकार जनगणना के प्रश्नावली में अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) के लिए अलग से एक कॉलम शामिल नहीं करती है, तो जनगणना अधूरी रहेगी।
वडेट्टीवार ने यहां संवाददाताओं से कहा कि केवल जाति के बारे में पूछे जाने से ओबीसी की वास्तविक संख्या का पता नहीं चलेगा। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि सही आंकड़े जुटाने के लिए सरकार पर लगातार दबाव बनाए रखने की जरूरत है।
शुक्रवार को केंद्र सरकार ने जनगणना के दौरान लोगों से पूछे जाने वाले 40 सवालों को अधिसूचित किया। एक सरकारी आदेश के अनुसार, इनमें जाति और कोविड-19 टीकाकरण का स्थान भी शामिल है। बर्फ से ढके रहने वाले क्षेत्रों में जनगणना का चरण एक सितंबर से शुरू होगा। देश के बाकी हिस्सों में जनसंख्या गणना अगले वर्ष शुरू होगी। यह पहली बार होगा जब जनगणना के दौरान जाति से संबंधित जानकारी भी जुटाई जाएगी।
जारी आदेश के मुताबिक, जनगणना के दौरान पूछा जाएगा कि व्यक्ति अनुसूचित जाति या अनुसूचित जनजाति से संबंधित है या नहीं और उसकी जाति क्या है।
राष्ट्रीय ओबीसी महासंघ के अध्यक्ष बाबन तयवाड़े के इस बयान का जिक्र करते हुए कि अन्य पिछड़ा वर्ग ने अपनी आधी लड़ाई जीत ली है, वडेट्टीवार ने कहा कि ओबीसी समुदाय के अधिकारों और सामाजिक न्याय के लिए जाति आधारित जनगणना बेहद महत्वपूर्ण है।
कांग्रेस नेता ने दावा किया, ‘‘हालांकि, यदि केंद्र सरकार की ओर से जारी जनगणना प्रश्नावली में ओबीसी के लिए अलग से कोई कॉलम नहीं है, तो यह जनगणना अधूरी रहेगी।’’
उन्होंने कहा कि केवल जाति के बारे में पूछने से ओबीसी की वास्तविक संख्या का पता नहीं चलेगा, इसलिए यह कहना सही नहीं है कि ओबीसी ने अपनी लड़ाई जीत ली है।
भाषा शफीक अमित
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