(Chandra Grahan 2026/ Image Credit: AI-generated)
Chandra Grahan 2026: साल 2026 का अंतिम चंद्र ग्रहण 28 अगस्त को लगेगा। ज्योतिषीय और पौराणिक मान्यताओं के अनुसार ग्रहण (Chandra Grahan 2026) का समय संवेदनशील माना जाता है। इस बार ग्रहण के दौरान चंद्रमा कुंभ राशि में और राहु के शतभिषा नक्षत्र में रहेंगे। ज्योतिष के अनुसार शनि और राहु के प्रभाव के कारण इसकर असर कुछ राशियों पर अधिक पड़ सकता है।
ज्योतिषाचार्यों के मुताबिक, ग्रहण के समय चंद्रमा शनि की राशि कुंभ में रहेंगे। साथ ही वह राहु के शतभिषा नक्षत्र में होंगे। मान्यता है कि शनि और राहु का प्रभाव चंद्रमा की स्थिति को कमजोर कर सकता है। इसका असर लोगों के मानसिक तनाव, पारिवारिक जीवन और दूसरे क्षेत्रों पर पड़ सकता है।
ज्योतिषीय मान्यताओं के अनुसार इस अवधि (Chandra Grahan 2026) में मानसिक तनाव, बेचैनी और नकारात्मक विचार बढ़ सकते हैं। परिवार में गलतफहमी और विवाद की स्थिति बन सकती है। स्वास्थ्य को लेकर भी सावधानी बरतने की सलाह दी जाती है। वहीं भूमि, मकान और वाहन से जुड़े मामलों में भी लोगों को सतर्क रहने की बात कही गई है।
कर्क राशि के जातकों के लिए यह समय स्वास्थ्य और आर्थिक मामलों में सावधानी वाला बताया गया है। सिरदर्द, आंखों से जुड़ी परेशानी या ब्लड प्रेशर जैसी समस्या को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। निवेश और बड़े आर्थिक लेन-देन में जल्दबाजी से बचना बेहतर रहेगा। नकारात्मक लोगों और गलत संगति से दूरी बनाए रखें।
सिंह राशि वालों के खर्च बढ़ सकते हैं और काम का दबाव मानसिक तनाव दे सकता है। वाणी पर नियंत्रण रखना जरूरी होगा, क्योंकि छोटी बात विवाद का कारण बन सकती है। वहीं, वृश्चिक राशि वालों को स्वास्थ्य और पैसों से जुड़े मामलों में सतर्क रहना चाहिए। जीवनसाथी या बच्चों को लेकर चिंता हो सकती है।
मीन राशि वालों के लिए भी ग्रहण का समय (Chandra Grahan 2026) सावधानी वाला बताया गया है। इस दौरान बड़े फैसले लेने से बचने की सलाह दी जाती है। निवेश या पैसों के लेन-देन में नुकसान की आशंका बताई गई है। कार्यक्षेत्र में रुकावटें आ सकती हैं। इसलिए धैर्य रखें और विवादों से दूरी बनाकर चलें।
ग्रहण 28 अगस्त को सुबह 6:53 बजे से दोपहर 12:31 बजे तक रहेगा और इसकी कुल अवधि करीब 5 घंटे 39 मिनट बताई गई है। पौराणिक मान्यता में राहु-केतु को चंद्र ग्रहण से जोड़ा जाता है। हालांकि यह ग्रहण भारत में दिखाई नहीं देगा। इसलिए भारत में इसका सूतक काल मान्य नहीं होगा और धार्मिक प्रभाव भी नहीं माना जाएगा।