Holika Dahan Rituals: पुराने सामान और उपलों का होलिका में अर्पण… क्या मिलता है इस परंपरा से? वजह जानकर आप भी रह जाएंगे हैरान!

Holika Dahan Rituals:होलिका दहन में घर के पुराने सामान और गोबर के उपले अर्पित किए जाते हैं। ऐसा माना जाता है कि आग में इन चीज़ों को जलाने से नकारात्मकता और बुरी ऊर्जा समाप्त होती है। यह परंपरा शुद्धिकरण और नए शुभ आरंभ का प्रतीक मानी जाती है।

Holika Dahan Rituals: पुराने सामान और उपलों का होलिका में अर्पण… क्या मिलता है इस परंपरा से? वजह जानकर आप भी रह जाएंगे हैरान!

(Holika Dahan Rituals/ Image Credit: IBC24 News)

Modified Date: February 23, 2026 / 11:30 am IST
Published Date: February 23, 2026 11:29 am IST
HIGHLIGHTS
  • होलिका दहन फाल्गुन मास की पूर्णिमा को मनाया जाता है
  • आग में पुराने सामान और गोबर के उपले अर्पित किए जाते हैं
  • नकारात्मकता, रोग और क्लेश दूर करने की मान्यता

Holika Dahan Rituals: हर साल फाल्गुन मास की पूर्णिमा तिथि को होलिका दहन का त्योहार बड़े उत्साह और श्रद्धा के साथ मनाया जाता है। यह त्योहार बुराई पर अच्छाई की जीत का प्रतीक माना जाता है। होलिका दहन के अगले दिन रंगों से होली का पर्व भी मनाया जाता है। इस साल होलिका दहन 03 मार्च को मनाया जाएगा। यह पर्व सिर्फ एक परंपरा नहीं, बल्कि लोगों की आस्था और विश्वास से जुड़ा महत्वपूर्ण पर्व है।

होलिका दहन में क्या खास होता है?

होलिका दहन के दौरान लकड़ियों और गोबर के उपलों को आग में अर्पित किया जाता है। जब आग जलती है, तो ऐसा प्रतीत होता है जैसे सारी नकारात्मकता और बुरी ऊर्जा समाप्त हो रही हो। पुराने सामान को भी आग में डालकर नकारात्मक प्रभाव और रोगों से मुक्ति पाने की मान्यता है। लोग मानते हैं कि यह मानसिक शुद्धि और घर-परिवार की सुरक्षा का प्रतीक है।

पुराने सामान और उपलों का महत्व

मान्यता है कि होलिका की आग में घर के पुराने सामान और गोबर के उपले अर्पित करने से क्लेश, बीमारी और दरिद्रता दूर होती है। यह परंपरा घर में सुख-समृद्धि और सकारात्मक ऊर्जा लाने के लिए निभाई जाती है। विशेष रूप से गाय के गोबर को पवित्र माना गया है और इसे आग में डालने से वातावरण शुद्ध होता है और कीटाणु नष्ट होते हैं।

वैज्ञानिक और धार्मिक कारण

होलिका में गोबर के उपले जलाने के पीछे सिर्फ धार्मिक ही नहीं, बल्कि वैज्ञानिक कारण भी बताए जाते हैं। उपलों से निकलने वाला धुआं वातावरण को शुद्ध करता है और हानिकारक जीवाणुओं को नष्ट करता है। इसी कारण से यज्ञ और हवन में भी गाय के गोबर का उपयोग किया जाता है। यह परंपरा सदियों से हमारे समाज में चलती आ रही है।

परंपरा का पालन और सकारात्मक प्रभाव

होलिका दहन में गाय के उपले और पुराने सामान अर्पित करने से घर-परिवार की बाधाएं दूर होती हैं। इससे सुख-समृद्धि बढ़ती है और सकारात्मक ऊर्जा का प्रवाह होता है। यही वजह है कि आज भी लोग इस परंपरा का पालन बड़े श्रद्धा और विश्वास के साथ करते हैं। होलिका दहन न केवल धार्मिक उत्सव है, बल्कि मानसिक और सामाजिक शुद्धिकरण का भी प्रतीक है।

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लेखक के बारे में

मैं 2018 से पत्रकारिता में सक्रिय हूँ। हिंदी साहित्य में मास्टर डिग्री के साथ, मैंने सरकारी विभागों में काम करने का भी अनुभव प्राप्त किया है, जिसमें एक साल के लिए कमिश्नर कार्यालय में कार्य शामिल है। पिछले 7 वर्षों से मैं लगातार एंटरटेनमेंट, टेक्नोलॉजी, बिजनेस और करियर बीट में लेखन और रिपोर्टिंग कर रहा हूँ।