Janmashtami 2026: 4 सितंबर या 5 सितंबर… आखिर कब है जन्माष्टमी? तारीख के फेर में न पड़ें! इस खास नियम से तय होगा व्रत और पूजा का सही दिन

Janmashtami 2026: इस साल 2026 में जन्माष्टमी 4 सितंबर को मनाई जाएगी। भगवान श्रीकृष्ण का जन्मोत्सव अष्टमी तिथि, रोहिणी नक्षत्र और आधी रात के समय को देखकर तय किया जाता है। इस बार पंचांग के अनुसार ये संयोग 4 सितंबर को बन रहा है। इसलिए इसी दिन व्रत और पूजा करना शुभ माना जाएगा।

Janmashtami 2026: 4 सितंबर या 5 सितंबर… आखिर कब है जन्माष्टमी? तारीख के फेर में न पड़ें! इस खास नियम से तय होगा व्रत और पूजा का सही दिन

(Janmashtami 2026/ Image Credit: AI-generated)

Modified Date: September 1, 2026 / 11:54 am IST
Published Date: September 1, 2026 11:44 am IST
HIGHLIGHTS
  • 4 सितंबर को मनाई जाएगी जन्माष्टमी
  • अष्टमी तिथि से तय होगी पर्व की तारीख
  • रोहिणी नक्षत्र का भी खास महत्व

Janmashtami 2026: इस बार भी श्रीकृष्ण जन्माष्टमी की तारीख को लेकर लोगों के बीच असमंजस है कि व्रत 4 सितंबर को रखा जाए या 5 सितंबर को। दरअसल, जन्माष्टमी की तारीख (Janmashtami 2026) केवल कैलेंडर देखकर तय नहीं होती। इसके लिए भाद्रपद कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि, आधी रात का निशीथ काल और रोहिणी नक्षत्र देखा जाता है। इसी वजह से अलग-अलग परंपराओं में तारीख को लेकर थोड़ा अंतर नजर आ सकता है।

अष्टमी तिथि और रोहिणी नक्षत्र कब?

पंचांग के अनुसार 2026 में अष्टमी तिथि 4 सितंबर को सुबह करीब 2:25 बजे शुरू होगी और 5 सितंबर की रात 12:13 बजे तक रहेगी। वहीं रोहिणी नक्षत्र 4 सितंबर को रात 11:04 बजे तक रहेगा। चूंकि श्रीकृष्ण का जन्म (Janmashtami 2026) रोहिणी नक्षत्र में हुआ माना जाता है, इसलिए जन्माष्टमी तय करते समय इस नक्षत्र को भी खास महत्व दिया जाता है।

निशीथ काल में होगा कान्हा का जन्मोत्सव

जन्माष्टमी पर श्रीकृष्ण जन्मोत्सव रात के निशीथ काल में मनाया जाता है। 2026 में निशीथ पूजा का समय करीब रात 11:57 बजे से 12:43 बजे तक बताया गया है। धार्मिक मान्यता के अनुसार इसी मध्यरात्रि में भगवान श्रीकृष्ण ने मथुरा की जेल में देवकी और वसुदेव के घर जन्म लिया था। बाद में वसुदेव उन्हें यमुना पार कर गोकुल ले गए, जहां नंद और यशोदा ने उनका पालन-पोषण किया।

जन्माष्टमी की तारीख तय करने का नियम

जन्माष्टमी की तारीख तय (Janmashtami 2026) करने में सबसे महत्वपूर्ण बात यह देखी जाती है कि निशीथ काल के दौरान अष्टमी तिथि मौजूद है या नहीं। इसके बाद रोहिणी नक्षत्र और अन्य तिथि संयोगों पर विचार किया जाता है। इसी आधार पर इस साल जन्माष्टमी का मुख्य पर्व 4 सितंबर को माना जा रहा है।

व्रत कब रखें और पारण कब करें?

जन्माष्टमी का व्रत आमतौर पर सूर्योदय से शुरू करके अगले दिन सूर्योदय के बाद खोला जाता है। व्रत में अन्न का सेवन नहीं करने की परंपरा है। धर्मशास्त्र के अनुसार 2026 में पारण का समय 5 सितंबर सुबह 6:01 बजे बताया गया है। हालांकि कई स्थानों पर लोग आधी रात की पूजा के बाद यानी करीब 12:43 बजे भी पारण करते हैं।

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लेखक के बारे में

मैं 2018 से पत्रकारिता में सक्रिय हूँ। हिंदी साहित्य में मास्टर डिग्री के साथ, मैंने सरकारी विभागों में काम करने का भी अनुभव प्राप्त किया है, जिसमें एक साल के लिए कमिश्नर कार्यालय में कार्य शामिल है। पिछले 7 वर्षों से मैं लगातार एंटरटेनमेंट, टेक्नोलॉजी, बिजनेस और करियर बीट में लेखन और रिपोर्टिंग कर रहा हूँ।