Laxmi Jayanti 2026: लक्ष्मी जयंती पर चंद्र ग्रहण का साया! क्या ग्रहण की घड़ी में करें पूजा या टाल दें? जानें धन की देवी को प्रसन्न करने का तरीका
Laxmi Jayanti 2026: हिंदू धर्म में धन, वैभव और समृद्धि की अधिष्ठात्री देवी मां लक्ष्मी का जन्मोत्सव लक्ष्मी जयंती के रूप में श्रद्धा और उत्साह के साथ मनाया जाता है। पौराणिक मान्यताओं के अनुसार फाल्गुन मास की पूर्णिमा तिथि के दिन समुद्र मंथन के दौरान मां लक्ष्मी का प्राकट्य हुआ था।
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- चंद्र ग्रहण के साये में जयंती
- पूर्णिमा तिथि शाम 5:07 तक
- दान-पुण्य और दीपदान का महत्व
Laxmi Jayanti 2026: नई दिल्ली: हिंदू धर्म में धन, वैभव और समृद्धि की अधिष्ठात्री देवी मां लक्ष्मी का जन्मोत्सव लक्ष्मी जयंती के रूप में श्रद्धा और उत्साह के साथ मनाया जाता है। पौराणिक मान्यताओं के अनुसार फाल्गुन मास की पूर्णिमा तिथि के दिन समुद्र मंथन के दौरान मां लक्ष्मी का प्राकट्य हुआ था। यही कारण है कि फाल्गुन पूर्णिमा को विशेष रूप से लक्ष्मी आराधना के लिए शुभ माना जाता है। वर्ष 2026 में यह पर्व और भी खास हो गया है, क्योंकि इसी दिन चंद्र ग्रहण का साया भी रहेगा, जिससे पूजा-विधि और समय को लेकर श्रद्धालुओं में विशेष उत्सुकता बनी हुई है।
Laxmi Jayanti: तिथि और शुभ समय
साल 2026 में फाल्गुन पूर्णिमा तिथि की शुरुआत 2 मार्च को शाम 05 बजकर 55 मिनट पर हो चुकी है और यह 3 मार्च को शाम 05 बजकर 07 मिनट तक रहेगी। उदयातिथि और शास्त्रीय मान्यताओं के अनुसार लक्ष्मी जयंती का पर्व 3 मार्च 2026, मंगलवार को मनाया जाएगा। पूर्णिमा तिथि में किया गया दान-पुण्य, दीपदान और मां लक्ष्मी का पूजन विशेष फलदायी माना जाता है। धार्मिक विश्वास है कि इस दिन विधि-विधान से पूजा करने पर घर में सुख-समृद्धि और धन-धान्य की कभी कमी नहीं होती।
Laxmi Jayanti 2026: चंद्र ग्रहण का साया और उसका प्रभाव
इस बार 3 मार्च को चंद्र ग्रहण भी लग रहा है, जिससे पर्व का महत्व और बढ़ गया है। ज्योतिष शास्त्र के अनुसार ग्रहण लगने से कुछ समय पहले सूतक काल शुरू हो जाता है। सूतक काल में मंदिरों के कपाट बंद कर दिए जाते हैं और प्रत्यक्ष पूजा-अर्चना वर्जित मानी जाती है। इसलिए श्रद्धालुओं को लक्ष्मी पूजन और अन्य धार्मिक अनुष्ठानों के समय विशेष सावधानी बरतनी होगी।
ग्रहण समाप्त होने के बाद स्नान और शुद्धिकरण कर पूजा करना श्रेष्ठ माना गया है। विद्वानों का मानना है कि ग्रहण काल में मानसिक जाप और ध्यान अधिक फलदायी होता है। ऐसे में यदि कोई विशेष अनुष्ठान करना चाहता है, तो उसे ग्रहण के नियमों का पालन अवश्य करना चाहिए।
कैसे करें मां लक्ष्मी को प्रसन्न?
लक्ष्मी जयंती के दिन प्रातःकाल स्नान कर व्रत का संकल्प लें। पूजा स्थल को स्वच्छ कर मां लक्ष्मी की प्रतिमा या चित्र स्थापित करें। उन्हें गुलाबी कमल के फूल अर्पित करना अत्यंत शुभ माना जाता है। मां को खीर का भोग लगाना विशेष फलदायी होता है, क्योंकि सफेद मिठाइयां और खीर उन्हें प्रिय मानी जाती हैं।
शाम के समय घर के मुख्य द्वार पर घी का दीपक जलाना शुभ संकेत माना जाता है। इससे मां लक्ष्मी के घर में प्रवेश का मार्ग प्रशस्त होता है। चूंकि इस बार ग्रहण का प्रभाव है, इसलिए ग्रहण काल के दौरान मानसिक रूप से “ॐ श्रीं ह्रीं श्रीं कमले कमलालये प्रसीद प्रसीद” मंत्र का जाप करना अधिक लाभकारी रहेगा।
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