Patal Bhuvaneshwar Cave: यहाँ आज भी सुरक्षित है भगवान श्री गणेश का कटा हुआ असली सिर! जानें उस रहस्यमयी गुफा का सच, जहां हैं सृष्टि के अंत का लाइव संकेत

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Patal Bhuvneshwar Cave: क्या आप जानते हैं कि भारत में एक ऐसी चमत्कारी गुफा है जहाँ श्री गणेश कर कटा हुआ असली सिर आज भी सुरक्षित है? स्कंद पुराण के अनुसार, गुफा में मौजूद कलयुग का स्तम्भ लगातार बढ़ रहा है जिस दिन यह गुफा की छत से टकराएगा, उसी दिन आएगा महा-प्रलय।

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  • Publish Date - August 6, 2026 / 04:41 PM IST,
    Updated On - August 6, 2026 / 04:46 PM IST

Patal Bhuvaneshwar Gufa/Image Credit: ScreenGrab / AI Generated / @Grok

HIGHLIGHTS
  • ऐसी रहस्यमयी गुफा जहां पत्थरों पर लिखा है सृष्टि के विनाश का रहस्य!
  • इसी गुफा में कट के गिरा था, श्री गणेश का असली सिर!

Patal Bhuvaneshwar Cave: आपने कलयुग के बारे में कई बातें सुनी होंगी। लेकिन क्या आप जानते हैं कि उत्तराखंड के कमाऊ क्षेत्र में, गंगोलीहाट कसबे से लगभग 14 किलोमीटर दूर एक छोटी सी पहाड़ी पर पाताल भुवनेश्वर गुफा है? माना जाता है कि यहाँ कलियुग का अंत तथा महाप्रलय का राज छिपा है। स्कंदपुराण के मानस खंड में इस गुफा का विस्तार से वर्णन मिलता है। आइये, पाताल भुवनेश्वर गुफा का रहस्य एवं पौराणिक मान्यताओं को विस्तार से जानते हैं..

Patal Bhuvaneshwar Mandir: “देवताओं का भूमिगत नगर”!

पाताल भुवनेश्वर गुफा एक ऐसा रहस्यमयी स्थान है, जहाँ पौराणिक मान्यताओं के अनुसार भगवान शिव स्वयं निवास करते हैं। यहाँ भोलेनाथ के साथ सभी तैंतीस कोटि यानी (33 प्रकार के) देवी-देवता भी विराजमान है। इसे “पाताल लोक का द्वार” या “देवताओं का भूमिगत नगर” भी कहा जाता है। माना जाता है कि यहाँ दर्शन करने मात्र से काशी, केदारनाथ और बैद्यनाथ की तपस्या से हज़ार गुना अधिक पुण्य मिलता है। चूना पत्थर से बनी यह प्राकृतिक गुफा लगभग 160 मीटर लम्बी और 90 फीट गहरी है।

गुफा के अंदर जाने के लिए लगभग 80 से 100 सीढ़ियाँ उतरनी पड़ती हैं। रास्ता संकरा और फिसलन भरा है। लोहे की जंजीर पकड़कर धीरे-धीरे नीचे उतरना पड़ता है। यह यात्रा करना ऐसा प्रतीत होता है मानों जैसे मनुष्य अपने अंदर के अन्धकार से गुज़रकर प्रकाश की ओर बढ़ रहा हो..

अयोध्या के शासक ने की इस गुफा की खोज!

पौराणिक कथाओं के अनुसार, त्रेता युग में अयोध्या के शासक सूर्यवंशी राजा ऋतुपर्ण ने सबसे पहले इस गुफा की खोज की थी। एक बार वे जंगल में एक हिरन का पीछा करते हुए रास्ता भटक गए और थककर एक पेड़ के नीचे सो गए। सपने में उसी हिरन ने उन्हें इस गुफा का रास्ता दिखाया। जब राजा की आँख खुली, तो वे गुफा के पास पहुंचें। द्वारपाल की अनुमति लेकर वे जैसे ही अंदर गए, उन्हें साक्षात शेषनाग मिले।

शेषनाग ने राजा को अपने फन पर बिठाकर पूरी गुफा की सैर कराई, जहां राजा ऋतुपर्ण ने भगवान शिव सहित तैंतीस कोटि देवी-देवताओं के साक्षात दर्शन किए। इसके बाद यह गुफा बंद हो गई। स्कंदपुराण के अनुसार, यह गुफा कलियुग में दोबारा खुलनी थी।

Patal Bhuvaneshwar Temple: इसी स्थान पर गिरा था गणेश जी का कटा हुआ असली सिर!

पाताल भुवनेश्वर गुफा के अंदर कई हैरान कर देने वाली आकृतियाँ बनी हैं। इसका प्रवेश द्वार बिलकुल शेषनाग के मुख जैसा दिखता है। अंदर जाने पर शेषनाग की पसलियां और फन साफ नज़र आते हैं। थोड़ा और आगे बढ़ने पर आदि गणेश की अद्भुत आकृति दिखाई देती है। मान्यता है कि जब भगवान शिव ने गणेश का सिर काटा था, तब उनका मूल (असली) सिर इसी स्थान पर गिरा था। बाद में हाथी का सिर लगाया गया, लेकिन उनका मूल सिर आज भी यहां सुरक्षित है।

इस सिर के ठीक ऊपर आठ पंखुड़ियों वाला एक “ब्रह्मकमल” बना है, जिससे रहस्मयी तरीके से लगातार अमृत की बुँदे टपकती रहती है। ये बुँदे सीधे गणेश जी के सिर पर गिरती है।

पीढ़ी दर पीढ़ी होती है यहां सेवा!

द्वापर युग में, महाभारत के युद्ध के बाद पांडव जब स्वर्गारोहण की अंतिम यात्रा पर निकले तो उन्होंने इस गुफा में शिव की आराधना की। उसके बाद कलियुग में आदि शंकराचार्य ने लगभग 1191 ईस्वी में इस गुफा की पुनर्खोज की और यहां तांबे का शिवलिंग स्थापित कर नियमित पूजा की शुरुआत की। तब से भंडारी परिवार के पुजारी बीस से अधिक पीढ़ियों से यहां सेवा कर रहे हैं।

रहस्यमयी गुफाएं और अनोखे स्तम्भ!

इस गुफा के अंदर चार रहस्यमयी द्वार मौजूद हैं। पाप द्वार, रण द्वार, धर्म द्वार और मोक्ष द्वार। मान्यताओं के अनुसार, रावण की मृत्यु के बाद ‘पाप द्वार’ और महाभारत युद्ध के समाप्त होने पर ‘रण द्वार’ हमेशा के लिए बंद हो गया। वर्तमान में केवल ‘धर्म द्वार’ और ‘मोक्ष द्वार’ ही खुले हुए हैं। कहा जाता है कि कलयुग के अंत में “धर्म द्वार” भी पूरी तरह खुलेगा और एक नए युग की शुरुआत होगी, जिसके बाद आने वाले ‘सतयुग’ में केवल ‘मोक्ष द्वार’ ही मुख्य रहेगा।

द्वारों के अलावा, यहाँ सबसे अनोखे ‘युगों के स्तंभ’ बने हैं। गुफा में चट्टानों के चार प्राकृतिक उभार हैं, जो चारों युगों के प्रतीक हैं। इनमें सतयुग का स्तंभ सबसे छोटा है, जबकि त्रेता और द्वापर के स्तंभ उससे बड़े हैं। सबसे हैरान करने वाली बात यह है कि ‘कलयुग’ का स्तंभ’ सबसे लंबा है और यह धीरे-धीरे लगातार ऊपर की ओर बढ़ रहा है।

कब आएगा महा-प्रलय?

इस गुफा की सबसे रहस्यमयी और बड़ी बात तो यहां के शिवलिंग से जुडी है। गुफा के अंदर मौजूद यह शिवलिंग लगातार बड़ा हो रहा है। स्थानीय मान्यताओं और लोककथाओं के अनुसार, जिस दिन यह शिवलिंग बढ़ते-बढ़ते गुफा की छत से टकरा जाएगा, उसी दिन महाप्रलय आएगा और दुनिया का अंत होगा। इसके बाद नया सृष्टि का एक नया चक्र शुरू होगा। यह रहस्य कोई निश्चित तारीख नहीं बताता, बल्कि युग परिवर्तन का एक प्रतीक है। माना जाता है कि जब दुनिया में अधर्म अपनी चरम सीमा पर पहुंचेगा और यह प्राकृतिक संकेत पूरा होगा, तभी प्रलय आएगा।

सच कहें तो पाताल भुवनेश्वर सिर्फ घूमने की कोई जगह नहीं है, बल्कि एक आध्यात्मिक अनुभव है। यह वो जगह है जहाँ कदम रखते ही वक्त ठहर जाता है और गुफा के पत्थर खुद युगों की गाथा गाते हैं। यहाँ आकर हर व्यक्ति को यह अहसास हो जाता है कि इंसानी जीवन कितना छोटा है और सृष्टि का यह पूरा चक्र कितना असीमित है।

Disclaimer:- उपरोक्त लेख में उल्लेखित सभी जानकारियाँ प्रचलित मान्यताओं और धर्म ग्रंथों पर आधारित है। IBC24.in लेख में उल्लेखित किसी भी जानकारी की प्रामाणिकता का दावा नहीं करता है। हमारा उद्देश्य केवल सूचना पँहुचाना है।

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पाताल भुवनेश्वर गुफा का महाप्रलय (दुनिया के अंत) से क्या संबंध है?

स्थानीय मान्यताओं के अनुसार, गुफा के भीतर स्थित कलयुग का स्तंभ और एक प्राकृतिक शिवलिंग लगातार ऊपर की ओर बढ़ रहे हैं। ऐसी भविष्यवाणी है कि जब यह शिवलिंग या स्तंभ बढ़ते-बढ़ते गुफा की छत से टकरा जाएगा, तब इस सृष्टि में अधर्म अपनी चरम सीमा पर होगा। उसी क्षण महाप्रलय आएगा, दुनिया का अंत होगा और एक नया सृष्टि चक्र (सतयुग) शुरू होगा।

इस गुफा को "देवताओं का भूमिगत नगर" क्यों कहा जाता है?

स्कंदपुराण के मानस खंड के अनुसार, इस गुफा में स्वयं भगवान शिव निवास करते हैं। उनके साथ ही यहाँ तैंतीस कोटि (33 प्रकार के) देवी-देवता भी अदृश्य रूप में विराजमान हैं। गुफा के भीतर पत्थरों पर इन सभी देवताओं की प्राकृतिक और विस्मयकारी आकृतियाँ बनी हुई हैं, इसलिए इसे देवताओं का भूमिगत नगर कहा जाता है।

गुफा के अंदर बने चारों द्वारों और युगों के स्तंभों का क्या रहस्य है?

गुफा में चार पौराणिक द्वार हैं—पाप द्वार (रावण वध के बाद बंद), रण द्वार (महाभारत युद्ध के बाद बंद), जबकि धर्म और मोक्ष द्वार अभी खुले हैं। इसके अलावा, यहाँ पत्थरों के चार उभार हैं जो चारों युगों (सतयुग, त्रेता, द्वापर, कलयुग) को दर्शाते हैं। इनमें कलयुग का स्तंभ सबसे लंबा है।

पाताल भुवनेश्वर गुफा कहाँ स्थित है और इसकी खोज किसने की थी?

यह रहस्यमयी गुफा उत्तराखंड के कुमाऊं क्षेत्र में गंगोलीहाट कस्बे से लगभग 14 किलोमीटर दूर एक पहाड़ी पर स्थित है। पौराणिक कथाओं के अनुसार, त्रेतायुग में सबसे पहले इसकी खोज अयोध्या के सूर्यवंशी राजा ऋतुपर्ण ने की थी। इसके बाद कलयुग में (लगभग 820 ईस्वी में) आदि शंकराचार्य जी ने इसकी पुनर्खोज की थी।