Pitru Paksh 2026: 26 या 27 सितंबर कब से शुरू हो रहे हैं श्राद्ध? तुरंत नोट करें पितृ पक्ष की मुख्य तिथियाँ और श्राद्ध की सबसे सरल विधि!

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Pitru Paksh 2026: हिन्दू पंचांग के मुताबिक, हर साल भाद्रपद महीने की पूर्णिमा से लेकर अश्विन महीने की अमावस्या तक का समय पितृ पक्ष कहलाता है। आइये जानें किस तारीख़ से शुरू होंगे श्राद्ध और जल्दी नोट कर लें पितृ पक्ष की मुख्य तारीखें..

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  • Publish Date - September 18, 2026 / 07:15 PM IST,
    Updated On - September 18, 2026 / 07:18 PM IST

Pitru Paksh 2026/Image Credit: ScreenGrab / AI Generated / @Grok

HIGHLIGHTS
  • 26 या 27 सितंबर? जानिए श्राद्ध शुरू होने की असली तारीख!

Pitru Paksh 2026: हिन्दू पंचांग के मुताबिक, हर साल ‘पितृ पक्ष 2026 भाद्रप्रद महीने की पूर्णिमा से लेकर अश्विन माह की अमावस्या तक रहता है। वर्ष 2026 में पितृ पक्ष (श्राद्ध) का प्रारंभ 26 सितंबर की पूर्णिमा तिथि से हो रहा है, वहीं प्रतिपदा तिथि का श्राद्ध 27 सितंबर को होगा और इसका समापन 10 अक्टूबर को सर्वपितृ अमावस्या के साथ होगा।

धार्मिक शास्त्रों और गरुड़ पुराण के अनुसार, पितृ पक्ष के ये 15-16 दिन पूरी तरह हमारे पितरों की सेवा और स्मरण के लिए है, जिसमें की गई एक छोटी सी गलती भी पितरों को असंतुष्ट कर सकती है। आइये विस्तार से जानतें हैं पितृ पक्ष की मुख्य तिथियां और श्राद्ध करने की सही विधि..

पितृ पक्ष 2026 मुख्य तिथियाँ

वर्ष 2026 में भाद्रप्रद पूर्णिमा की शुरुआत 25 सितंबर की रात 11:06 बजे से शुरू होकर 26 सितंबर की रात 10:18 बजे तक रहेगी।

महत्वपूर्ण तिथियाँ

पूर्णिमा श्राद्ध : 26 सितंबर 2026, शनिवार
प्रतिपदा तिथि श्राद्ध: 27 सितंबर 2026, रविवार
द्वितीय श्राद्ध: 28 सितंबर 2026, सोमवार
तृतीया श्राद्ध: 29 सितंबर 2026, मंगलवार
चतुर्थी और पंचमी तिथि का श्राद्ध: 30 सितंबर 2026, बुधवार
षष्टी तिथि का श्राद्ध: 1 अक्टूबर 2026, गुरूवार
सप्तमी तिथि का श्राद्ध: 2 अक्टूबर 2026, शुक्रवार
अष्टमी तिथि का श्राद्ध: 3 अक्टूबर 2026, शनिवार
नवमी तिथि का श्राद्ध: 4 अक्टूबर 2026, रविवार
दशमी तिथि का श्राद्ध: 5 अक्टूबर 2026, सोमवार
एकदशी तिथि का श्राद्ध: 6 अक्टूबर 2026, मंगलवार
द्वादशी तिथि का श्राद्ध: 7 अक्टूबर 2026, बुधवार
मघा तिथि का श्राद्ध: 7 अक्टूबर 2026, बुधवार
त्रयोदशी तिथि का श्राद्ध: 8 अक्टूबर 2026, गुरुवार
चतुर्दशी तिथि का श्राद्ध: 9 अक्टूबर 2026, शुक्रवार
सर्वपितृ अमावस्या: 10 अक्टूबर 2026, शनिवार

श्राद्ध करने की सही और आसान विधि

अपने पूर्वजों (पितरों) के प्रति आभार व्यक्त करने के लिए श्राद्ध कर्म बेहद सादगी से किया जा सकता है। सुबह स्नान के बाद सफेद वस्त्र पहनकर दक्षिण दिशा की ओर मुख करें। इसके बाद जल, काले तिल, जौ और कुशा हाथ में लेकर पितरों को ‘तर्पण’ (जल) दें। फिर पके हुए चावल, घी और तिल से बने पिंडों का ‘पिंडदान’ करें।

इस दिन घर में बिना लहसुन-प्याज़ का सात्विक भोजन बनाएं और सबसे पहले गाय, कुत्ते, कौवे, देव और चींटियों के लिए ‘पंचबलि भोग’ निकालें। अंत में, ब्राह्मणों या ज़रूरतमंदों को आदर सहित भोजन कराकर दान-दक्षिणा दें। सबसे ज़रूरी बात यह है कि इस दौरान आपका मन शांत हो और आप पितरों से भूल-चूक के लिए क्षमा याचना कर रहे हों।

Disclaimer:- उपरोक्त लेख में उल्लेखित सभी जानकारियाँ प्रचलित मान्यताओं और धर्म ग्रंथों पर आधारित है। IBC24.in लेख में उल्लेखित किसी भी जानकारी की प्रामाणिकता का दावा नहीं करता है। हमारा उद्देश्य केवल सूचना पँहुचाना है।

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साल 2026 में पितृ पक्ष (श्राद्ध) कब से शुरू हो रहे हैं—26 सितंबर या 27 सितंबर?

हिन्दू पंचांग के अनुसार, 26 सितंबर 2026 को भाद्रपद पूर्णिमा है, इसलिए इस दिन पूर्णिमा का श्राद्ध (ऋषि श्राद्ध) किया जाएगा। इसके अगले दिन यानी 27 सितंबर 2026 से प्रतिपदा तिथि का श्राद्ध शुरू होगा, जो कि पितृ पक्ष की मुख्य शुरुआत मानी जाती है।

वर्ष 2026 में सर्वपितृ अमावस्या कब है और इसका क्या महत्व है?

साल 2026 में सर्वपितृ अमावस्या 10 अक्टूबर को पड़ेगी। इस दिन पितृ पक्ष का समापन होता है। यदि आप अपने किसी पूर्वज की मृत्यु की तिथि भूल गए हैं, तो इस दिन उनका श्राद्ध करने से उन्हें तृप्ति मिल जाती है।

घर पर खुद से श्राद्ध (तर्पण) करने की सबसे सरल विधि क्या है?

सुबह स्नान के बाद सफेद वस्त्र पहनकर दक्षिण दिशा की ओर मुख करके बैठें। हाथ में जल, काले तिल, जौ और कुशा घास लेकर अपने पूर्वजों का ध्यान करते हुए जल अर्पित करें (तर्पण)। इसके बाद सात्विक भोजन बनाकर पंचबलि भोग निकालें और ब्राह्मण या ज़रूरतमंद को भोजन कराएं।

श्राद्ध के भोजन में 'पंचबलि भोग' क्या होता है और यह किसे दिया जाता है?

मुख्य भोजन परोसने से पहले पांच विशेष जीवों के लिए भोजन का अंश निकाला जाता है, जिसे पंचबलि भोग कहते हैं। यह भोग 1. गाय, 2. कुत्ता, 3. कौवा, 4. देव (अग्नि या जल) और 5. चींटियों को आदरपूर्वक खिलाया जाता है।

पितृ पक्ष के दौरान कौन सी गलतियाँ भूलकर भी नहीं करनी चाहिए?

इन 16 दिनों में घर में लहसुन-प्याज, तामसिक भोजन या शराब का सेवन बिल्कुल न करें। घर के दरवाज़े पर आए किसी भी भिक्षु या पशु का अपमान न करें। इसके अलावा, इस अवधि में कोई भी नया या मांगलिक कार्य (जैसे मुंडन, गृह प्रवेश या शादी) शुरू करने से बचना चाहिए।