(Mobile RAM Performance/ Image Credit: Pexels)
Mobile RAM Performance: आजकल स्मार्टफोन खरीदते समय RAM पर खास ध्यान दिया जाता है। बाजार में 8GB, 12GB और यहां तक कि 16GB RAM वाले फोन भी आसानी से मिल जाते हैं। ऐसे में कई लोगों को लगता है कि जिस फोन में ज्यादा रैम होगी उसकी परफॉर्मेंस भी उतनी तेज होगी। लेकिन असल में स्मार्टफोन की स्पीड सिर्फ रैम पर निर्भर नहीं करती। प्रोसेसर, स्टोरेज की स्पीड और सॉफ्टवेयर ऑप्टिमाइजेशन भी फोन के परफॉर्मेंस (Mobile RAM Performance) में बड़ी भूमिका निभाते हैं। इसलिए 16GB रैम वाला फोन हर काम में 8GB रैम वाले फोन से दोगुना तेज चले यह जरूरी नहीं है।
रैम फोन में चल रहे Apps और उनके जरूरी डेटा को कुछ समय के लिए संभालकर रखती है। ज्यादा रैम होने पर फोन एक साथ कई Apps को बेहतर तरीके से संभाल सकता है। इससे बार-बार Apps को दोबारा Load करने की जरूरत कम हो सकती है। खासकर मल्टीटॉस्किंग और ज्यादा मेमोरी इस्तेमाल करने वाले कामों में ज्यादा रैम (Mobile RAM Performance) उपयोगी साबित हो सकती है। लेकिन अगर प्रोसेसर कमजोर है या स्टोरेज धीमी है तो केवल रैम बढ़ाने से फोन की पूरी परफॉर्मेंस तेज नहीं हो जाती।
अगर फोन का इस्तेमाल रोजमर्रा के कामों के लिए किया जाता है, तो बहुत ज्यादा रैम की जरूरत हर यूजर को नहीं होती। YouTube पर वीडियो देखना, Online Shopping, Mobile Banking, Social Media इस्तेमाल करना और फोटोज खींचने जैसे सामान्य कामों के लिए 8GB RAM वाला अच्छा स्मार्टफोन पर्याप्त हो सकता है। ऐसे मामलों में केवल ज्यादा रैम के लिए महंगा मॉडल खरीदना जरूरी नहीं है। फोन चुनते समय प्रोसेसर और सॉफ्टवेयर ऑप्टिमाइजेशन को भी देखना चाहिए।
जो यूजर्स स्मार्टफोन पर हेवी गेमिंग करते हैं या एक साथ कई Apps चलाते हैं, उनके लिए 12GB या 16GB रैम ज्यादा उपयोगी हो सकती है। बड़े गेम्स और Memory-Intensive Apps को चलाने के दौरान अतिरिक्त रैम फोन को कई काम संभालने में मदद करती है। लेकिन यहां भी प्रोसेसर, ग्राफिक्स परफॉर्मेंस, स्टोरेज और सॉफ्टवेयर का बड़ा योगदान रहता है। इसलिए RAM को फोन की परफॉर्मेंस (Mobile RAM Performance) का अकेला पैमाना मानना सही नहीं है। जरूरत के हिसाब से 8GB, 12GB या 16GB रैम का चुनाव करना ही ज्यादा समझदारी भरा तरीका है।