Sawan Somwar 2026/Image Credit: AI Generated / Youtube / @Grok
Sawan Somwar 2026: आज श्रावण मास का पहला सोमवार है। यह पावन दिन महादेव, भोलेनाथ और देवाधिदेव शिव की विशेष पूजा-अर्चना के लिए समर्पित हैं, लेकिन क्या आप जानते हैं कि हमारे भोलेनाथ कभी अकेले नहीं रहते? उनके साथ उनकी एक विशाल और रहस्यमयी सेना चलती है। इस अनोखी सेना में भूत, पिशाच, प्रेत, राक्षस, यक्ष, गंधर्व और कई दिव्य और अद्भुत प्राणी शामिल हैं, जिन्हें “शिव के गण“ कहा जाता है। इन सभी का स्वामी होने के कारण शिव जी “भूतनाथ” और “गणपति” कहकर भी पुकारा जाता है।
शिव पुराण को हिन्दू धर्म में भगवान शिव का मुख्य ग्रन्थ माना जाता है। इसमें बताया गया है कि महादेव के असंख्य गण है। इसमें से कुछ गण बहुत ताक़तवर हैं, जो कैलाश पर्वत की रक्षा करते हैं और साथ ही शिव भक्तों की रक्षा और पापियों का सर्वनाश करते हैं। आज हम उन्ही 4 शक्तिशाली गणों के बारे में विस्तारपूर्वक जानेंगे, जिनकी शक्ति के आगे देवता भी नतमस्तक हो जाते हैं। वे चार गण हैं: भैरव बाबा, वीरभद्र, घंटाकर्ण और नंदी जी।
सबसे पहले जानते हैं भैरव बाबा के बारे में। शिव जी के सबसे प्रमुख और पराक्रमी गण हैं भैरव बाबा, जिन्हें ‘काल भैरव’ भी कहा जाता है। इन्हें सभी ज्योतिर्लिंगों जैसे (काशी विश्वनाथ, केदारनाथ, उज्जैन) का रक्षक माना जाता है। कहते हैं कि भैरव बाबा की अनुमति के बिना कोई भगवान शिव तक नहीं पहुँच सकता। वे शिव जी के मुख्य द्वारपाल और सेनापति हैं, जो काल (समय) और भूत-प्रेत सबको नियंत्रित करते हैं भक्तों की रक्षा और अधर्म का नाश करने वाले भैरव बाबा की पूजा सावन में विशेष फल देती है।
शिव पुराण के अनुसार, “वीरभद्र” महादेव की जटा से जन्में उनके सबसे शक्तिशाली और क्रोधी सेनापति हैं। उनकी उतपत्ति राजा दक्ष के अहंकार को तोड़ने के लिए हुई थी। जब प्रजापति दक्ष ने शिव जी का अपमान किया, तो माता सती ने यज्ञ कुंड में कूदकर अपने प्राण दे दिए। इस महावियोग और अपमान से क्रोधित होकर शिव जी ने अपनी जटा से महायोद्धा वीरभद्र को उत्पन्न किया। वीरभद्र ने शिव जी की आज्ञा से न केवल दक्ष का यज्ञ नष्ट कर उनका सिर धड़ से अलग किया, बल्कि विरोध करने वाले देवताओं को भी पीछे हटने के लिए मजबूर कर दिया।
बाद में महादेव ने दक्ष को नया जीवन तो दिया, लेकिन वीरभद्र की असीम शक्ति के सामने पूरी सृष्टि नतमस्तक हो गई। वीरभद्र की कथा हमें सिखाती है कि धर्म की रक्षा और आराध्य के सम्मान के लिए हमेशा तत्पर रहना चाहिए।
तीसरे शक्तिशाली गण है “घंटाकर्ण”। भले ही इनका नाम थोड़ा अनोखा लगता है, लेकिन वास्तव में ये शिव जी के बहुत बड़े योद्धा और सेनापति हैं। कुछ पौराणिक कथाओं में इन्हें काल भैरव का ही स्वरुप बताया गया है, जो यक्ष कुबेर के भी सहयोगी माने जाते हैं। घंटाकर्ण युद्ध में बहुत ही कुशल और बहादुर हैं, शिव जी की सेना में उनका बहुत ऊँचा स्थान हैं। वे दुष्ट शक्तियों का संहार कर शिव जी के भक्तों की रक्षा करते हैं।
प्राचीन ग्रंथों के अनुसार, वे महादेव के उन सबसे भरोसेमंद गणों में से हैं जो हर क्षण सेवा के लिए तत्पर रहते हैं। उनकी इसी स्वामी भक्ति के कारण उन्हें शिव के प्रमुख सेनापतियों का गौरव प्राप्त है।
सबसे प्यारे और सबसे महत्वपूर्ण गण हैं “नंदी जी”। महादेव के गणों में नंदी जी का स्थान सबसे ऊंचा और बेहद खास है। वे शिव जी की सवारी हैं, उनके परम भक्त हैं और सभी गणों के मुखिया भी हैं। आपने देखा होगा कि हर शिव मंदिर में शिवलिंग के ठीक सामने नंदी जी की मूर्ति हमेशा विराजमान रहती है। नंदी जी के जन्म की कहानी भी बहुत प्रेरणादायक है। वे ऋषि शिलाद के पुत्र थे। जब उन्हें पता चला कि उनकी आयु बहुत कम है, तो उन्होंने शिव जी को प्रसन्न करने के लिए कठिन तपस्या की।
उनकी भक्ति और तपस्या से प्रसन्न होकर भगवान शिव ने नंदी को अमरत्व का वरदान दिया और उन्हें अपना वाहन तथा प्रमुख द्वारपाल बना लिया। नंदी जी जितने सीधे हैं, उतने ही बलशाली भी हैं। भक्तों का मानना है कि यदि अपनी कोई इच्छा नंदी जी के कान में धीरे से कही जाए, तो वे उसे महादेव तक जरूर पहुंचाते हैं। नंदी जी हमें सिखाते हैं कि सच्ची निष्ठा से भगवान को कैसे पाया जा सकता है।
सावन का महीना शिव जी की पूजा के लिए सबसे पवित्र समय होता है। इस महीने में भोलेनाथ की भक्ति करते हुए उनके इन चारों शक्तिशाली गणों का भी स्मरण करना चाहिए। हमें “भैरव बाबा” से सुरक्षा, “वीरभद्र” से संकट से लड़ने का साहस, “घंटाकर्ण” से नकारात्मकता को मिटाने की शक्ति और “नंदी जी” से महादेव के प्रति अटूट भक्ति और निष्ठा मांगनी चाहिए।
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