Sheetala Ashtami 2026 Date: कब है शीतला अष्टमी? इस दिन क्यों लगाया जाता है बासी भोजन का भोग और क्या है ये अनोखी परंपरा, जो हर साल दोहराई जाती है?

Sheetala Ashtami 2026 Date: चैत्र मास के कृष्ण पक्ष की अष्टमी को शीतला अष्टमी मनाई जाती है। इस साल यह 11 मार्च 2026 को है। इस दिन लोग शीतला माता की पूजा करते हैं और उन्हें बासी भोजन का भोग अर्पित करते हैं। यह परंपरा पुराने समय से चली आ रही है।

Sheetala Ashtami 2026 Date: कब है शीतला अष्टमी? इस दिन क्यों लगाया जाता है बासी भोजन का भोग और क्या है ये अनोखी परंपरा, जो हर साल दोहराई जाती है?

(Sheetala Ashtami 2026 Date/ Image Credit: Screengrab)

Modified Date: March 8, 2026 / 06:07 pm IST
Published Date: March 8, 2026 6:00 pm IST
HIGHLIGHTS
  • शीतला अष्टमी होली के बाद चैत्र कृष्ण पक्ष की अष्टमी को मनाई जाती है।
  • इस साल शीतला अष्टमी 11 मार्च 2026 को है।
  • शीतला माता को बासी भोजन का भोग लगाया जाता है।

Sheetala Ashtami 2026 Date: होली के बाद शीतला अष्टमी का पर्व मनाया जाता है। यह होलिका दहन के आठवें दिन और चैत्र कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि को पड़ता है। उत्तर भारत के कई राज्यों जैसे राजस्थान, मध्य प्रदेश, उत्तर प्रदेश और हरियाणा में इसे विशेष श्रद्धा और भक्ति के साथ मनाया जाता है। लोग इस दिन शीतला माता की पूजा करके स्वास्थ्य और सुख-शांति की कामना करते हैं।

शीतला अष्टमी 2026 की तिथि और पूजा समय

इस साल शीतला अष्टमी 11 मार्च 2026 को पड़ रही है। अष्टमी तिथि की शुरुआत 11 मार्च की रात 01:54 बजे होगी और 12 मार्च सुबह 04:19 बजे तक रहेगी। पूजा के लिए 11 मार्च सुबह 6:36 बजे से शाम 6:27 बजे तक का शुभ समय है। इस दौरान घर-परिवार में शीतला माता की पूजा और व्रत किया जाएगा।

बसौड़ा पर्व की परंपरा

सबसे खास बात यह है कि शीतला माता को बासी भोजन का भोग अर्पित किया जाता है। आमतौर पर पूजा-पाठ में ताजा और गर्म भोजन लगाया जाता है, लेकिन शीतला अष्टमी पर चूल्हा नहीं जलाया जाता। सप्तमी तिथि को घर में पुरी, पकौड़ी, कढ़ी, मीठे चावल, हलवा जैसी चीजें तैयार की जाती हैं और अगले दिन शीतला माता को भोग के रूप में अर्पित किया जाता है। इस कारण इस पर्व को कई स्थानों पर ‘बसौड़ा’ या ‘बासोड़ा’ भी कहा जाता है।

शीतला अष्टमी का धार्मिक महत्व

धार्मिक मान्यता के अनुसार शीतला माता रोग-शोक और त्वचा रोगों, विशेषकर चेचक से रक्षा करने वाली देवी मानी जाती हैं। ‘शीतला’ शब्द का अर्थ है शीतलता प्रदान करने वाली देवी। लोक विश्वास के अनुसार शीतला माता के आशीर्वाद से घर में स्वास्थ्य, सुख और शांति बनी रहती है। इसलिए इस दिन उनकी पूजा और बासी भोजन का भोग करना अत्यंत शुभ माना जाता है।

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लेखक के बारे में

मैं 2018 से पत्रकारिता में सक्रिय हूँ। हिंदी साहित्य में मास्टर डिग्री के साथ, मैंने सरकारी विभागों में काम करने का भी अनुभव प्राप्त किया है, जिसमें एक साल के लिए कमिश्नर कार्यालय में कार्य शामिल है। पिछले 7 वर्षों से मैं लगातार एंटरटेनमेंट, टेक्नोलॉजी, बिजनेस और करियर बीट में लेखन और रिपोर्टिंग कर रहा हूँ।