(Som Pradosh Vrat 2026/ Image Credit: Pixabay)
Som Pradosh Vrat 2026: हिंदू धर्म में भगवान शिव को समर्पित प्रदोष व्रत का बहुत अधिक महत्व है। यह व्रत महीने में दो बार शुक्ल और कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी तिथि को आता है। मार्च 2026 में तीसरा और आखिरी प्रदोष व्रत 30 मार्च सोमवार को पड़ रहा है। चूंकि यह सोमवार को हो रहा है, इसलिए इसे सोम प्रदोष व्रत कहा जाता है। इस व्रत को रखने और सही तरीके से पूजा करने से भगवान शिव प्रसन्न होते हैं और भक्तों को सुख, शांति, स्वास्थ्य और मनोकामनाओं की पूर्ति का आशीर्वाद मिलता है।
द्रिक पंचांग के मुताबिक, चैत्र मास की शुक्ल पक्ष त्रयोदशी तिथि 30 मार्च 2026 को सुबह 7:09 बजे शुरू होगी और 31 मार्च 2026 को सुबह 6:55 बजे समाप्त होगी। इस अनुसार सोम प्रदोष व्रत 30 मार्च सोमवार को रखा जाएगा। यह व्रत विशेष रूप से उन भक्तों के लिए लाभकारी है जो पहली बार इसे रख रहे हैं।
प्रदोष व्रत की पूजा सूर्यास्त के बाद प्रदोष काल में की जाती है। 30 मार्च 2026 को प्रदोष काल शाम 6:13 बजे से शुरू होकर 8:33 बजे तक रहेगा। सबसे शुभ समय सूर्यास्त के 24 मिनट बाद से पूजा करने को माना गया है। इस अवधि के दौरान पूजा पूरी करनी चाहिए ताकि भगवान शिव की कृपा अधिक से अधिक मिल सके।
सुबह जल्दी उठकर स्नान करें और स्वच्छ वस्त्र पहनें। शाम को शिवलिंग पर पंचामृत (गंगाजल, दूध, दही, घी, शहद और चीनी) से अभिषेक करें। बेलपत्र, आक के फूल, धतूरा, चंदन, फल और मिठाई अर्पित करें। ‘ॐ नमः शिवाय’ मंत्र कम से कम 108 बार जपें। पूजा के बाद आरती करें और प्रसाद बांटें। व्रत रखने वाले लोग पूरे दिन फलाहार करें और शाम को पारण करें।
इस व्रत में बेलपत्र अर्पित करना और ‘ॐ नमः शिवाय’ का जाप करना अत्यंत फलदायी है। गरीबों को अन्न या वस्त्र दान करना, चांदी का दान करना या चांदी के बर्तन में जल पीना भी शुभ माना जाता है। सोम प्रदोष व्रत से चंद्र दोष, मानसिक तनाव, स्वास्थ्य समस्याओं और आर्थिक कठिनाइयों से मुक्ति मिलती है। विवाहित महिलाएं इसे पति की लंबी आयु और सुख-समृद्धि के लिए रखती हैं। सोमवार का दिन होने के कारण यह व्रत और भी फलदायी माना जाता है।