Republic Day 2026: कौन सा राज्य झांकी में हमेशा चमका? गणतंत्र दिवस में पिछले 16 सालों के विजेताओं की सूची यहां देखें
Republic Day 2026: गणतंत्र दिवस की झांकियां भारत की विविधता और संस्कृति को दर्शाती है। 1952 से आयोजित ये झांकियां देश की समृद्ध विरासत और विकास को उजागर करती है। पिछले 16 सालों में उत्तर प्रदेश, ओडिशा, उत्तराखंड और अयोध्या की झांकियां विजेता रही हैं, जो कला और राष्ट्रीय गौरव का प्रतीक हैं।
(Republic Day 2026/Image Credit: Screengrab)
- गणतंत्र दिवस की झांकियां भारत की संस्कृति और विविधता का प्रतीक हैं।
- 1952 में झांकियों की शुरुआत हुई, थीम “विविधता में एकता” थी।
- झांकियों में धार्मिक स्थल, लोक कला, महिला सशक्तिकरण और प्राकृतिक सुंदरता दिखाई जाती हैं।
नई दिल्ली: Republic Day 2026 गणतंत्र दिवस की झांकिया भारत के राष्ट्रीय उत्सव में एक खास स्थान रखती हैं। ये झांकिया सिर्फ रंग-बिरंगे मॉडल नहीं होती, बल्कि हर भारतीय के बचपन की यादें और देश की विविधता को भी दर्शाती हैं। 1952 में कल्चरल झांकियों की शुरुआत हुई थी। इसका मकसद ‘विविधता में एकता’ को प्रदर्शित करना था। शुरुआत में ये झांकियां साधारण होती थी, फ्लैटबेड ट्रकों पर क्षेत्रीय हस्तशिल्प और लोक कलाकार होते थे। समय से साथ ये झांकियां और भी भव्य और रचनात्मक होती गई।
उत्तर प्रदेश महाकुंभ और अयोध्या की झांकियां

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पिछले 16 वर्षों में उत्तर प्रदेश की झांकियां हमेशा खास रही हैं। 2025 में महाकुंभ की झांकी ने संगम, साधु-संतों और ‘अमृत कलश’ के माध्यम से आध्यात्मिक भव्यता दिखाई। इसमें विरासत और विकास का संगम भी प्रदर्शित किया गया। वहीं 2021 में अयोध्या की झांकी में राम मंदिर का भव्य मॉडल दिखाया गया। इसमें दीपोत्सव और रामायण की कहानियों के साथ ऋषि वाल्मीकि की विशाल मूर्ति भी शामिल थी।
ओडिशा और उत्तराखंड की झांकियां

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ओडिशा की 2024 की झांकी में महिला सशक्तिकरण और राज्य की रेशम उद्योग की झलक दिखी। इसमें पट्टाचित्र कला और पारंपरिक नर्तकियों के लाइव परफॉर्मेंस ने सबका ध्यान खींचा। 2023 में उत्तराखंड की मानसखंड झांकी ने देवदार के घने जंगलों और जागेश्वर धाम के माध्यम से शांत और धार्मिक माहौल को परेड में जीवंत किया।
असम, त्रिपुरा और महाराष्ट्र की झांकियां

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2020 में असम की झांकी ने भोरताल नृत्य और बांस-बेंत की कारीगरी को प्रदर्शित किया। कलाकारों की लयबद्ध मंजीरों ने इसे और आकर्षक बनाया। 2019 में त्रिपुरा की झांकी ने गांधीवादी तरीके से ग्रामीण अर्थव्यवस्था और लोगों के जीवन को दिखाया। 2018 में महाराष्ट्र की झांकी में छत्रपति शिवाजी महाराज के राज तिलक की झलक दिखाई गई।
अन्य राज्यों की झांकियां और थीम

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अरुणाचल प्रदेश की 2017 की झांकी ने मोनपास याक डांस दिखाया। पश्चिम बंगाल की 2016 झांकी में भटके जोगियों को दर्शाया गया, वहीं 2015 में महाराष्ट्र की वारी और 2014 में पश्चिम बंगाल का पुरुलिया छऊ नृत्य पर केंद्रित झांकी रही। केरल की 2013 झांकी ने प्राकृतिक सुंदरता और स्थानीय आजीविका को दिखाया, जिसमें हाउस-बोट का बड़ा रेप्लिका शामिल था। इसके अलावा सरकारी मंत्रालयों की झांकियां भी महत्वपूर्ण रही हैं। 2012 में एचआरडी मंत्रालय ने ‘साक्षर भारत’ की थीम दिखाई। 2011 में दिल्ली की झांकी सांस्कृतिक और धार्मिक सद्भाव को दर्शाती थी। 2010 में संस्कृति मंत्रालय ने भारतीय संगीत वाद्ययंत्रों पर आधारित झांकी पेश की।
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