मुक्केबाजों को रिकॉर्ड सात स्वर्ण, जूडो और पैरा एथलीटों का भी यादगार प्रदर्शन

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मुक्केबाजों को रिकॉर्ड सात स्वर्ण, जूडो और पैरा एथलीटों का भी यादगार प्रदर्शन

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  • Publish Date - August 2, 2026 / 01:56 AM IST,
    Updated On - August 2, 2026 / 01:56 AM IST

ग्लास्गो, एक अगस्त (भाषा) मुक्केबाजों ने रिकॉर्डतोड़ सात स्वर्ण पदक जीते जबकि जूडो और ट्रैक और पैरा फील्ड खिलाड़ियों ने भी ऐतिहासिक प्रदर्शन करके राष्ट्रमंडल खेलों में शनिवार का दिन भारत के लिये यादगार बना दिया ।

खेल के दसवें दिन भारत 13 स्वर्ण, 17 रजत और नौ कांस्य समेत 39 पदक लेकर तालिका में चौथे स्थान पर पहुंच गया । आस्ट्रेलिया के 61 स्वर्ण पदक हैं जबकि इंग्लैंड दूसरे और कनाडा तीसरे स्थान पर है ।

मुक्केबाजों ने किया रिंग में कमाल :

मौजूदा विश्व चैम्पियन जैसमीन लंबोरिया (57 किलो) , प्रीति पवार (54 किलो), साक्षी चौधरी (51 किलो) , अरूंधति चौधरी (70 किलो) , प्रिया घंघास (60 किलो) ने शानदार प्रदर्शन करते हुए अपने वजन वर्गों में स्वर्ण पदक जीते । वहीं ओलंपिक पदक विजेता लवलीना बोरगोहेन (75 किलो) को रजत पदक से संतोष करना पड़ा ।

पुरूष वर्ग में सचिन सिवाच (60 किलो) और अंकुश (70 किलो) ने स्वर्ण पदक जीते जबकि 55 किग्रा वर्ग में जादूमणि सिंह और 90 प्लस किलो स्पर्धा में नरेंदर बेरवाल ने रजत पदक जीता ।

इससे पहले भारत ने गोल्ड कोस्ट राष्ट्रमंडल खेल 2018 में मुक्केबाजी में तीन स्वर्ण समेत सात पदक जीते थे ।

जूडो में सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन :

जूडो खिलाड़ी उन्नति शर्मा ने महिलाओं के 63 किग्रा से कम भार वर्ग में कांस्य पदक जीतकर भारत का इस स्पर्धा में ऐतिहासिक अभियान जारी रखा। यह जूडो में भारत का रिकॉर्ड चौथा पदक है।

उन्नति ने शानदार तकनीक का प्रदर्शन करते हुए अपने पैर से दक्षिण अफ्रीका की स्काई नोएस्टर स्काई का संतुलन बिगाड़ा और फिर उन्हें पीठ के बल पटककर इप्पोन हासिल कर मुकाबला महज एक मिनट सात सेकेंड में खत्म कर कांस्य पदक जीत लिया। जूडो में इप्पोन सबसे बड़ा स्कोर होता है और इसके साथ ही मुकाबला तुरंत समाप्त हो जाता है।

भारत के इस ऐतिहासिक अभियान की अगुआई हर्ष सिंह (पुरुष 60 किग्रा) और अस्मिता डे (महिला 48 किग्रा) ने की। दोनों अपने वर्ग में स्वर्ण पदक जीतकर राष्ट्रमंडल खेलों की जूडो प्रतियोगिता में भारत के पहले स्वर्ण पदक विजेता बने।

यामिनी मौर्य ने महिलाओं के 57 किग्रा वर्ग में रजत पदक जीतकर भारत के रिकॉर्ड पदक अभियान में अपना योगदान दिया।

भारत के पास रविवार को प्रतियोगिता के अंतिम दिन इस रिकॉर्ड पदक संख्या में और इजाफा करने का मौका होगा। ईशरूप नारंग (महिला 78 किग्रा), अवतार सिंह (पुरुष 100 किग्रा) और यश घंघास (पुरुष 100 किग्रा से अधिक) अभी भी पदक की दौड़ में बने हुए हैं।

पैरा एथलीटों का यादगार प्रदर्शन , गुलवीर ने भी बनाया रिकॉर्ड

भारतीय पैरा गोला फेंक एथलीट सोमन राणा ने स्वर्ण पदक जीता जबकि त्रिकूद स्पर्धा में प्रवीण चित्रावेल और सेल्वा प्रभु तिरुमरन ने क्रमशः रजत और कांस्य पदक अपने नाम किए । गुलवीर सिंह ने 5000 मीटर में ऐतिहासिक कांस्य जीता ।

पुरुषों की एफ57 गोला फेंक स्पर्धा में प्रतिस्पर्धा करते हुए 2022 एशियाई पैरा खेलों के रजत पदक विजेता राणा ने सत्र का अपना सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करते हुए 13.40 मीटर की दूरी तक गोला फेंका और पहला स्थान हासिल किया।

भारत के ही शुभम जुयाल ने सत्र के अपने सर्वश्रेष्ठ 13.28 मीटर के प्रदर्शन के साथ रजत पदक हासिल किया जबकि कैमरून के सेड्रिक अजामद्जी ने 12.57 मीटर के प्रयास के साथ कांस्य पदक जीता।

पुरुषों की त्रिकूद स्पर्धा में चित्रावेल के शानदार प्रदर्शन से हुई। एशियाई खेलों के कांस्य पदक विजेता चित्रावेल ने 16.58 मीटर की कूद लगाकर रजत पदक जीता और ग्लास्गो में अपने पिछले प्रदर्शन में सुधार किया।

वहीं सेल्वा प्रभु ने 16.52 मीटर की कूद से कांस्य पदक हासिल किया। यह अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में उनका पहला बड़ा पदक है।

गुलवीर सिंह ने 5000 मीटर में कांस्य पदक जीतने वाले पहले भारतीय बनकर इतिहास रच दिया और एक ही राष्ट्रमंडल खेल में एथलेटिक्स में दो पदक जीतने वाले वह भारत के पहले खिलाड़ी बन गए ।

मौजूदा एशियाई चैम्पियन गुलवीर ने 28 जुलाई को 10000 मीटर में रजत पदक जीता था ।

वह 13 मिनट 24 . 95 सेकंड का समय निकालकर 5000 मीटर में तीसरे स्थान पर रहे ।

पैरा एथलेटिक्स की पुरुषों की टी54 1500 मीटर फाइनल स्पर्धा में भारत के रमेश शनमुगम तीन मिनट 23.59 सेकंड का समय लेकर सातवें स्थान पर रहे।

महिलाओं की 10,000 मीटर पैदल चाल स्पर्धा में भी भारत को निराशा हाथ लगी। प्रियंका गोस्वामी ने सत्र का अपना सर्वश्रेष्ठ समय 45 मिनट 53.93 सेकेंड दर्ज किया लेकिन वह चौथें स्थान पर रहीं।

वहीं इस स्पर्धा में हिस्सा ले रहीं दूसरी भारतीय खिलाड़ी रवीना को अयोग्य घोषित कर दिया गया।

भाषा

मोना

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