(फिलेम दीपक सिंह)
नागोया, 21 सितंबर (भाषा) भारत की सुचिका तरियाल को सोमवार को यहां एशियाई खेलों की महिला पारंपरिक 60 किग्रा मिश्रित मार्शल आर्ट (एमएमए) स्पर्धा के सेमीफाइनल में सिंगापुर की हुई हून टियो के खिलाफ विवादास्पद तरीके से हार का सामना करना पड़ा जब दोनों खिलाड़ियों के बीच मुकाबला ड्रॉ रहने के बाद कम वजन के आधार पर टियो को विजेता घोषित किया गया और भारतीय खिलाड़ी को कांस्य पदक से संतोष करना पड़ा।
यह एशियाई खेलों में पदार्पण कर रहे इस खेल में भारत का पहला पदक है। हालांकि फैसले से सुचिका बेहद निराश हो गईं और अंतिम निर्णय टियो के पक्ष में आने के बाद मैट पर फूट-फूटकर रोने लगीं।
इस कांस्य पदक के साथ महाद्वीपीय खेलों में भारत के कुल पदकों की संख्या छह हो गई है। निशानेबाजी में भारतीय खिलाड़ियों ने अब तक चार रजत और एक कांस्य पदक जीता है।
करीबी मुकाबला निर्धारित समय के बाद बराबरी पर समाप्त हुआ। अंतिम कुछ सेकेंड में टियो ने हमला किया लेकिन मुकाबला खत्म होते ही सुचिका ने अपनी प्रतिद्वंद्वी को नीचे गिरा दिया।
पहले राउंड में टियो का पलड़ा भारी रहा लेकिन दूसरे राउंड में सुचिका ने जोरदार वापसी की।
दोनों में से कोई भी स्पष्ट बढ़त हासिल नहीं कर सका जिसके बाद मुकाबला एक मिनट के अतिरिक्त राउंड में चला गया।
सुचिका को लगा कि उन्होंने जीत के लिए पर्याप्त प्रदर्शन किया है जबकि मुकाबला खत्म होने के बाद टियो ने भी जीत का जश्न मनाया।
शुरुआत में मुकाबले का फैसला टियो के पक्ष में दिया गया था लेकिन भारतीय टीम की चुनौती के बाद परिणाम ड्रॉ घोषित किया गया। इसके बाद विजेता का फैसला दोनों खिलाड़ियों के सुबह के वजन के आधार पर किया गया।
एमएमए खेल महासंघ के अध्यक्ष निखिल कुंडे ने पीटीआई को बताया, ‘‘भारतीय के चुनौती देने के बाद मुकाबले का परिणाम ड्रॉ घोषित किया गया। इसके बाद सुबह के वजन के आधार पर विजेता का फैसला किया गया।’’
उन्होंने कहा, ‘‘सिंगापुर की खिलाड़ी का वजन सुचिका से करीब 700 ग्राम कम था इसलिए वह फाइनल में पहुंच गईं। सुचिका को कांस्य पदक से संतोष करना पड़ा।’’
इसके बाद टियो को 2-0 से विजेता घोषित किया गया और वह फाइनल में पहुंच गईं। सुचिका इस फैसले से बेहद निराश नजर आईं।
भारतीय खिलाड़ी फूट-फूटकर रोने लगीं और उन्होंने तुरंत अपनी प्रतिद्वंद्वी या रेफरी से हाथ नहीं मिलाया। उनके कोच ने उन्हें सांत्वना दी।
निराशाजनक हार के बावजूद यह कांस्य पदक एशियाई खेलों में मिश्रित मार्शल आर्ट में भारत का पहला पदक है।
हरियाणा की 36 वर्षीय सुचिका ने 12 साल की उम्र में सड़क पर उत्पीड़न का सामना करने के बाद मार्शल आर्ट शुरू किया था। इसके बाद वह कई मार्शल आर्ट विधाओं में भारत का प्रतिनिधित्व करने वाली खिलाड़ी बनीं। उन्होंने 2022 राष्ट्रमंडल खेलों में जूडो और 2023 एशियाई खेलों में कुराश में भारत का प्रतिनिधित्व किया था।
सुचिका ने रविवार को क्वार्टर फाइनल में मंगोलिया की अल्तानचिमेग बैगलामा को 2-0 से हराकर सेमीफाइनल में प्रवेश करते हुए पदक पक्का किया था।
भाषा सुधीर मोना
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