एशियाई खेलों की चयन पात्रता की परिभाषा के विवाद के कारण अदालत पहुंचे अनुष

एशियाई खेलों की चयन पात्रता की परिभाषा के विवाद के कारण अदालत पहुंचे अनुष

एशियाई खेलों की चयन पात्रता की परिभाषा के विवाद के कारण अदालत पहुंचे अनुष
Modified Date: June 25, 2026 / 07:25 pm IST
Published Date: June 25, 2026 7:25 pm IST

नयी दिल्ली, 25 जून (भाषा) भारतीय ड्रेसेज घुड़सवार अनुष अगरवाला ने 2026 एशियाई खेलों के लिए भारत की ड्रेसेज टीम से बाहर किए जाने को चुनौती देते हुए दिल्ली उच्च न्यायालय का रुख किया है। विवाद इस बात पर है कि चयन के नियमों का मतलब कैसे निकाला जाए और क्या अंतिम मेरिट सूची बनाते समय अगरवाला के कुछ अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं के स्कोर को गिना जाना चाहिए था।

यह विवाद अगरवाला के दो अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं जर्मनी में सीडीआई हेगन (22-26 अप्रैल) और बेल्जियम में सीडीआई लियर (20-24 मई) में हासिल किए गए स्कोर को कैसे गिना जाए इस पर केंद्रित है।

भारतीय घड़सवारी महासंघ (ईएफआई) की तदर्थ समिति का कहना है कि उन स्कोर को उस तरह से नहीं गिना जा सकता जैसा अगरवाला चाहते थे क्योंकि वे चयन के नियमों के मुताबिक नहीं थे।

दूसरी ओर अगरवाला ने अदालत में इस व्याख्या को चुनौती दी है।

एशियाई खेलों की टीम में चयन के लिए राइडर्स को तय चयन ट्रायल में हिस्सा लेना था और जरूरी स्तर हासिल करने थे।

ईएफआई के मुताबिक एक मुख्य शर्त यह थी कि राइडर्स को कम से कम सात दिन पहले यह बताना था कि वे किन प्रतियोगिताओं या टेस्ट को आधिकारिक चयन ट्रायल के तौर पर लेना चाहते हैं। जिन प्रतियोगिताओं या टेस्ट के बारे में ठीक से जानकारी नहीं दी गई थी उन्हें विचार से बाहर किया जा सकता था।

यही ‘सात दिन पहले जानकारी देने का नियम’ विवाद की मुख्य वजह है।

अगरवाला ने 15 अप्रैल को ईएफआई को ईमेल करके बताया कि सीडीआई हेगन में होने वाला सिर्फ ‘इंटर-एक’ टेस्ट ही उनके तीसरे एशियाई खेलों के ट्रायल के तौर पर गिना जाएगा। उन्होंने यह भी बताया कि वे बाद में लियर में पीएसजी और ‘इंटर-एक’ फ्रीस्टाइल स्पर्धा में भी हिस्सा लेना चाहते हैं।

उन्होंने 18 अप्रैल को एक नया अनुरोध किया जिसमें कहा गया कि हेगन में होने वाले पीएसजी और ‘इंटर-एक’ दोनों स्पर्धाओं को उनके तीसरे क्वालीफायर का हिस्सा माना जाए।

ईएफआई का कहना है कि यह नया अनुरोध सात दिन की समय-सीमा खत्म होने के बाद आया था इसलिए इसे स्वीकार नहीं किया जा सकता।

भाषा सुधीर आनन्द

आनन्द


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