भारत को पहले क्वार्टर में पेनल्टी कॉर्नर देने से बचें, समीउल्लाह खान की पाकिस्तानी टीम को सलाह

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भारत को पहले क्वार्टर में पेनल्टी कॉर्नर देने से बचें, समीउल्लाह खान की पाकिस्तानी टीम को सलाह

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  • Publish Date - August 18, 2026 / 12:33 PM IST,
    Updated On - August 18, 2026 / 12:33 PM IST

(मोना पार्थसारथी)

एम्सटेलवीन, 18 अगस्त (भाषा ) भारत के खिलाफ एफआईएच विश्व कप के अहम पूल मुकाबले से पहले पाकिस्तान के महान खिलाड़ी और मौजूदा मुख्य चयनकर्ता समीउल्लाह खान ने टीम को सलाह दी है कि भारत को पहले क्वार्टर में कोई भी पेनल्टी कॉर्नर देने से बचें और डिफेंस को बेहद मजबूत रखें ।

पूल डी में भारत ने वेल्स को हराया जबकि इंग्लैंड से हारने के बाद दूसरे स्थान पर है । वहीं वेल्स के साथ ड्रॉ खेलने और इंग्लैंड से हारने के बाद पाकिस्तान तीसरे स्थान पर है । इस मैच में पाकिस्तान को हर हालत में जीत दर्ज करनी होगी और वेल्स की इंग्लैंड के हाथों हार की भी दुआ करनी होगी जबकि भारत ड्रॅा से भी अगले दौर में पहुंच जायेगा ।

अपने खेलने के दिनों में रफ्तार के कारण ‘फ्लाइंग हॉर्स ’ के नाम से मशहूर दो बार के ओलंपिक स्वर्ण पदक विजेता ( 1978 और 1982 ) समीउल्लाह ने भाषा से बातचीत में कहा ,‘ मैं पाकिस्तानी कप्तान से यही कहना चाहूंगा कि अपना डिफेंस मजबूत रखे और भारत को पहले क्वार्टर में पेनल्टी कॉर्नर कतई नहीं दे । मिडफील्ड से कहूंगा कि पीछे पास देने की बजाय गोल की तरफ आगे की तरफ बढे । फॉरवर्ड पंक्ति को डायगनल पास और इंटरचेंज पास लेकर गोल करने की कोशिश करनी होगी ।’’

पाकिस्तानी टीम में अधिकांश युवा खिलाड़ी हैं लेकिन समीउल्लाह ने कहा कि उनके पास इस मुकाबले का दबाव झेलने का पर्याप्त अनुभव है ।

उन्होंने कहा ,‘‘ हाल ही में ये प्रो लीग में भारत से खेले हैं और उसमें एक मुकाबले में कड़ी टक्कर भी दी । इनमें से हर खिलाड़ी 50 से ज्यादा मैच खेल चुके हैं । इस मैच पर बहुत कुछ निर्भर करता है और उन्हें यह पता है ।’’

पाकिस्तान और भारत की टक्कर विश्व कप में 16 साल बाद हो रही है और पिछले दस साल से पाकिस्तानी टीम भारत को हरा नहीं सकी है । समीउल्लाह ने भारतीय हॉकी में आये बदलाव की तारीफ करते हुए कहा कि पाकिस्तान को भी दीर्घकालिन लक्ष्य लेकर चलना होगा ।

उन्होंने कहा ,‘‘ 2016 के बाद भारत की टीम ने जबर्दस्त प्रगति की है । उन्होंने अपनी व्यवस्था ठीक की और खिलाड़ियों का पूल बढाया । खिलाड़ियों को अच्छे पैसे मिलने लगे और हॉकी लीग फिर शुरू हुई । मैचों से इतने पैसे मिल जाते हैं कि उनकी अच्छे से बसर हो जाती है ।’’

उन्होंने कहा ,‘‘लेकिन पाकिस्तान में हमारे महासंघों की दीर्घकालिक सोच नहीं रही और उन्होंने छोटे छोटे लक्ष्य ही बनाये । जब तक दूरदर्शी योजना नहीं होगी , पाकिस्तानी हॉकी में सुधार नहीं होगा । भारत ने वह चीजें कर दी । उन्होंने फील्ड गोल बढाये, गेंद के साथ वे शानदार मूव करते हैं , उन्होंने पेनल्टी कॉर्नर बेहतर किया , सर्कल के भीतर उनका डीप डिफेंस शानदार है । ’’

अपने खेलने के दिनों की भारत और पाकिस्तान के बीच मैदानी प्रतिद्वंद्विता को ‘मिस’ करने वाले 74 वर्ष के पूर्व दिग्गज ने कहा ,‘‘ पहले भारत पाकिस्तान ही ओलंपिक, एशियाई खेलों का फाइनल खेलते थे और मैनेजर, दर्शक , मीडिया एक हाइप बना देते थे । लेकिन 1972 में पहली बार यूरोपीय टीम जर्मनी के ओलंपिक फाइनल जीतने के बाद यह दबदबा टूट गया । फिर हमने 1990 के बाद एक दूसरे से खेलना ही छोड़ दिया तो वो हाइप भी खत्म हो गई । ’’

उन्होंने कहा ,‘‘ एक समय था चाहे 1978 की श्रृंखला हो या 1982 का विश्व कप हो , मैदान पर कम से कम 20000 और 35000 तक दर्शक होते थे । सरहद के दोनों तरफ सही हाल रहता था ।लेकिन अब वैसा प्रदर्शन भी नहीं है । प्रदर्शन बेहतर होगा तो लोग देखने आयेंगे । ’’

उन्होंने कहा कि यूरोप की टीमों ने हॉकी को फुटबॉल की तरह बना दिया लेकिन अब वे ही टीमें सर्कल के भीतर कौशल दिखाने लगी हैं और भारत . पाकिस्तान को भी आने वाले समय में यही करना होगा ।

समीउल्लाह ने कहा ,‘‘ जब हॉकी के नियम बदले तो यूरोपीयों ने हॉकी को फुटबॉल जैसा बना दिया और कौशल खत्म कर दिया । भारत और पाकिस्तान भी उसी पैटर्न पर खेलने लगे । लेकिन अब आप बेल्जियम , जर्मनी जैसी टीमों को देखें तो अब वे सर्कल के भीतर हुनर दिखाने लगे हैं ।मुझे लगता है कि भारत और पाकिस्तान को भी अब ड्रिबलिंग, कलात्मक हॉकी को वापिस लाना होगा । ’’

समीउल्लाह ने भारतीय हॉकी के विकास की तारीफ करते हुए कहा ,‘‘ भले ही यूरोप की टीमों ने हॉकी का रोमांच अपनी तरफ खींच लिया लेकिन मुझे लगता है कि अब ये चीजें बेहतर होगी , खासकर भारत में । भारत अब दुनिया की दस टीमों में है और हम चाहते हैं कि पाकिस्तान को भी वहां लेकर आये । इसके लिये भारत और पाकिस्तान का एक दूसरे से खेलना भी जरूरी है ।’’

उन्होंने यह भी कहा कि खिलाड़ी के पास कौशल होगा तो दर्शक खुद ब खुद मैदान पर आयेंगे ।

उन्होंने कहा ,‘‘ 1984 तक भारत और पाकिस्तान के पास शानदार खिलाड़ी थे । चाहे भारत के अजितपाल हो, सुरजीत हो, हरमीक , अशोक कुमार या मोहम्मद शाहिद हो या पाकिस्तान के अख्तर रसूल, सलाहुद्दीन, हसन सरदार, शहनाज शेख , कलीमुल्लाह इन सभी को देखने के लिये दर्शक आते थे । उस समय इतनी बेहतरीन हॉकी खेली जाती थी कि प्रतिद्वंद्विता के बावजूद आपस में बदसलूकी नहीं होती थी । अभी भारत के पास भी एक बेहतरीन गोलकीपर (पी आर श्रीजेश ) था जिसका कौशल देखने दर्शक आते थे ।’‘

भारत के खिलाफ सबसे यादगार मुकाबले के बारे में पूछने पर उन्होंने तपाक से कहा ,‘‘ 1982 एशियाई खेलों का मुकाबला जब हम दिल्ली में 7-1 से जीते थे । हमें लगता था कि यह रिकॉर्ड कभी नहीं टूटेगा लेकिन पाकिस्तान हांगझोउ एशियाई खेल 2023 में भारत से 10-2 से हार गया ।’’

भाषा मोना पंत

पंत