टेस्ट इतिहास से सफेद गेंद की परीक्षा तक, न्यूजीलैंड का फोकस प्रक्रिया पर ही : फिलिप्स

टेस्ट इतिहास से सफेद गेंद की परीक्षा तक, न्यूजीलैंड का फोकस प्रक्रिया पर ही : फिलिप्स

टेस्ट इतिहास से सफेद गेंद की परीक्षा तक, न्यूजीलैंड का फोकस प्रक्रिया पर ही : फिलिप्स
Modified Date: January 17, 2026 / 07:04 pm IST
Published Date: January 17, 2026 7:04 pm IST

इंदौर, 17 जनवरी (भाषा) न्यूजीलैंड के बल्लेबाज ग्लेन फिलिप्स ने कहा कि भारत में इतिहास रचने का एक और अध्याय लिखने का मौका ‘काफी खास’ है लेकिन उन्होंने यह भी कहा कि उनकी टीम मजबूत मेजबान टीम के खिलाफ सफेद गेंद की श्रृंखला में सफल होने के लिए भावनाओं की बजाय प्रक्रिया और परिस्थितियों के अनुसार खुद को ढालने पर निर्भर रहेगी।

न्यूजीलैंड ने अक्टूबर 2024 में भारत में टेस्ट श्रृंखला में ऐतिहासिक जीत हासिल की थी और तब वह 69 साल में भारत में श्रृंखला जीतने वाली पहली मेहमान टीम बनी। भारत में 1988 के बाद अपनी पहली टेस्ट जीत दर्ज करते हुए न्यूजीलैंड ने 3-0 से ‘क्लीन स्वीप’ किया था।

फिलिप्स ने कहा कि वह उपलब्धि प्रेरणा जरूर है लेकिन उन्होंने कहा कि लाल गेंद की सफलता और सीमित ओवरों की चुनौती के बीच सीधे तुलना नहीं हो सकती।

 ⁠

फिलिप्स ने रविवार को यहां होने वाले निर्णायक मुकाबले से पहले कहा, ‘‘इतिहास रचने के मौके बहुत कम आते हैं और ये वाकई खास होते हैं। लेकिन सिर्फ इसी पर फोकस करने से मदद नहीं मिलती। बतौर पेशेवर खिलाड़ी हम हर पल को एक सामान्य दिन की तरह लेने की कोशिश करते हैं। ’’

हाल में टेस्ट श्रृंखला की जीत के बावजूद फिलिप्स ने सफेद गेंद के क्रिकेट की चुनौती की गंभीरता पर बात करते हुए कहा, ‘‘भारत खेलने के लिए बेहद मुश्किल जगह है और उनकी टीम शानदार है। यहां सफेद गेंद की चुनौती बिल्कुल अलग है और बहुत कम टीमें ऐसा कर पाई हैं। ’’

न्यूजीलैंड के दृष्टिकोण को दोहराते हुए फिलिप्स ने कहा कि वर्तमान में रहना ही सबसे अहम है। उन्होंने कहा, ‘‘हम एक बार में एक मैच पर ही ध्यान लगा रहे हैं और हर बार मैदान पर उतरते समय अपना सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन कर रहे हैं। ’’

होलकर स्टेडियम की परिस्थितियों पर बात करते हुए फिलिप्स ने कहा कि शाम के समय ओस निर्णायक भूमिका निभा सकती है। उन्होंने कहा, ‘‘नमी के कारण जैसे तापमान गिरता है, मैदान काफी गीला हो सकता है। 34 ओवर के बाद सिर्फ एक गेंद का इस्तेमाल खेल का रूख बदल जाता है। ’’

भाषा नमिता मोना

मोना


लेखक के बारे में